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चीन ने अमित शाह के अरुणाचल प्रदेश दौरे पर जताई आपत्ति, क्या अब चीन को लाल आंखें दिखाएंगे पीएम मोदी?

Janjwar Team
20 Feb 2020 11:44 AM GMT
चीन ने अमित शाह के अरुणाचल प्रदेश दौरे पर जताई आपत्ति, क्या अब चीन को लाल आंखें दिखाएंगे पीएम मोदी?
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जनज्वार। चीन ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के अरुणाचल प्रदेश दौरे पर आपत्ति जताई है। चीन का कहना है कि भारत की पूर्व सीमा क्षेत्र या चीन के तिब्बत क्षेत्र के दक्षिण भाग उसकी स्थिति सुसंगत और स्पष्ट है। बता दें कि अमित शाह अरुणाचल प्रदेश के 34वें राज्य दिवस के मौके पर पहुंचे।

चीन अरुणाचल प्रदेश के साथ अपनी सीमा को भारत के साथ साझा करता है। अरुणाचल प्रदेश पर वह अपना दावा करता रहा है और प्रदेश में भारत की गतिविधियों पर आपत्ति जताता रहा है। नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे और केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी तब वह चीन को लेकर नसीहत दिया करते थे।

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ब एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि बड़ी बयानबाजी करते हैं। भारत के विदेश मंत्री चीन गए और चीन में जाकर के चीन की हरकतों के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए थी। लाल आंख कर करके चीन को समझाना चाहिए था। डूब मरो, डूब मरो, मेरे देश की सरकार चलाने वालों आपको शर्म आनी चाहिए। जख्मों पर नमक छिड़क रहे हो आप लोग। हिंदुस्तान के सवा सौ करोड़ लोगों के मन पर लगी चोट पर आप एसिड छिड़क रहे हो।'

'चीनी पक्ष ने भारतीय पक्ष से कोई भी ऐसी कार्रवाई रोकने का आग्रह किया है जो सीमा मुद्दे को और जटिल कर सकते हैं और सीमा क्षेत्र की शांति बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाने के लिए कहा है।'

- गेंग शुआंग, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा, 'चीन-भारत सीमा के पूर्वी क्षेत्र या चीन के तिब्बत क्षेत्र के दक्षिणी भाग पर चीन की स्थिति सुसंगत और स्पष्ट है।' उन्होंने आगे कहा कि चीन ने कभी भी भारतीय राज्य को मान्यता नहीं दी थी और इसके बजाय इसे तिब्बत क्षेत्र का अपना दक्षिणी हिस्सा है। पड़ोसी देश ने उल्लंघन महसूस किया।

चीन तिब्बत क्षेत्र के दक्षिणी हिस्से में भारतीय नेताओं के दौरे का कड़ा विरोध करता है क्योंकि इससे चीन की क्षेत्रीय संप्रभुता का उल्लंघन होता है। इसने भारत-चीन सीमा क्षेत्र की स्थिरता को कम कर दिया है और पारस्परिक राजनीतिक विश्वास को तोड़ दिया है। इसने प्रासंगिक द्विपक्षीय समझौते का उल्लंघन किया है।

हां यह उल्लेख करना जरुरी है कि यह पहली बार नहीं है जब चीन ने अरुणाचल प्रदेश में नेताओं के आंदोलन का विरोध किया है। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अरुणाचल प्रदेश दौरे का भी चीन ने विरोध किया था। फरवरी 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4000 करोड़ से ज्यादा की लागत के किसी प्रोजेक्ट का उद्घाटन करने अरुणाचल पहुंचे थे।

की अरुणाचल प्रदेश की यात्रा के साथ बीजिंग ने भारत सरकार से आग्रह किया है कि पहले से ही मौजूद सीमा मुद्दे को जटिल बनाने के लिए कोई कार्रवाई करने से बचना चाहिए। वहीं भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी प्रेस कांन्फ्रेंस कर इस पर प्रतिक्रिया दी है।

'यह भारत का एक अभिन्न अंग है। भारतीय नेता नियमित रूप से राज्य की यात्रा करते हैं क्योंकि वे भारत के किसी अन्य राज्य में जाते हैं। भारतीय नेता के भारत के किसी भी राज्य में जाने पर आपत्ति करना उचित नहीं है।'

-रवीश कुमार, प्रवक्ता विदेश मंत्रालय

ता दें 20 फरवरी को अरुणाचल प्रदेश का राज्य स्थापना दिवस है, इसी दिन वह केंद्र शासित प्रदेश से पूर्ण राज्य बन गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अरुणाचल प्रदेश के लोगों को आश्वासन दिया है कि सरकार राज्य की संस्कृति और विरासत की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और अनुच्छेद 371 बरकरार है और इसे हटाया नहीं जाएगा।

न्होंने राज्य दिवस के लिए अरुणाचल प्रदेश की अपनी यात्रा के दौरान कहा कि अनुच्छेद 371 का अनुच्छेद 370 के निरस्तीकरण से कोई संबंध नहीं है। गृह मंत्री ने अरुणाचल प्रदेश औद्योगिक और निवेश नीति का उद्घाटन किया और इटानगर में आईजी पार्क में कई परियोजनाओं का शुभारंभ किया।

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भारत-चीन सीमा विवाद 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा को कवर करता है। चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा बताता है, जिसका भारत ने हमेशा से विरोध किया है। भारत, अरुणाचल प्रदेश को अपना अभिन्न अंग मानता है। भारत और चीन ने सीमा विवाद को सुलझाने के लिए अब तक 22 बार प्रतिनिधियों की विशेष वार्ता की है।

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