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राजनीति

भाजपाई मंत्री ने बजाया बदजुबानी का नया बाजा, कहा सेकुलर वो जिनको नहीं पता अपने बाप का

Janjwar Team
25 Dec 2017 2:31 PM GMT
भाजपाई मंत्री ने बजाया बदजुबानी का नया बाजा, कहा सेकुलर वो जिनको नहीं पता अपने बाप का

मंत्री ने सवाल दागते हुए कहा, 'सेकुलर और प्रगतिशील बुद्धिजीवियों को अपने इतिहास, संस्कृति और परंपरा का कोई ज्ञान नहीं होता। उनके लिए 'मनु स्मृति' बेकार की पुस्तक है और 'अंबेडकर स्मृति' महान और चर्चा योग्य....

जनज्वार, दिल्ली। केंद्रीय रोजगार और कौशल विकास राज्य मंत्री अनंतकुमार हेगड़े ने रविवार 24 दिसंबर को एक नया विवाद छेड़ दिया। बदजुबानी के लिए चर्चा में रहने वाले अपने गृहराज्य कर्नाटक में जनता को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आपको पता है धर्मनिरपेक्ष लोग कौन होते हैं? फिर खुद ही जवाब में कह डाला, 'धर्मनिरपेक्ष वो होते हैं जिनको अपने मां—बाप के खून का पता नहीं होता। इसलिए मेरा प्रस्ताव है कि संविधान में धर्मनिरपेक्षता की प्रस्तावना को बदल दिया जाना चाहिए।'

मोदी मंत्रिमंडल के इस मंत्री अनंतकुमार हेगड़े की जुबान उस समय 'गंदी जुबान' में बदल गयी जब वह कर्नाटक के कोप्पल जिले में ब्राम्हण युवा परिषद की एक बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि हमलोग सत्ता में इसीलिए आए हैं कि संविधान को बदल सकें।

अगर मंत्री की इस बदजुबानी को अनेक शब्दों में एक शब्द में तब्दील करें तो यह एक गाली है, जो उनको दी जाती है जो समाज के मुताबिक नाजायज संबंधों से पैदा होते हैं और उनको अपने मां—बाप का पता नहीं होता।

मंत्री ने सेकुलर लोगों के बारे में अपनी राय को और विस्तार देते हुए आगे कहा कि जो लोग सेकुलर यानी धर्मनिरपेक्ष होने का दावा करते हैं, दरअसल उन्हें न अपने मां—बाप का पता है और न ही अपने खून का। सेकुलर कहलाकर कोई गौरव कैसे महसूस कर सकता है।

पांच बार से सांसद रह चुके इस मंत्री हेगड़े के मुताबिक, 'यदि कोई व्यक्ति मुस्लिम, ईसाई, ब्राह्मण, लिंगायत या हिंदू के रूप में पहचान लेता है तो मुझे खुशी होगी। लेकिन खुद को कोई धर्मनिरपेक्ष बताता है तो मुझे मुश्किल होती है।'

मंत्री ने सवाल दागते हुए कहा, 'सेकुलर और प्रगतिशील बुद्धिजीवियों को अपने इतिहास, संस्कृति और परंपरा का कोई ज्ञान नहीं होता। उनके लिए 'मनु स्मृति' बेकार की पुस्तक है और 'अंबेडकर स्मृति' महान और चर्चा योग्य।

मंत्री के बयान का कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कड़े शब्दों में निंदा की है और कहा है कि हम भाजपा के केंद्रीय मंत्री के स्तर पर उतरकर तो जवाब नहीं दे सकते। एसएफआई ने भी इस पर कड़ा ऐतराज जताया है।

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