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चुनावी पड़ताल 2019

यूपी में प्रचार करने पहुंचे बीजेपी सांसद-विधायक को जनता ने दौड़ा-दौड़ा कर खदेड़ा

Prema Negi
22 April 2019 4:38 PM GMT
यूपी में प्रचार करने पहुंचे बीजेपी सांसद-विधायक को जनता ने दौड़ा-दौड़ा कर खदेड़ा

भाजपा के सलेमपुर सांसद रविंद्र कुशवाहा, विधायक काली प्रसाद और मंडल अध्यक्ष बृजेश धर दूबे का ग्रामीणों ने रोका काफिला, जनता ने दिखाया भाजपा के प्रति भरपूर आक्रोश, मारपीट पर हुई उतारू और खदेड़ा...

देवरिया से अरविंद गिरि की रिपोर्ट

जनज्वार। भाजपा राज में जनता कितनी त्रस्त है और सरकार की नीतियों और झूठे वायदों से कितनी उब चुकी है, इसका डेमो भी जहां—तहां दिखने लगा है। जनता भाजपा से इतनी ज्यादा खिन्न है कि चुनाव प्रचार के लिए निकले प्रत्याशियों और अन्य नेताओं के साथ मारपीट पर उतारू हो जा रही है। वह नेताओं द्वारा दिखाए गए सपनों का हिसाब मांग रहे है और उनके वादों का ब्योरा भी ले रही है।

कुछ ऐसा ही सीन नजर आया देवरिया जनपद के सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र में। यहां से भाजपा के वर्तमान सांसद और सांसद प्रत्याशी ​रविंद्र कुशवाहा प्रत्याशी के चुनाव प्रचार में क्षेत्रीय भाजपा विधायक काली प्रसाद अपने समर्थकों के साथ मटियारा जगदीश में प्रचार प्रसार करने गये थे, मगर गांव की जनता ने अपने गांव की उपेक्षा का आरोप लगाकर उन्हें अपनी ग्रामसभा में घुसने तक नहीं दिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मौकापरस्त भाजपाई नेता सिर्फ चुनावों के वक्त हमें लॉलीपॉप दिखाने आते हैं, और जीतने के बाद हमारा कोई नामलेवा नहीं होता, न ही इन नेताओं को हमारी दुख तकलीफों से कोई वास्ता है। इसलिए अपने ग्रामसभा में घूमकर चुनाव प्रचार करने पर नाराज़गी व्यक्त करते हुए विधायक काली प्रसाद और मंडल अध्यक्ष बृजेश दूबे के साथ आक्रोशित जनता हाथापाई पर उतर आई।

वहीं पुरैना मिश्र गांव के नौजवानों ने विधायक काली प्रसाद व सांसद रविन्द्र कुशवाहा का जमकर विरोध किया था। दोनों नेताओं को इस गांव से भी जान बचाकर भागना पड़ा। बाद में विधायक ने पुलिस पर दबाव डालकर मुकदमा लिखवाया और परिवार वालों पर दबाव डालकर माफी मंगवायी।

आज 22 अप्रैल को सलेमपुर संसदीय क्षेत्र के मटियारा जगदीश में पहुंचे वर्तमान विधायक काली प्रसाद का जनता ने भारी विरोध किया। आक्रोशित ग्रामीणों ने कहा कि इन पांच सालों के दौरान आज तक कोई भाजपा नेता हमारी दुख—तकलीफों और विकास तो छोड़िए गांव के दर्शन करने तक नहीं आया, मगर वोट के लिए ये हमारे हर घर पर प्रचार के लिए निकल पड़े हैं। इन्हें सिर्फ वोट चाहिए, जिसके लिए ये किसी भी हद तक चले जाते हैं। यहाँ तक कि गांव के प्रधान सुनील यादव की हत्याकांड के बाद भी कोई बीजेपी नेता उनका दुख बांटने तक नहीं पहुंचा।

लेकिन जैसे ही चुनाव नज़दीक आ रहा है, नेताओं को अचानक जनता की याद सताने लगती है। अलबत्ता बीजेपी नेता सुनील यादव के हत्यारों की पैरवी करते जरूर नजर आए। जनता ने सवाल किया कि अब वह किस हैसियत से यहां आए हैं। इस दौरान लोगों ने जमकर नारेबाजी की, किसी तरह विधायक के सुरक्षाकर्मी ने बीच-बचाव कर वहां से उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला।

आज विधायक काली प्रसाद अपने दल बल के साथ जैसे ही मटियारा गांव में पहुंचे, लोगों ने खुल कर उनका विरोध किया।

तरह ग्रामीणों से जान बचाकर, क्षेत्रीय विधायक सलेमपुर काली प्रसाद अपने समर्थकों सहित गांव से बाहर निकल कर आये। यहां भी जनता की भावनाओं को न समझ काली प्रसाद ने अपने साथ हुए जनता के आक्रोश को दलित विधायक होने के कारण कार्रवाई बताया।

काली प्रसाद ने हरिजन एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में दो लोगों को नामजद व पांच अज्ञात के विरुद्ध मुकदमा थाना लार में दर्ज करा दिया।

गौरतलब है कि इससे पहले भाजपा सांसद रविन्द्र कुशवाहा को भी जनता के आक्रोश का सामना लगातार करना पड़ रहा है। कुछ दिन पहले पुरैना मिश्र में ग्रामीण नौजवानों ने विधायक काली प्रसाद व क्षेत्रीय सांसद रविन्द्र कुशवाहा का जमकर विरोध किया था, जिसके बाद भाजपा सांसद ने क्षेत्रीय विधायक काली प्रसाद के सहारे कोतवाली सलेमपुर के कोतवाल से दबाव बनाकर उन नौजवानों को उनके अभिभावकों के साथ बुलवाकर अपने पक्ष में करने का वादा ले माफ़ी मांगने का खूब प्रचार कराया था।

घटनाक्रम के मुताबिक 19 अप्रैल को चुनाव प्रचार के लिए पुरैना मिश्र पहुंचे सांसद रवींद्र कुशवाहा और क्षेत्रीय विधायक काली प्रसाद को ग्रामीणों ने यह कहते हुए गाड़ी से तक नीचे नहीं उतरने दिया कि तुम लोगों को हमारी याद सिर्फ चुनावों के वक्त आती है। यहां भी नौबत हाथापाई तक पहुंच गई। कुछ बुजुर्गों के प्रयासों से किसी तरह सांसद और विधायक को गांव से बाहर निकाला गया।

उस दिन सांसद की गाड़ी जब पुरैना मिश्र गांव में पहुंची तो ग्रामीण युवाओं ने कहा कि हम लोग जब सांसद रवींद्र मिश्र के यहां किसी काम से जाते हैं तो वह मदद करना तो दूर हमें पहचानते तक नहीं हैं, भाजपा नेता सरेआम हमारा अपमान करते हैं, मगर अब जब इनकी जरूरत है तो बेशर्मी से वोट मांगने पहुंच जाते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक युवाओं ने जब सांसद और विधायक को गाड़ी से भी पैर नहीं निकालने दिया तो इन्होंने युवाओं को गाली देते हुए धमकाया कि तुम्हें देख लेंगे, हमें तुम लोगों का वोट नहीं चाहिए।' सांसद—विधायक की यह तेवर देख युवा और ज्यादा उग्र हो गये और उन्होंने उनके साथ प्रचार में आए काफिले को गांव से बाहर खदेड़ दिया।

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