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मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में दलित दूल्हे को ट्रस्टियों ने नहीं करने दिया मंदिर में प्रवेश, 4 के खिलाफ मामला दर्ज

Janjwar Team
25 Nov 2019 6:24 AM GMT
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में दलित दूल्हे को ट्रस्टियों ने नहीं करने दिया मंदिर में प्रवेश, 4 के खिलाफ मामला दर्ज
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सरकारें करती हैं बराबरी के दावे, मगर खबरें आम हो गयी हैं कि दलित दूल्हे को घोड़ी पर नहीं चढ़ने दिया, अगड़ों ने अपने घर के आगे से बारात नहीं गुजरने दी, दलित के बराबरी में बैठने पर उसकी लिंचिंग कर दी या फिर मंदिरों में उन्हें प्रवेश नहीं करने दिया...

जनज्वार। देश इक्कीसवीं की सदी में जरूर पहुंच गया है, विकास के तमाम दावे और वादे भी रोज-ब-रोज होते हैं, इसमें बराबरी का तो बुलंद नारा लगाया जाता है, मगर हकीकत यह है कि आज भी देश बहुत संकीर्णता, जाति-पाति, धर्म-संप्रदाय में उलझा हुआ है। दलित उत्पीड़न आज भी उतना ही होता है जितना कि पहले होता था, अगर ऐसा न होता तो यह क्यों होता कि एक दलित दूल्हे को मंदिर में प्रवेश ही नहीं करने दिया जाता।

ह कहीं एक जगह की घटना नहीं, बल्कि आये दिन देश के हर कोने से यह खबरें आम हो गयी हैं कि दलित दूल्हे को घोड़ी पर नहीं चढ़ने दिया, अगड़ों ने अपने घर के आगे से बारात नहीं गुजरने दी, दलित के बराबरी में बैठने पर उसकी लिंचिंग कर दी या फिर मंदिरों में उन्हें प्रवेश नहीं करने दिया।

सा ही एक मामला मध्य प्रदेश के बुरहानपुर स्थित बिरोड़ा गांव में सामने आया है, जहां एक दलित दूल्हे को वृहस्पतिवार 21 नवंबर को मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया गया, न सिर्फ प्रवेश करने दिया गया, बल्कि मंदिर पर ताला तक जड़ दिया गया। मध्यप्रदेश के बुरहानपुर के बिरोड़ा गांव में दलित दूल्हे को मंदिर में प्रवेश करने से रोकने वाली घटना पर उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) काशीराम बडोले ने कहा कि, इस मामले में शिकायत हमें मिली है और जो भी दोषी होंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी।'

ब इस मामले में 4 लोगों पर केस दर्ज किया गया है। दलित समाज के दूल्हे को मंदिर पर ताला लगाकर प्रवेश से रोकने के मामले में पुलिस ने मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष, सचिव, उपाध्यक्ष और पुजारी के खिलाफ शिकायत दर्ज की है।

मीडिया से बातचीत करते हुए बडोले ने कहा कि मुझे कलेक्टर के माध्यम से इस मामले की जानकारी मिली थी कि दबंग जाति के लोगों ने दलित परिवार को मंदिर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी और मैंने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दे दिया था कि दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाये।

जिस दलित लड़के संदीप गव्हाले की शादी में दबंग जातियों ने इस तरह की हरकत की वह कहते हैं, '21 नवंबर को बिरोदा गांव में मेरी शादी होनी थी। सामाजिक रीति-रिवाज के मुताबिक दूल्हे को हनुमान मंदिर जाकर दर्शन करने होते हैं, इसलिए मंदिर गया था। मंदिर में दिन के समय कभी भी ताला नहीं लगाया जाता है, मगर गुरुवार 21 नवंबर की सुबह 11.30 बजे ही मंदिर के चैनल गेट पर ताला जड़ दिया गया। मंदिर ट्रस्ट के सचिव नंदलाल महाजन से जब हमन इसकी बाबत पूछा तो कहा कि उनके पास मंदिर की चाबी नहीं है, जबकि मंदिर के पुजारी कड़ू दीवानजी वहां नहीं थे। वह मंदिर पर ताला लगाकर चले गए थे। ट्रस्ट उपाध्यक्ष अशोक महाजन और अध्यक्ष पंडित पाटील को ताला खुलवाने के लिए कहा तो उन्होंने भी बहाना बनाया। दलित होने के कारण मुझे जान-बूझकर मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा था। जब हमने विरोध किया तो चाबी ढूंढने का बहाना किया गया। पुलिस-प्रशासन के घटनास्थल पर पहुंचने के 2 घंटे बाद ताला खोला गया।

व्हाले कहते हैं गांव के दबंग जाति के लोगों ने हमें मंदिर में प्रवेश करने की अनुमति इसलिए नहीं दी, क्योंकि हम दलित हैं। शादी की व्यवस्था के लिए कलेक्टर से पूर्व में अनुमति लेने के बावजूद हमारे साथ यह घटिया हरकत की गयी। दबंग जाति से ताल्लुक रखने वाले मंदिर के ट्रस्टियों के आदेश पर मंदिर के द्वार बंद कर दिए गए थे।

मंदिर में दलित दूल्हे को प्रवेश न करने देने वाले मामले पर लालबाग पुलिस स्टेशन के एसएचओ बिक्रम सिंह बोमनिया कहते हैं, शिकायत मिलने के बाद मामले को शांत करने के लिए हमने घटनास्थल पर एक टीम भेजी। हम परिवार को सुरक्षा प्रदान करेंगे और दोषी पाए जाने वाले बदमाशों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।

लित दूल्हे और उसके परिवार की शिकायत पर इस मामले में लालबाग थाना पुलिस ने मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष पंडित पाटील, उपाध्यक्ष अशोक महाजन, सचिव नंदलाल महाजन और पुजारी कड़ू दीवानजी के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट की धारा 3(1)(जेडए)(सी), 295 और 34 के तहत मामला दर्ज किया।

सोशल मीडिया पर इस घटना की निंदा करते हुए हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता आई जे राय ने लिखा है, जातिवाद और छुआछूत कितना मजबूत है, आप इसी बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि दलित (चमार) दूल्हे को मंदिर परिसर में ताला लगा के जाने से किस प्रकार रोका जाता है। आजादी के 72 साल होने के बाद आज भी लोगों की मानसिकता में परिवर्तन नहीं हुआ है। छुआछूत जातिवाद पक्षपात ख़त्म होने के जगह उभरता जा रहा है। दलित दूल्हे को मंदिर के परिसर में घुसने नहीं दिया, जबकि इन्होंने मामला कलेक्टर महोदय के संज्ञान में दिया था और इजाजत ​ली थी, परंतु उनके हौसले इतने बुलंद है कि वह जिले के न्यायाधीश के कहने को भी टाल रहे हैं। ऐसी गंदी मानसिकता रखने वालों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होना चाहिए, ताकि भविष्य में दोबारा ऐसी कोई घटना ना घटे।'

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