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कोर्ट ने केंद्र से पूछा- CBI से क्यों नहीं करायी गई फर्जी मुठभेड़ में मारे गए लोगों की जांच ?

Janjwar Team
7 March 2020 1:25 PM GMT
कोर्ट ने केंद्र से पूछा- CBI से क्यों नहीं करायी गई फर्जी मुठभेड़ में मारे गए लोगों की जांच ?
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जनज्वार ब्यूरो। आतंकवाद के दौर में फर्जी मुठभेड़ में मारे गए लोगों का मामला एक बार फिर से उठ रहा है। इस मामले को लेकर पंजाब डाक्यूमेंटेशन एंड एडवोकेसी प्रोजेक्ट नामक स्वयं सेवी संस्था ने पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी। इस याचिका में मांग की कि जिस तरह से वर्ष 2012 में मणिपुर में 1528 लोगों को मुठभेड़ के नाम पर मार डालने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए थे।

सी तरह के आदेश पंजाब में वर्ष 1984 से 1995 के दौरान पंजाब में फर्जी मुठभेड़ दिखाकर मारे गए 8257 लोगों के मामले में दिए जाए। कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार के वकील से पूछा कि इस संबंध में जुड़े पहले मामले किस आधार पर सुने गए। मामले पर 22 अप्रैल के लिए अगली सुनवाई तय की गई है।

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कई मामलों में पहले हो चुके हैं जांच के आदेश

पंजाब डाक्यूमेंटेशन एंड एडवोकेसी प्रोजेक्ट नामक स्वयं सेवी संस्था की तरफ से दाखिल याचिका में याचिकाकर्ताओं बैरिस्टर सतनाम सिंह बैंस और जगजीत सिंह बाजवा ने कहा कि इससे पहले इन मामलों में कोर्ट सीबीआई जांच के आदेश दे चुकी है। यह आदेश पुलिस की भूमिका की जांच करने के बारे में दिए गए थे।

तरह से अमृतसर में 2097 लोगों का अंतिम संस्कार कर दिए जाने के मामले में भी सीबीआई को जांच के आदेश दिए गए थे। उनकी मांग है कि इसी आधार पर फर्जी मुठभेड़ दिखाकर मार दिए गए 8257 लोगों के मामले में भी सीबीआई की जांच होनी चाहिए।

संस्था ने जुटाया डाटा

संस्था ने लगातार काम करते हुए मारे गए लोगों का डाटा जुटाया। इसके लिए पंजाब के 14 जिलों में संस्था के स्वयंसेवी गए। उनका पूरा रिकार्ड इकट्ठा कर इसकी जांच की गयी। इसमें पाया कि आतंकवाद के दौरान बड़ी संख्या में फर्जी मुठभेड़ को पुलिस ने अंजाम दिया है। इन लोगों का अभी तक इंसाफ नहीं मिला है। इसी को लेकर संस्था पहले सुप्रीम कोर्ट गयी थी। वहां से उन्हें पंजाब व हरियाणा उच्च न्यायालय में अपील के लिए बोला गया।

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पीड़ित परिवार फिर रहे मारे मारे

तंकवाद के दौरान पुलिस ने बड़ी संख्या में फर्जी मुठभेड़ को अंजाम दिया। युवकों को घरों से उठा कर उन्हें आतंकवादी बता मार डाला गया। बाद में इनका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया। तब पुलिस ने बताया कि यह आतंकवादी है और इनकी पहचान नहीं हो सकती। दूसरी ओर जिन परिवारों के सदस्य गायब हुए हैं, उन्हें आज तक पता ही नहीं चला कि उनके सदस्य गए कहां? इसलिए इन मामलों की सीबीआई की जांच जरूरी है।

चाहिए सच सामने

संस्था के प्रतिनिधियों ने बताया कि उनकी मांग बस इतनी है कि सच सामने आना चाहिए। क्योंकि जब तक इन मामलों की स्वतंत्र जांच नहीं जाती तब तक सच सामने नहीं आ सकता। इसलिए वह सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। यह सुनियोजित हत्याएं थी, जिन्हें पुलिस ने अंजाम दिया है। बैरिस्टर सतनाम सिंह ने बताया कि उन्हें कानून पर पूरा यकीन है, इंसाफ जरूर मिलेगा। एक दिन सच सभी के सामने होगा।

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