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BSNL मंदी से उबरने के लिये जबरन दे रहा कर्मचारियों को वीआरएस, अबतक 77,000 कर्मचारियों के नाम लिस्ट में शामिल

Nirmal kant
25 Nov 2019 1:38 PM GMT
BSNL मंदी से उबरने के लिये जबरन दे रहा कर्मचारियों को वीआरएस, अबतक 77,000 कर्मचारियों के नाम लिस्ट में शामिल
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बीएसएनएल का कंपनी प्रबंधंन कर्मचारियों को जबरन दिलवा रहा वीआरएस, देशभर में 25 नवंबर से भूख हड़ताल पर बैठे बीएसएनएल के कर्मचारी..

जनज्वार। सरकारी दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल के कर्मचारी आज 25 नवंबर को देशभर में भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं। कर्मचारियों ने कंपनी मैनेजमेंट पर आरोप लगाया है कि मैनेजमेंट हमें जबरदस्ती वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति स्कीम) लेने को मजबूर कर रहा है। वीआरएस के तहत जिन कर्मचारियों की उम्र 50 साल से आधिक है उन्हें सेवानिवृत्त कर दिया जायेगा। कंपनी इतने घाटे में है कि वह अपने कर्मचारियों को अक्टूबर का वेतन तक नहीं दे पाई है।

देश की अर्थव्यवस्था इस समय मंदी के दौर से गुजर रही है। विश्व बैंक के आंकड़ों की माने तो 5.8 प्रतिशत जीडीपी ग्रोथ के साथ भारत इस समय अन्य पड़ौसी देश पाकिस्तान, चीन और बांग्लादेश से पीछे चल रहा है। इस मंदी का असर सार्वजनिक क्षेत्र की दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल पर भी पड़ रहा है।

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बीएसएनएल ने आर्थिक तंगी से निजात पाने के लिये सरकार ने वीआरएस नाम की योजना शुरु की है। इस योजना के तहत जिन कर्मचारियों की उम्र 50 साल से अधिक है वह अपनी इच्छा से कार्यकाल से पहले सेवानिवृत्ति ले सकते हैं। इस योजना को कंपनी प्रबंधन ने 4 नंवबर से लागू किया था।

र्मचारी संगठनों ने कंपनी प्रबंधन पर आरोप लगाया है कि वह कर्मचारियों को वीआरएस लेने के लिए मजबूर कर रहा है। एयूएबी यानी ऑल इंडिया यूनियंस एंड एसोसिएशस ऑफ बीएसएनल के संयोजक पी. अभिमन्यु का कहना है कि कंपनी प्रबंधन कर्मचारियों को धमकी दे रहा है।

भिमन्यु ने कहा, 'कर्मचारियों को ये धमकी दी जा रही है कि अगर वे स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति नहीं लेगें तो उनका दूर तबादला किया जा सकता है और साथ ही उनकी सेवानिवृत्ति की आयु भी घटाकर 58 साल तक की जा सकती है।'

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कंपनी प्रबंधंन के मुताबिक अबतक 77,000 कर्मचारियों ने वीआरएस के लिए आवेदन किया गया है जबकि कर्मचारियों का कहना है कि वीआरएस को लेने के लिए प्रबंधन की ओर से हम पर दबाव बनाया जा रहा है।

बीएसएनल में 1.6 करोड़ कर्मचारी काम करते हैं। 2017-18 में बीएसएनएल को 7993 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था जो 2018-19 में बढ़कर 14200 करोड़ रुपये हो गया। बीएसएनएल का तर्क है कि अगर 70 से 80 हजार कर्मचारी वीआरएस लेते हैं, तो कंपनी की सैलरी पर खर्च में सालाना करीब 7 हजार करोड़ की बचत हो सकती है।'

बीएसएनएल के सीएमडी पी. के. पुरवार का कहना है, 'बीएसएनएल की वीआरएस में कंपनी के 50 वर्ष या इससे अधिक आयु के सभी नियमित और स्थायी कर्मचारी इसके योग्य हैं। इसमें उन कर्मचारियों को भी शामिल किया गया है जो प्रतिनियुक्ति पर बीएसएनएल से बाहर किसी अन्य संगठन या विभाग में नियुक्त हैं।'

पुरवार ने आगे कहा, 'वीआरएस के तहत कर्मचारियों को दो किश्तों में बुरे समय में तत्काल सहायता दी जाएगी। ये राशि उनके बाकी सेवाकाल में देय कुल वेतन के सवा गुना के बराबर होगी। इसका भुगतान 2019-20 और 2020-21 के दौरान दो बार किया जाएगा।'

रकार ने 23 अक्टूबर को दूरसंचार क्षेत्र की घाटे से जूझ रहीं दोनों सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां बीएसएनएल और एमटीएनएल के आपस में विलय के साथ इनके कर्मचारियों की संख्या आधी करने के लिए उन्हें वीआरएस का लाभ देने का फैसला किया था। सरकार के अनुसार बीएसएनएल की 75 फीसदी आमदनी कर्मचारियों के वेतन पर खर्च हो जाती है। इसकी सालाना आमदनी करीब 19000 करोड़ रुपये है। अगर ये योजना पूरी तरह कामयाब होती है तो कंपनी को डूबने से बचाया जा सकता है।

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नेशनल फेडरेशन ऑफ टेलीकॉम एंम्पलोयीज के महासचिव चंद्रशेखर सिंह ने जनज्वार से बातचीत में बताया कि सरकार कर्मचारियों की विदाई करना चाहती है। कपंनी प्रबंधन के कुछ अधिकारी कर्मचारियों के बीच भय का माहौल पैदा कर रहे हैं।

हालांकि इससे पहले चंद्रशेखर सिंह ने कहा था, 'बीएसएनएल को लेकर केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री रविशंकर प्रसाद एक जुबान बोलते हैं और बीएसएनएल के अधिकारी दूसरी। मंत्री कहते हैं कि हम सबसे बेहतरीन वीआरएस देंगे या वीआरएस के लिए दबाव नहीं डालेंगे, लेकिन सीएमडी और डायरेक्टर्स कहते हैं कि अगर आप लोगों ने आसानी से नौकरी नहीं छोड़ी तो बुरे परिणाम भुगतने होंगे।'

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