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विमर्श

पाकिस्तान में कोरोना के मामले बढ़कर हुए 1870, अब तक 24 लोगों की मौत

Prema Negi
31 March 2020 10:02 AM GMT
पाकिस्तान में कोरोना के मामले बढ़कर हुए 1870, अब तक 24 लोगों की मौत
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पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा, 'कोरोना वायरस पश्चिमी देशों की तरह नहीं फैला है, लेकिन इसकी कोई गारंटी नहीं है कि आने वाले हफ्तों में तेज बढ़ोतरी नहीं होगी...

पीयूष पंत का विश्लेषण

जनज्वार। कोरोनावायरस के मामले में भी भारत-पकिस्तान एक दूसरे के साथ रस्सा-कसी करते दिखाई दे रहे हैं। भारत में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों का आंकड़ा जहां तेजी से बढ़ रहा है, वहीं पाकिस्तान भी कुछ कम नहीं है, बल्कि वो तो भारत को मात देता नज़र आ रहा है।

भारत में 31 मार्च की सुबह 6 बजे तक 1347 संक्रमित लोग पहचान लिए गए थे। इनमें से 138 मामले ठीक हो चुके हैं और 32 लोगों की मृत्यु हो चुकी है।

हीं डॉन अखबार के अनुसार पाकिस्तान में भी 31 मार्च को दिन में 12 बजे तक कोरोनावायरस के 1870 मामलों की पुष्टि की जा चुकी थी। इनमें से 58 लोग ठीक हो चुके थे और 24 लोग मृत्यु को प्राप्त हुए। सबसे ज़्यादा 658 मामले पंजाब प्रान्त में पाए गए, उसके बाद 627 मामले सिंध में, केपी में 221 कोरोना पॉजिटिव, बलूचिस्तान में 152, इस्लामाबाद में 58 और एजेके में 148 मामले सामने आए हैं।

हालाँकि भारत की तरह पाकिस्तान की सरकार भी लगातार स्थिति नियंत्रण में होने का दावा कर रही है। स्वास्थ्य मामलों पर प्रधानमंत्री के सलाहकार डॉ. जफर मिर्जा ने अपनी दैनिक मीडिया ब्रीफिंग में कहा है कि सरकार द्वारा उठाए गए प्रभावी कदमों की वजह से पाकिस्तान में वायरस का प्रकोप काबू में है।

हीं 27 मार्च को पत्रकारों से बात करते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा था कि कि कोरोना वायरस पश्चिमी देशों की तरह नहीं फैला है, लेकिन इसकी कोई गारंटी नहीं है कि आने वाले हफ्तों में तेज बढ़ोतरी नहीं होगी। सरकार अब 'सबसे खराब स्थिति' के लिए तैयार हो रही है।

मरान ने कहा कि बाहर रह रहे पाकिस्तानियों से स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान में फंड जमा करने की अपील करेंगे, ताकि रुपये के ऊपर से दबाव कम किया जा सके। मुश्किल के वक्त में देश को यह फंड बाहर निकालेगा।

मरान खान ने यह भी कहा कि एक कोरोना वायरस रिलीफ फंड तैयार किया जाएगा जिससे दिहाड़ी मजदूरों और समाज के ऐसे गरीब तबके की मदद की जा सके, जिन पर कोरोना का सबसे ज्यादा असर पड़ा है। इसमें आम लोग भी दान दे सकते हैं और साथ ही सरकार भी एहसास प्रोग्राम के तहत आर्थिक सहायता देगी।

पाकिस्तान की सरकार ने यह भी ऐलान किया है कि 'कोरोना रिलीफ टाइगर्स' नाम की युवा फोर्स सरकार की मदद करेगी। ये लोग देशभर में लोगों को उनके घरों तक सामान पहुंचाएंगे। इसके लिए रजिस्ट्रेशन 31 मार्च को शुरू किया जाएगा।

वैसे प्रधानमंत्री इमरान खान पूरे पकिस्तान में लॉकडाउन घोषित करने के पक्ष में कभी नहीं रहे हैं। अभी भी उनका नज़रिया इस बारे में ढुलमुल ही है। इसके पीछे वो ग़रीबों और मज़दूरों की आर्थिक बदहाली का हवाला देते हैं।

कोरोना वायरस की समस्या पर राष्ट्र के नाम अपने दूसरे संबोधन में इमरान ने कहा था, “अगर हमारे (पाकिस्तान के) हालात इटली और चीन जैसे होते तो मैं पूरा पाकिस्तान लॉकडाउन कर देता। बहस चल रही है कि पूरे मुल्क को लॉकडाउन कर देना चाहिए। मैं आपको इसका मतलब बताता हूं।'

न्होंने आगे कहा, 'लॉकडाउन-कर्फ्यू का मतलब सभी नागरिकों को उनके घरों में बंद कर देना है। अगर आज पूरा लॉकडाउन मैं कर दूं तो दिहाड़ी कमाने वाले मजदूर घरों में बंद हो जाएंगे। 25 फीसदी गरीब लोगों का क्या होगा। क्या हमारे पास इतने संसाधन हैं कि हम दिहाड़ी वाले सभी लोगों के घरों तक राशन पहुंचा सकें? देश ऐसा कर पाने की स्थिति में नहीं है।”

हालांकि 25 मार्च को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये सांसदों से बातचीत करते हुए इमरान खान ने कहा था कि सरकार स्थिति का जायजा लेगी और अगर ज़रूरी हुआ तो पूरे देश में कर्फ्यू लगाया जा सकता है। लेकिन अभी तक ऐसी घोषणा हुई नहीं है।

हाँ, ये ज़रूर हुआ है कि सरकार के ढुलमुल रव्वैय्ये से नाराज़ पाकिस्तानी सेना ने इमरान सरकार को कई सूबों में सेना उतारने के लिए मजबूर कर दिया है। आंतरिक मंत्रालय द्वारा 23 मार्च को अधिसूचना जारी कर सेना उतारने की घोषणा कर दी गयी। यह फैसला संविधान के अनुच्छेद 245 और सीआरपीसी की धारा 131 (ए) के तहत लिया गया।

पंजाब और सिंध में लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग को लागू कराने के लिए सेना को उतार दिया गया है। वैसे बिगड़ते हालात देखते हुए यह मांग पकिस्तान के सभी प्रांतों और क्ष्रत्रों से आ रही थी। बाकी प्रांतों में भी सेना की मदद लेने के साथ-साथ इस्लामाबाद, पाक अधिकृत कश्मीर और गिलगिट-बाल्टिस्तान में भी सेना बुलाई गयी है।

बसे पहले सिंध की सरकार ने 22 मार्च को आधी रात से सिंध प्रांत में लॉकडाउन की घोषणा कर दी थी। कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के कारण पाकिस्तान के दक्षिणी सिंध प्रांत के अधिकारियों ने 15 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा की थी।

सिंध में हाल में जो टेस्ट हुए हैं और जो केस पॉज़िटिव पाए गए हैं उनमें ज़्यादातर मामले क्रॉस-ट्रैवल बॉर्डर के हैं। यहां ज़्यादातर लोग ईरान से लौटे हैं, वहीं 80 से अधिक मामले लोकल-ट्रांसमिशन के पाए गए हैं यानी किसी ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आने से जो हाल ही में विदेश से लौटा हो।

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान चाहे जितनी भी सफाई दें, पाकिस्तान में संक्रमित लोगों के बढ़ते आंकड़े बता रहे हैं कि स्थिति वहां भी गंभीर होती जा रही है। यही कारण है कि समस्या से निपटने के लिए पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने विदेशों से मदद की गुहार लगाते हुए फंड मुहैया करवाने की अपील की है।

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता आएशा फारुखी ने हाल ही में पत्रकारों को बताया कि प्रधानमंत्री इमरान खान ने विकासशील देशों को मिले कर्ज पर ब्याज की दरों में कटौती करने की अपील की है।

हीं 28 मार्च को चीन से एक विशेष विमान आठ स्पेशल डॉक्टरों की एक टीम और राहत सामग्री लेकर इस्लामाबाद हवाई अड्डे पर पहुंचा। चीनी डॉक्टरों की यह टीम कोरोना वायरस के प्रसार से निपटने में पाकिस्तान पहुंची है। पहले भी चीन वेंटिलेटर्स और मास्क पकिस्तान भेज चुका है।

सके पूर्व पत्रकारों से बात करते हुए पाकिस्तान की National Disaster Management Authority के अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल मुहम्मद अफ़ज़ल ने कहा था कि चीन से और अधिक टेस्टिंग किट्स व प्रोटेक्टिव गियर मगाये जा रहे हैं। साथ ही वेंटिलेटर्स का भी आयात किया जा रहा है।

ससे साफ़ हो जाता कि भारत की तरह पाकिस्तान भी टेस्टिंग लैब्स, टेस्टिंग किट्स और वेंटिलेटर्स की कमी से जूझ रहा है। आने वाले दिनों में ये चुनौती अधिक बड़ी हो सकती है।

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