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शिक्षा

बीएचयू के छात्र से जानिए हर घंटे कैसे बदला आंदोलन

Janjwar Team
28 Sep 2017 7:27 PM GMT
बीएचयू के छात्र से जानिए हर घंटे कैसे बदला आंदोलन
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छेड़छाड़ के खिलाफ बीएचयू आंदोलन में सक्रिय रहे सामाजिक विज्ञान संकाय के छात्र शाश्वत उपाध्याय की आंखों देखी, तथ्य और साक्ष्य के साथ पढ़िए बीएचयू में हुए लड़कियों के पहले व्यापक आंदोलन की पूरी क्रोनोलॉजी...

21 सितंबर
शाम 6 बजकर 20 मिनट
बीएचयू के मुख्यद्वार पर विजुअल आर्ट्स की छात्रा को बाइक सवारों द्वारा भद्दे तरीके से छेड़ा गया। छेड़छाड़ बीएचयू के मुख्य द्वार पर हुई। यहां से मात्र 50 मीटर पर गार्ड मौजूद खड़ा था। गार्ड से पीड़ित लड़की ने छेड़छाड़ की शिकायत की। मौजूद गार्ड ने जवाब में कहा, 'घूम ही क्यों रही थी?' गार्ड के जवाब से निराश हो लड़की हॉस्टल गई। उसने हम सबके बीच अपनी आपबीती बताई। अन्य दोस्तों के साथ 21 सितंबर की रात लड़की प्रॉक्टर से मिलने गयी। पर वहां भी सुनवाई नहीं हुई और वही जवाब मिला कि इतने बजे क्या करने गयी थी?

22 सितंबर
सुबह 6:00 से 11:00 बजे तक
रात भर में हॉस्टल में लड़कियों में बात फैली और सुबह 6 बजे वो सब सड़क पर आ गयीं। त्रिवेणी और महिला महाविद्यालय (mmv) की लड़कियां इकट्ठा होकर लँका गेट पर आ गयीं। शांतिपूर्ण तरिके से मांग रखने लगीं। एसडीम और प्रॉक्टर वगैरह आये। और मामला सुलझाने की कोशिश की जा रही थी और 11 बजे fir हुई।

दोपहर 11:00 से शाम 6:00 बजे तक
लड़कियों और लड़कों की संख्या बढ़ती ही जा रही थी। सिनयरर्स, रिसर्च स्कॉलर्स की उपस्थिति से बल मिल रहा था। सिनयरर्स ने ही बिस्किट, चाय,पानी,ओआरएस तक कि व्यवस्था की।

शाम 6:00 बजे से 9:00 बजे तक
हां राजनीति करने वाले लड़के और लड़कियां सुबह से लगे रहे, समझौता कराने से लेकर हंगामा करने तक सब कोशिशों के बाद नया शिगूफा unsafe bhu के बैनर का उछला। हुआ यूं कि गेट पर शाम छः बजे एक 10×6 का बैनर टांग दिया गया जिसपे मार्कर से unsafe bhu लिखा था। उन्हें कुछ नहीं मिला तो यही कहने लगे कि बाहर के छात्र थे, HCU के थे। कालिख पोतने जा रहे थे महामना पर। लाल झंडा लगाने जा रहे थे। और भी क्या—क्या अगड़म—बगड़म।

रात 9:00 बजे से 12:00 बजे तक
MMV की कर्फ्यू टाइमिंग है 8 बजे। मतलब जहां भी रहो 8 बजे रात के बाद न आना न जाना। अतः वहाँ मौजूद MMV की लड़कियां गेट के अंदर चली गईं, पर 9 बजे दुगनी संख्या में गेट खोल कर बाहर आ गईं। ये बड़ी बात थी। पुनः आंदोलन ने जन बल से मजबूत पाया खुद को। इसी बीच 2 घण्टे मैं भी अपने रूम गया 12 बजे लौटा।

12:00 से सुबह तक
नारा, हंसी मजाक, टीचर्स की मिमिक्री, एक दुसरे की खिंचाई यह सब पूरी रात चला।
सबसे उल्लेखनीय बात की पहले और दूसरे दिन एक छोटा गेट हर समय खुला हुआ था।

23 सितंबर
सुबह 6:00 बजे से 11 बजे तक
वीसी सर को वहां बुलाने की अपनी मांग पर सारी छात्राएं डटी रहीं। पुनः कुछ नई लड़कियों ने उन्हें साझा किया यानी इस आंदोलन का हिस्सा बनीं। आप नहीं कह सकते कि वह bhu के कॉलेज की थीं या नही। और यदि थी भीं तो गलत क्या था। मांग तो एक ही थी सुरक्षा की सुनिश्चितता।

11:00 बजे से 3:00 बजे तक
कक्षाएं छोड़ के लड़के भी आते रहे और इस दौरान पुलिस, पीएसी भी पर्याप्त रूप से मौजूद रही। एसडीएम अपना काम करते रहे, छात्राएं वीसी साहब का पौरा चाहती रहीं और छात्र सहयोग करते रहे।

3:00 से 7:00
प्रशासन के लोग आ के बोले, वीसी सर MMV के अंदर मिलेंगे, पर कोई मीडिया का नहीं होगा। लड़कियां तैयार हुईं और अंदर जा के बैठ गईं। प्रशासन को उम्मीद थी कि सारी लड़कियां उठ आएंगी और अनशन समाप्त ही करा देंगे। पर आधी लड़कियाँ ही आईं MMV में। 2:30 मिनट इंतज़ार करने के बाद साढ़े 6 बजे सब फिर सेे लँका चलीं गईं। अब कुछ लड़कियां वीसी लॉज में जा के बैठ गईं ।

7:00 से 10:00 बजे तक
7 बजे परिसर छावनी बन गया था। प्रॉक्टर और पुलिस चारो ओर। 10 बजे तक हर घण्टे लगता रहा पुलिस आएगी और जबर्दस्ती करेगी पर छात्राओं का होना शायद उन्हें रोक रहा था।

10:30 पर
वीसी लॉज के बाहर मौजूद लड़कियों और लड़कों पर प्रॉक्टर (चीफ प्रॉक्टर की उपस्थिति में) ने लाठी चार्ज करा दिया।

11:00 पर
लँका पर मौजूद छात्रों पर पीएसी ने लाठी चार्ज किया।और अब हॉस्टल की तरफ पीएसी गई लाठीचार्ज के लिए ही। पीएसी हॉस्पिटल की तरफ भी गई।

12:00 बजे
महिला महाविद्यालय के गेट के अंदर पीएसी ने लड़कियों को भी पीटा। स्पाइनल कॉर्ड में चोट आई है लड़की को। खैर, 1:00 बजे के बाद कोई इंसान नहीं दिख रहा था परिसर में

24 सितंबर
शाम तक लगभग सारे हॉस्टल खाली हो गये लड़कियों के। ऐसे में आंदोलन पर जो आरोप लग रहे या जो मूर्खतापूर्ण बातें हो रही हैं, प्रत्यक्षदर्शी होने के नाते मैं एक—एक कर जवाब दे रहा हूं।।।

विवाद — 1
प्रायोजित धरना था, रात भर में ही लड़कियों को क्या हुआ कि इकठ्ठा हो गईं और प्रधानमंत्री के यात्रा से पूर्व ही क्यों ?

जवाब — जब वह वॉर्डन से कहने गईं तो उन्होंने कहा कि तुम्हारी गलती है। प्रॉक्टर ने यह भी कहा कि घूम ही क्यों रही थी? इन दोनों ही बातों के साक्ष्य मेरे पास हैं।

विवाद — 2
पहले दिन 22 सितंबर को 11 बजे तक ठीक था, फिर राजनीति होने लगी ।

जवाब — लड़कियों का सुबह से कहना था कि वीसी सर से मिलना है। और 22 की सुबह 6 बजे से 23 की शाम 10 बजे लाठी खाने तक यही कहती रहीं। लड़कियां किसी के बरगलाने में आतीं तो समझौता नहीं करतीं?

विवाद — 3
राजनीति हुई, बाहरियों ने कब्जा कर लिया

जवाब — किसी संगठन का कोई बैनर दो दिन तक लगा नहीं, राजनीति कैसी ?
और परिसर में मौजूद छात्र संगठनों के बड़े—छोटे पदाधिकारी दोनों दिन मौजूद रहे,सक्रियता से मौजूद रहे।
चक्रपाणि ओझा जी (abvp के परिसर प्रमुख हैं )
धनन्जय सुग्गु जी(nsui से)
दिवाकर सिंह जी (यूथ फ़ॉर स्वराज)
रौशन पांडेय जी (aisa से) अन्य भी थे।

और हाँ, अपना भगवा, लाल, नीला, आसमानी अपने—अपने अलगनी पर टांग लो। यह असली रंग है bhu का इस पर गौर करने की आवश्यकता है।

विवाद — 4
वामपंथियों ने हाईजैक कर लिया। JNU, HCU से आये थे और un safe bhu का बैनर टांग दिया, लाल झंडा लगाने चढ़ गए थे, महामना पर कालिख पोतने जा रहे थे।

जवाब — महत्वाकांक्षा पूरा ब्रह्मांड तबाह कर सकती है, यह तो खैर आंदोलन ही था। बीएचयू की वो मूर्ख लड़की भी बोल रही ऐसा और भी लोग देखा—देखी चंपे हैं। अरे, एक तस्वीर तो होगी न जब लड़के पोतने जा रहे कालिख ? एक तस्वीर तो होगी न जब लाल झंडा लगाने चढ़ रहा कोई ? हैदराबाद विश्वविद्यालय से किस ट्रेन से आये वो सब बैनर टांगने ? बैनर शाम 6 बजे टँग गया । 12 घण्टा में बुलेट ट्रेन ही पहुंचा सकती है। और आपकी भावना आहत हो गई उस बैनर भर से ? बदनाम हो गया bhu उतने से? लाठीचार्ज से तो नाम बढ़ गया न ? और छेड़छाड़ से।।।।।।???

लाठी चार्ज होने की प्रक्रिया
लड़कियों का मांग पत्र देखें तो वह मांग कम सुझाव ज्यादा था। उनकी एक ही इच्छा थी, वीसी सर आ जाते। नहीं आये। लाठी भिजवाई और परिणाम सामने है।

हम सबने कई बार कहा कि वीसी यहाँ नही आएंगे, क्योंकि तीन साल में हर बार उनका दम्भ हावी रहा है उन पर। लायब्रेरी का मुद्दा हो या कोई अन्य। कभी नहीं आये बच्चों से मिलने, पर वो अड़ी रहीं।

एक बार(दूसरे दिन 4 बजे शाम में ) कहा गया कि MMV के अंदर मिलने आएंगे । आधे से अधिक छात्राएं लँका गेट से MMV में आ गईं। 2 घन्टे तक नहीं आए तो 6:30 का अल्टीमेटम दे कर पुनः आंदोलन स्थल पर आ गईं। इसी बीच वीसी त्रिवेणी (जहाँ की लड़की के संग छेड़छाड़ हुई थी) गये। वहाँ मौजूद लड़कियों ने ह्यूमन चेन बना के उन्हें लँका जाने बोला। इतना आक्रोश दो दिन तक इंतजार और MMV में न आने के कारण था। उसी रात रात के 9 बजे से लँका से कुछ छात्र—छात्राएं वीसी आवास के बाहर आ कर बैठ गए। कुछ लँका पर ही डटे रहे। अब वहाँ 10:30 पर प्रॉक्टर ने सबसे पहले लाठीचार्ज किया।

वहाँ एक जन का हाथ टूटा, एक जन को 10 लाठी लगी, लड़कियों को भी मारा गया। उसके 30 मिनट बाद पीएसी ने लाठीचार्ज किया लँका गेट बहुत बुरी तरह से। और फिर उसके 30 मिनट बाद MMV में अंदर घुस के पीएसी ने लाठीचार्ज किया। इन सबके वीडियो मौजूद हैं साफ साफ।

और वीसी साहब अब तक कहते रहे कि लाठीचार्ज हुआ ही नहीं। बाहरी तत्व थे ।

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