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महाराष्ट्र में 1000 करोड़ के घोटाले में एनसीपी नेता अजित पवार के खिलाफ कोर्ट ने दिया एफआईआर का आदेश

Prema Negi
23 Aug 2019 4:13 AM GMT
महाराष्ट्र में 1000 करोड़ के घोटाले में एनसीपी नेता अजित पवार के खिलाफ कोर्ट ने दिया एफआईआर का आदेश
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स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक घोटाले में बैंक के निदेशक मंडल ने नाबार्ड के निर्देशों का उल्लंघन कर प्रदान किया था ऋण, इसके अलावा नियमों का उल्लंघन करते हुए नौ चीनी कारखानों को दिया था 331 करोड़ का ऋण...

जेपी सिंह की रिपोर्ट

नाबार्ड (नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर ऐंड रूरल डिवेलपमेंट) की जाँच रिपोर्ट में महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक (एमएससीबी) में 2007 से 2011 के बीच 1,000 करोड़ रुपये का घोटाला 2015 में सामने आया था। इसमें कोई कार्रवाई न होने का संज्ञान लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार 22 अगस्त को मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) को एनसीपी नेता अजित पवार तथा 70 से अधिक अन्य लोगों के खिलाफ महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक (एमएससीबी) घोटाला मामले में प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया।

हाईकोर्ट ने कहा कि इन लोगों के खिलाफ मामले में प्रथम दृष्टया विश्वसनीय साक्ष्य हैं।न्यायमूर्ति एससी धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति एसके शिन्दे ने ईओडब्ल्यू को अगले पांच दिन के भीतर प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया।

क स्थानीय कार्यकर्ता सुरिन्दर अरोड़ा ने साल 2015 में इस मामले को लेकर ईओडब्ल्यू में एक शिकायत दर्ज कराई और एक प्राथमिकी दर्ज करने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में गुहार लगाई। गुरुवार को हाईकोर्ट ने कहा कि नाबार्ड की रिपोर्ट, शिकायत और एमसीएस कानून के तहत दाखिल आरोपपत्र प्रथमदृष्टया बताते हैं कि मामले में आरोपियों के खिलाफ विश्वसनीय साक्ष्य हैं।

पूर्व उपमुख्यमंत्री पवार के अलावा मामले के अन्य आरोपियों में एनसीपी नेता जयंत पाटिल तथा राज्य के 34 जिलों के विभिन्न वरिष्ठ सहकारी बैंक अधिकारी शामिल हैं। आरोपियों की मिलीभगत से 2007 से 2011 के बीच एमएससीबी को कथित तौर पर करीब 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान होने का आरोप है।

नाबार्ड (नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर ऐंड रूरल डिवेलपमेंट) ने इसका निरीक्षण किया और अर्द्ध-न्यायिक जांच आयोग ने महाराष्ट्र सहकारी सोसाइटी अधिनियम (एमसीएस) के तहत एक आरोपपत्र दाखिल किया। आरोपपत्र में पवार तथा बैंक के कई निदेशकों सहित अन्य आरोपियों को नुकसान के लिए जिम्मेदार ठहराया गया। इसमें कहा गया था कि उनके फैसलों, कार्रवाइयों और निष्क्रियता से बैंक को नुकसान हुआ।

नाबार्ड की ऑडिट रिपोर्ट में चीनी फैक्टरियों तथा कताई मिलों को ऋण वितरित किए जाने, ऋण के पुनर्भुगतान में और ऐसे ऋणों की वसूली में आरोपियों द्वारा कई बैंक कानूनों और आरबीआई के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किए जाने की बात सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक तब पवार बैंक के निदेशक थे। निरीक्षण रिपोर्ट के बावजूद मामले में कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई।

कांग्रेस और एनसीपी के 15 साल के शासनकाल में बैंक से संबंधित कई भ्रष्टाचार के मामले सामने आए थे। इसके बाद साल 2011 में रिजर्व बैंक ने बैंक के निदेशक मंडल को बर्खास्त करने का आदेश दिया था। इससे पहले भी अजीत पवार पर सिंचाई घोटाले में फंस चुके हैं।

स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक घोटाले में बैंक के निदेशक मंडल ने नाबार्ड के निर्देशों का उल्लंघन कर ऋण प्रदान किया। इसके अलावा, नियमों का उल्लंघन करते हुए नौ चीनी कारखानों को 331 करोड़ का ऋण दिया गया। कई चीनी कारखानों पर 225 करोड़ रुपये का बकाया है।

छोटे या लघु व्यवसायों को दिए गए ऋण के कारण बैंक का 3 करोड़ का नुकसान हुआ। कई बुनकरों को लगभग 60 करोड़ रुपये का ऋण दिया गया। बैंक को ऋण वसूली में संपत्ति बेचकर लगभग 500 करोड़ रुपये का नुकसानतथा केन एग्रो इंडिया के कारण 90 करोड़ का नुकसान हुआ।

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