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राजनीति

प्रधानों की गुंडागर्दी और जातिगत उत्पीड़न से तंग आकर यूपी में दलित अधिकारी ने की आत्महत्या

Prema Negi
5 Sep 2019 2:53 PM GMT
प्रधानों की गुंडागर्दी और जातिगत उत्पीड़न से तंग आकर यूपी में दलित अधिकारी ने की आत्महत्या
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दलित ग्राम विकास अधिकारी त्रिवेंद्र ने अपने सुसाइड नोट में लिखा है , 'मेरे 8 माह के सेवाकाल में एक भी दिन इन लोगों ने मुझे सुकून से काटने नहीं दिया। मेरी मौत के जिम्मेदार ग्राम रसूलपुर व ग्राम देवरिया के प्रधान व किसान यूनियन के अध्यक्ष प्रदीप शुक्ला उर्फ श्यामू शुक्ला हैं...

लखीमपुर खीरी से मुश्ताक़ अली अंसारी की रिपोर्ट

लित उत्पीड़न की खबरें हमारे देश में आम हो गयी हैं। उत्पीड़न से आजिज हो उत्तर प्रदेश के लखीमपुर में एक दलित ग्राम विकास अधिकारी ने आत्महत्या कर ली। इस घटना ने एक बार फिर रोहित वेमुला कांड की याद ताजा कर दी है। आत्महत्या करने वाले अधिकारी त्रिवेंद्र कुमार रैदास ने अपनी मौत के लिए रसूलपुर के ग्राम प्रधान जुबेर खान, देवरिया के ग्राम प्रधान पति हरदेव सिंह उर्फ पप्पू और उसके बेटे को जिम्मेदार ठहराया है। इसके साथ ही सुसाइड नोट में आत्महत्या के लिए भारतीय किसान यूनियन (लोकतांत्रिक) के लखीमपुर अध्यक्ष प्रदीप शुक्ला उर्फ श्यामू शुक्ला को मुख्य आरोपी बताया है।

टनाक्रम के मुताबिक आज 5 सितंबर को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर स्थित विकासखंड गोला में तैनात ग्राम शिव सागर से ताल्लुक रखने वाले 28 वर्षीय दलित​ ग्राम विकास अधिकारी त्रिवेंद्र कुमार रैदास ने किसान पंचायत में ग्राम प्रधानों द्वारा बुरी तरह बेइज्जत किये जाने के बाद आत्महत्या कर ली।

रक्षण से नौकरी पाने का ताना और दुर्व्यवहार ने एक दलित जाति से ताल्लुक रखने वाले ग्राम विकास अधिकारी की जान ले ली। लखीमपुर खीरी के विकासखंड गोला के ब्लाक कुम्भी में तैनात कोमल प्रसाद के पुत्र त्रिवेंद्र कुमार की पिछले वर्ष ग्राम विकास अधिकारी के पद पर नियुक्ति हुई थी। कोमल प्रसाद खुद लखीमपुर के राजकीय पद्धति आश्रम विद्यालय में 33 साल शिक्षक और प्रिंसिपल रह चुके हैं।

त्रिवेंद्र के पिता कोमल प्रसाद कहते हैं, मेरे बेटे का इस कदर उत्पीड़न किया गया कि उसने जिंदगी के बजाय मौत को चुना। उसकी दो महीने बाद शादी होने वाली थी। वो यह कहते—कहते रो पड़ते हैं कि हम उसकी बारात की तैयारियां कर रहे थे और अब इन कंधों को उसकी लाश उठानी पड़ेगी।

नियुक्ति के बाद त्रिवेंद्र कुमार को विकासखंड गोला की ग्राम पंचायत रसूलपुर और देवरिया में तैनाती मिली। इन गांवों के दबंग प्रधानों ने पहले उन्हें परेशान किया, उसके बाद उस इलाके में सक्रिय किसान यूनियन के नेताओं ने भी उनके साथ जातिसूचक अभद्रता की।

लित ग्राम विकास अधिकारी द्वारा उत्पीड़न से तंग आकर आत्महत्या किये जाने के मामले में समाजवादी पार्टी के नेता क्रांति कुमार सिंह का कहना है कि भारतीय किसान यूनियन (लोकतांत्रिक) ने इस पूरे इलाके में किसानों को बदनाम करके रखा हुआ है। इस यूनियन ने ग्राम विकास अधिकारी त्रिवेंद्र को 28 अगस्त को हुई एक सभा में न खड़ा करके बुरी तरह जलील किया, बल्कि वे उन्हें पिछले लंबे समय से रसूलपुर और देवरिया के ग्राम प्रधान के साथ मिलकर परेशान कर रहे थे।

पीड़ित अधिकारी ने अपने सुसाइड नोट में ग्राम रसूलपुर के प्रधान व देवरिया प्रधान का बेटे पप्पू तथा किसान युनियन के अध्यक्ष की जातिसूचक गालियों से तंग आकर आत्महत्या का कारण बताया है। त्रिवेंद्र ने अपने सुसाइड नोट में लिखा है कि 'मेरे 8 माह के सेवाकाल में एक भी दिन इन लोगों ने मुझे सुकून से काटने नहीं दिया। मेरी मौत के जिम्मेदार ग्राम रसूलपुर व ग्राम देवरिया के प्रधान व किसान यूनियन के अध्यक्ष प्रदीप शुक्ला उर्फ श्यामू शुक्ला हैं।'

गौरतलब है कि त्रिवेंद्र का विवाह 28 नवम्बर को आजमगढ़ के एक पीसीएस अधिकारी की बेटी से होना था। अभी तक इस मामले में प्रशासन से किसी की गिरफ्तारी नहीं की है।

सूलपुर का ग्राम प्रधान का पति जुबेर खान और देवरिया का प्रधान हरदेव सिंह उर्फ पप्पू के साथ मिलकर भारतीय किसान यूनियन (लोकतांत्रिक) के प्रदीप शुक्ला उर्फ श्यामू शुक्ला ने उन्हें जातिसूचक गालियां दीं। जनज्वार के पास मौजूद वीडियो में ये लोग त्रिवेंद्र कुमार रैदास को आरक्षण से नौकरी मिलने के नाम पर गालियां दे रहे हैं।

स घटना की खबर सुनकर जिले भर के ग्राम विकास अधिकारी मौके पर पहुंचे। उसके बाद जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक भी ग्राम विकास अधिकारी के छाउच्छ घर पहुंचे, जहां से उनकी लाश को पोस्टमार्टम के लिए ले जाया गया।उधर ग्राम विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत विकास अधिकारी, ग्राम विकास एवं पंचायती राज से जुड़े हुए सभी वर्गों के कर्मचारियों ने विकास खंडों में तालाबंदी करके प्रधान और किसान यूनियन के नेता के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग की है।

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