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राजनीति

चंदा कोचर मामले में मोदी सरकार क्यों बना रही है सीबीआई अधिकारियों पर दबाव

Prema Negi
28 Jan 2019 6:11 AM GMT
चंदा कोचर मामले में मोदी सरकार क्यों बना रही है सीबीआई अधिकारियों पर दबाव
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चंदा कोचर के पति के भाई राजीव कोचर एविस्टा एडवाइजरी के मालिक हैं। सिंगापुर स्थित फाइनेंशियल कंपनी एविस्टा एडवाइजरी ही वो ही कंपनी है, जिसने ICICI समेत ओर बैंकों से पिछले 6 साल में 7 कंपनियों को 1.7 अरब डॉलर से अधिक के विदेशी मुद्रा और लोन दिलवाया है। इन सभी ने ICICI बैंक से एक ही समय पर कर्ज लिया था...

स्वतंत्र टिप्पणीकार गिरीश मालवीय की टिप्पणी

चंदा कोचर के मामले में सरकार सीबीआई अधिकारियों पर दबाव इसलिए बना रही है ताकि आईसीआईसीआई बैंक में किये गए पहले के और बड़े भ्रष्टाचार के भेद न खुलने पाए।

वीडियोकॉन वाला केस तो दरअसल इन निजी बैंकों में चल रहे लोन घोटालों का 'टिप ऑफ आइसबर्ग' है, असली घोटाले तो सामने आए ही नहीं हैं।

वीडियोकॉन को दिए गए 3,250 करोड़ रुपये के ऋण ओर उसमें धूत के न्यूपावर रीन्यूएबल के साथ कथित लेनदेन को लेकर इस मामले की जांच हो रही है। न्यूपावर का स्वामित्व चन्दा कोचर के पति दीपक कोचर के पास है, लेकिन यदि देखा जाए तो लोन डुबोने की कहानी सिर्फ इतनी ही नहीं है।

चंदा कोचर के पति के भाई राजीव कोचर एविस्टा एडवाइजरी के मालिक हैं। सिंगापुर स्थित फाइनेंशियल कंपनी एविस्टा एडवाइजरी ही वो ही कंपनी है, जिसने ICICI समेत और बैंकों से पिछले 6 साल में 7 कंपनियों को 1.7 अरब डॉलर से अधिक के विदेशी मुद्रा और लोन दिलवाया है। इन सभी कंपनियों ने ICICI बैंक से एक ही समय पर कर्ज लिया था। इसके क्‍लाइंट्स में जयप्रकाश एसोसिएट, जीटीएल इंफ्रा, सुजलॉन और जयप्रकाश पावर भी शामिल हैं।

मूल रूप से एविस्टा लोन लेने वाली कम्पनियों के लिए क्रेडिट एडवाइजर के रूप में विदेशी मुद्रा लोन को रीस्ट्रक्चर करने का काम करती है, जो NPA होने के करीब होते हैं जब कोई कंपनी लोन चुकाने की स्थ‍िति में नहीं रहती, तो वह लोन की मूल शर्तों और दशाओं में ढील देने की मांग करती है। इसे ही लोन रीस्ट्रक्चरिंग कहते हैं इसके एवज में वह उन कम्पनियों से उस लोन के 5 प्रतिशत या उससे कुछ कम वसूल करते हैं।

एविस्टा ने क्रेडिट एडवाइजर के तौर पर वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज के लिए ऋणदाता बैंक के साथ 2015-16 में दो FCCB डील कराई थी, FCCB एक तरह का कन्वर्टिबल बॉन्ड है, जो विदेशी मुद्रा में जारी किया जाता है। भारत में एनपीए के मामले में इन बॉन्ड्स को घरेलू बाजार में डिफॉल्ट को रोकने के लिए जारी किया जाता है। एविस्टा ने जयप्रकाश पावर वेंचर्स के 1300 करोड़ के FCCB की भी रीस्ट्रक्चरिंग की। सुजलॉन की रीस्ट्रक्चरिंग के लिए 3755 करोड़ के FCCB दिए।

जब इंडियन एक्सप्रेस ने ICICI से यह पूछा कि एविस्टा को ही क्यों आपने क्रेडिट एडवाइजर के रूप में स्वीकार किया, जबकि आपकी सीईओ चन्दा कोचर के पति के भाई ही इस कम्पनी के मालिक हैं तो उन्होंने जो जवाब दिया, ऐसा जवाब आपने कभी सुना नहीं होगा!

ICICI का कहना था कि कंपनीज एक्ट 1956 और 2013 के तहत पति का भाई रिलेटिव की कैटेगरी में नहीं आता है, इसलिए बैंक के किसी भी अधिकारी द्वारा इस तरह के रिश्ते के किसी भी प्रकटीकरण की कोई आवश्यकता नहीं है।

इस कदर झोलझाल इन बैंकों में चलती रही है और आज जब इन सब बातों की सीबीआई जाँच होने जा रही है, तो जेटली जी के पेट में दर्द होना शुरू हो गया है। अमेरिका में बैठे बैठे अधिकारियों को इन्वेस्टिगेटिव एडवेंचर से दूर रहने के सुझाव बांट रहे हैं, ताकि पूरी पोल न खुलने पाए।'

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