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राजनाथ सिंह और मनोज तिवारी उस दिन कहां थे जब भाजपाई नेता के बेटे ने हरियाणा में आइएएस की बेटी को लिया था घेर

Janjwar Team
20 Feb 2018 6:34 PM GMT
राजनाथ सिंह और मनोज तिवारी उस दिन कहां थे जब भाजपाई नेता के बेटे ने हरियाणा में आइएएस की बेटी को लिया था घेर
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खबर है कि राजनाथ सिंह आइएएस अंशु प्रकाश के साथ हुई बहसबाजी से आहत हैं और दिल्ली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष तो इस घटना इतने हताहत हैं कि उन्होंने इसे शहरी नक्सलवाद ही कह डाला

जनज्वार, दिल्ली। कल दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल के बुलावे पर उनके आवास पर मिलने गए दिल्ली के मुख्य सचिव के साथ जो बहसबाजी और एक—दूसरे को देख लेने की जो मुख्यमंत्री और सचिव के बीच वाकया हुआ, उसे कत्तई ठीक नहीं कहा जा सकता। न ही उसे सही ठहराया जा सकता है जैसी गुंडई आज दिल्ली सचिवालय में अधिकारियों ने की।

दोनों ही स्थितियां निंदनीय हैं। इससे लोकतांत्रिक स्थितियां कमजोर होती हैं।

लेकिन इस पर वह लोग राजनीतिक रोटियां सेंकने लगे जो अपने हरियाणा अध्यक्ष सुभाष बराला के बेटे द्वारा सरेआम एक आइएएस की बेटी के साथ चंडीगढ़ में हुई ज्यादती पर हफ्तों चुप्पी साधे रहे। अभी देश भुला नहीं कि रात के अंधेरे में हरियाणा भाजपा अध्यक्ष के विकास बराला बेटे ने गाड़ी रोककर आइएएस अधिकारी की बेटी वर्णिका कुंडू के साथ क्या करने की कोशिश की थी।

न ही उसके बाद गाल बजाने वाले भाजपाइयों को देश भूला है जो अपने अध्यक्ष के लंपट बेटे विकास बराला के बचाव में उतर आए थे और वर्णिका कुंडू का ही चरित्र हनन शुरू कर दिया था। वह तो सोशल मीडिया और आइएएस लॉबी का दवाब था कि घटना के कई दिनों बाद किसी तरह मुकदमा दर्ज हुआ था। फिलहाल इस मामले में विकास बराला और उसके साथी को जमानत मिल चुकी है जिन्हें अपहरण की कोशिश के अपराध में 9 अगस्त को पिछले वर्ष गिरफ्तार किया गया था।

यह भी पढ़ें : दिल्ली सचिवालय में अधिकारियों का विद्रोह, आप नेता आशीष खेतान, विधायक इमरान हुसैन को पीटा, तीसरी मंजिल को लिया कब्जे में

लेकिन इधर दिल्ली में हुई घटना का पता चलते है पहला ट्वीट देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह का आया कि वह इस घटना से बहुत आहत हैं और उनके अनुसार देश के नौकरशाहों के काम में कोई दखलंदाजी नहीं होनी चाहिए। यह बात उस पार्टी के गृहमंत्री कह रहे हैं जिनकी पार्टी के कार्यकर्ता डेलीबेसिस पर पुलिस अधिकारियों की पिटाई कर रहे हैं।

रही बात आइएएस के साथ बदतमीजी की तो आइएएस और दिल्ली में उनकी मजबूत लॉबी ने दिल्ली सचिवालय में वह सबकुछ किया जिसको गुंडागर्दी कहते हैं। या बदला लेने जो तरीका गुंडे अपनाते हैं।

आइएएस अधिकारियों समेत दिल्ली सरकार में काम करने वाले अधिकारियों ने न सिर्फ आप नेता आशीष खेतान और विधायक इमरान हुसैन को पीटा, बल्कि इमरान के पीए की पीटकर बुरी गति कर दी।

ऐसे में सवाल है कि भाजपा का इस तमाशे में क्या रोल था? क्या देश के गृहमंत्री का बयान जाहिर नहीं करता कि भाजपा पहले से ही इस ताक में थी। फिर आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह के इस बयान में क्या गलत है कि हर तरह से दिल्ली सरकार को कमजोर करने की कोशिश में लगी भाजपा जब कुछ नहीं बिगाड़ पाई तो अब आइएएस लॉबी के जरिए वह सरकार को कमजोर करने में लगी है।

अगर दिल्ली के भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी को शहरी नक्सलवाद देखना ही था तो उन्हें सचिवालय में चली अधिकारियों की गुंडागर्दी को देखना चाहिए था, जहां महिलाएं घंटों सकपकाई पड़ी रहीं। अधिकारियों ने हर उस आदमी को मारा जो वहां काम कराने आए थे।

सवाल यह भी है कि एक आइएएस की बेटी के अपहरण और बलात्कार के अंदेश की स्थिति में किस आइएएस के संगठन ने हड़ताल की थी जो आज कर दिया है। आज ऐसा कौन सा अपराध हुआ जिसके कारण आइएएस ने दिल्ली सरकार का कामकाज ठप्प कर दिया है। देश के सभी हड़तालों के खिलाफ रहने वाला मीडिया आखिर किसकी शह पर आइएएस की हड़ताल को महान बता रहा है।

इन सभी सवालों का जवाब सिर्फ भाजपा में ही छिपा है, कहीं और नहीं।

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