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झारखंड

झारखंड में राशन वितरण की निगरानी में कांग्रेसियों की मुस्तैदी पर बीजेपी ने खड़े किए सवाल

Nirmal kant
14 April 2020 9:56 AM GMT
झारखंड में राशन वितरण की निगरानी में कांग्रेसियों की मुस्तैदी पर बीजेपी ने खड़े किए सवाल
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भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने कहा कि झारखंड में कोरोना संकट के बीच संवैधानिक संकट की स्थिति भी उत्पन्न हो गई है। संवैधानिक संस्थाएं चरमरा गई हैं। सरकार के इशारे पर छोटे से लेकर शीर्ष पर बैठे पदाधिकारी गैरकानूनी अनाप-शनाप निर्णय ले रहे हैं...

जनज्वार ब्यूरो, रांची। कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए देश में लागू लॉकडाउन में जन वितरण दुकानों में राशन वितरण के लिए झारखंड के गोड्डा जिला में अजीबोगरीब आदेश जारी किया गया है। इस आदेश के मुताबिक राशन वितरण की निगरानी के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं की एक सूची बनाई गई है। इस आदेश के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सरकार पर निशाना साधा है।

मेहरामा प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा सभी पंचायत के जनतिरण प्रणाली के दुकानदारों को आठ अप्रैल को जारी पत्र में लिखा गया है कि गोड्डा के उपायुक्त के आदेश के आलोक में जन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता के लिए प्रखंड स्तर पर टास्क फोर्स का गठन किया गया है। इसमें दो अधिकारियों के नाम दिए गए हैं।

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त्र में आगे कहा गया है कि राशन वितरण में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से मेहरामा प्रखंड कांग्रेस कमिटि द्वारा पंचायत स्तर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं की सूची दी गई है, जिसे पंचायत स्तर पर राशन विक्रेताओं के कायरें के निगरानी के लिए प्रतिनियुक्त किया गया है। यह अप्रैल और मई महीने के लिए मान्य होगा।

स पत्र के सार्वजनिक होने के बाद भाजपा ने सरकार पर निशाना साधा है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने कहा कि राज्य में कोरोना संकट के बीच संवैधानिक संकट की स्थिति भी उत्पन्न हो गई है। संवैधानिक संस्थाएं चरमरा गई हैं। सरकार के इशारे पर छोटे से लेकर शीर्ष पर बैठे पदाधिकारी गैरकानूनी अनाप-शनाप निर्णय ले रहे हैं।

प्रकाश ने गोड्डा उपायुक्त के निर्देश पर प्रखंड विकास पदाधिकारी, मेहरामा द्वारा जारी इस आदेश पर कड़ा ऐतराज करते हुए कहा कि झारखंड के इतिहास में किसी सरकार ने ऐसा नियम विरुद्घ निर्णय नहीं लिया।

सवालिया लहजे में कहा, "किसी दल विशेष के कार्यकर्ताओं को सरकारी योजनाओं के निगरानी की जिम्मेवारी कैसे दी जा सकती है? क्या सरकार को अपने तंत्र से भरोसा उठ गया है? क्या सरकारी व्यवस्थाएं नाकाम हो चुकी हैं? या फिर सरकार के ऊपर कांग्रेस पार्टी द्वारा गलत निर्णयों के लिये दबाव बनाया जा रहा है।"

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न्होंने कहा कि सरकार में प्रतिनियुक्ति उसी की होती है, जिनकी नियुक्ति हुई हो। सरकार बताएं कि संबंधित कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की नियुक्ति कहां और किस पद पर हुई है?

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