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राजनीति

कुल डेढ़ लाख बीएसएनएल कर्मचारियों में से 80,000 को जनवरी से निकालने की फिराक में सरकार

Nirmal kant
21 Nov 2019 9:41 AM GMT
कुल डेढ़ लाख बीएसएनएल कर्मचारियों में से 80,000 को जनवरी से निकालने की फिराक में सरकार
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केंद्र की मोदी सरकार में घाटे में चल रही दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल, 80,000 कर्मचारियों को निकालने की चल रही तैयारी, वीआरएस नहीं सीआरएसएस देने पर तुली हुई है सरकार...

जनज्वार। सार्वजनिक क्षेत्र की दूरसंचार कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड यानि बीएसएनल अब अपने करीब 77,000 कर्मचारियों को वीआरएस देकर घर बिठाने की तैयारी कर रहा है। बीएसएनएल का दावा है कि 77,000 कर्मचारियों ने वीआरएएस के लिए आवेदन किया है। जबकि नेशनल फेडरेशन ऑफ टेलीकॉम का कहना है कि कर्मचारियों को जबरन वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना) के लिए आवेदन करने के लिए कहा जा रहा है, सीएमडी और डायरेक्टर्स नौकरी नहीं छोड़ने पर बुरे परिणाम भुगतने की धमकी देते हैं।

बीएसएनएल के प्रबंध निदेशक पीके पुरवार ने बुधवार 20 नवंबर को कहा कि सरकार और बीएसएनएल की ओर से दी जा रही यह श्रेष्ठ वीआरएस सुविधा है और इसे कर्मचारियों को सकारात्मक रूप में देखना चाहिए।

नौकरी छोड़ो या परिणाम भुगतो..

हीं इसको लेकर नेशनल फेडरेशन ऑफ टेलीकॉम (एनएफटी) के राष्ट्रीय महासचिव ​चंद्रशेखर सिंह ने जनज्वार से कहा, 'बीएसएनएल को लेकर केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री रविशंकर प्रसाद एक जुबान बोलते हैं और बीएसएनएल के अधिकारी दूसरी। मंत्री कहते हैं कि हम सबसे बेहतरीन वीआरएस देंगे या वीआरएस के लिए दबाव नहीं डालेंगे, लेकिन सीएमडी और डायरेक्टर्स कहते हैं कि अगर आप लोगों ने आसानी से नौकरी नहीं छोड़ी तो बुरे परिणाम भुगतने होंगे।'

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नएफटी के राष्ट्रीय महासचिव ​चंद्रशेखर सिंह बातचीत में आगे कहते हैं, ' बीएसएनल प्रबंधन देशभर के कुल डेढ़ लाख कर्मचारियों में से अस्सी हजार को हर कीमत पर छांटने पर तुला है। जनवरी में उन्होंने छंटनी की सूची भी तैयार कर दी है। सीएमडी हम लोगों से बैठकों में खुलेआम बोलते हैं कि नौकरी छोड़ो या फिर डेढ़ दिन काम करो। साथ ही सीएमडी ऐसी जगह ट्रांसफर की धमकी देते हैं, जहां से शहर आने का सपना छूट जाए। उन्होंने आगे कहा, 'यूनियन ने भी तय कर लिया है कि कर्मचारी अपना काम करेंगे, क्योंकि सीएमडी वीआरएस नहीं, ​बल्कि सीआरएस (अनिवार्य सेवानिवृत्ति योजना) देने पर तुले हुए हैं।'

क्या है स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना

रकार द्वारा दूरसंचार विभाग को सरकारी टेलीकॉम कंपनी बीएसएनल में तब्दील किये जाने के बाद से यह जबर्दस्त घाटे में चल रही थी, इस घाटे से उबरने के लिए सरकार ने एक नई स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (Voluntary Retirement Scheme) लांच की है।

स योजना के मुताबिक कंपनी के सभी नियमित और स्थायी कर्मचारी जिनमें अन्य संगठन में प्रतिनियुक्ति पर तैनात या बीएसएनएल से बाहर प्रतिनियुक्ति के आधार पर तैनात कर्मी भी शामिल होंगे और जिनकी उम्र 50 वर्ष या उससे अधिक हो चुकी है वे वीआरएस योजना का लाभ ले सकते हैं। वीआरएस लेने वाले व्यक्ति को नौकरी के पूर्ण हो चुके प्रति वर्ष के आधार पर 35 दिन का वेतन और नौकरी के शेष बचे प्रति वर्ष के आधार पर 25 दिन के वेतन की राशि मिलेगी।

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सरकार ने पुनरुद्धार पैकेज को दी थी मंजूरी

मोदी सरकार ने घाटे में चल रही सार्वजनिक क्षेत्र की दूरसंचार कंपनियों बीएसएनएल और एमटीएनएल के लिए इसी साल 68,751 करोड़ रुपये के पुनरुद्धार पैकेज को मंजूरी दी थी, जिसमें एमटीएनएल का बीएसएनएल में विलय समेत कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना और 4 जी स्पेक्ट्रम आवंटन को भी शामिल किया गया।

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