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चुनावी पड़ताल 2019

तेजबहादुर समेत पूर्वांचल में बड़ी संख्या में पर्चे खारिज, प्रत्याशियों ने लगाए चुनाव आयोग से भाजपा की मिलीभगत के आरोप

Prema Negi
1 May 2019 6:49 AM GMT
तेजबहादुर समेत पूर्वांचल में बड़ी संख्या में पर्चे खारिज, प्रत्याशियों ने लगाए चुनाव आयोग से भाजपा की मिलीभगत के आरोप

वाराणसी संसदीय क्षेत्र से प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरे फौजी तेजबहादुर यादव का भी नामांकन चुनाव आयोग ने किया खारिज, तेजबहादुर यादव बोले वो इसके ख़िलाफ़ जाएंगे सुप्रीम कोर्ट क्योंकि उनका नामांकन ग़लत तरीक़े से किया गया है रद्द

चुनाव आयोग विपक्ष पर गलत ढंग से जबरदस्ती लागू कर रहा है अधिसूचना और सत्ता पक्ष पर है मेहरबान, प्रत्याशियों का आरोप कि सत्ता पक्ष के वोट बढ़ाने के लिए चुनाव आयोग चल रहा है यह चाल

देवरिया से अरविंद गिरि की रिपोर्ट

जनज्वार। चुनाव आयोग द्वारा पूर्वांचल के गोरखपुर संसदीय सीट पर सुनील सिंह समेत विभिन्न लोगों का पर्चा जबरदस्ती निरस्त कर दिया गया है और उसके पूर्व 30 अप्रैल को नामांकन के अंतिम दिन 12 प्रत्याशियों को मुख्य गेट से ही वापस भेज दिया गया। यही स्थिति संतकबीरनगर में भी हुई, जहां 27 में से 20 पर्चे जिला निर्वाचन अधिकारी ने खुद निरस्त कर दिये।

इसी कड़ी में अब चुनाव आयोग ने वाराणसी संसदीय क्षेत्र से प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरे फौजी तेजबहादुर यादव का भी नामांकन खारिज कर दिया है। बीएसएफ के बर्खास्त फौजी तेजबहादुर ने कहा है कि वो इसके ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे, क्योंकि शासन—प्रशासन के इशारे पर उनका नामांकन गलत तरीके से रद्द करवाया गया है। उन्होंने कहा, मुझसे कल 30 अप्रैल को चुनाव आयोग द्वारा 6.15 बजे तक सबूत सौंपने को कहा गया था, हमने सबूत सौंप दिया था। मगर फिर भी मेरा नामांकन रद्द किया गया।

संसदीय सीट से 29 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे, जिनमें से 18 के पर्चे निरस्त किए गये। गौरतलब है कि नामांकन के भाग 6 के प्रारूप में स्पष्ट उल्लेख है कि आपके नामांकन पत्र की जांच आपके समक्ष होगी। यहां ईवीएम में प्रत्याशी को कंट्रोल करने के लिए एक सिरे से 18 पर्चे जिला निर्वाचन अधिकारी ने निरस्त किए। इनमें सीपीआई (एमएल) रेड सरकार के प्रत्याशी डॉ. चतुरानन ओझा का भी पर्चा निरस्त किया गया।

जब प्रत्याशियों ने पर्चा निरस्त करने का कारण पूछा तो जिला निर्वाचन अधिकारी के पास कोई ठोस ज़बाब नहीं था। पर्चा निरस्त होने के बाद मायूस प्रत्याशियों ने चुनाव आयोग पर खुलेआम भाजपा का प्रवक्ता बनने का आरोप लगाया और कहा कि वे चुनाव आयोग के खिलाफ न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।

प्रत्याशी खुलेआम कह रहे हैं कि चुनाव आयोग अपने निर्वाचन अधिकारी के माध्यम से ईवीएम में प्रत्याशी को सेट करने के लिए नामांकन से लेकर मतगणना स्थल तक सत्ता पक्ष के इशारे पर काम कर रहा है। इससे लोकतंत्र और संविधान में प्रदत्त मानवीय अधिकारों का हनन पूरे चरम पर है।

इसी तरह उत्तर प्रदेश की गोरखपुर संसदीय सीट जोकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गृहक्षेत्र है, वहां भी लोकतंत्र की खुलेआम धज्जियां उड़ रही हैं। गोरखपुर जिला प्रशासन की गुंडई के चलते हिन्दुस्थान निर्माण दल से चुनाव लड़ रहे मुख्यमंत्री के बागी शिष्य सुनील सिंह जोकि हिंदू युवा वाहिनी के 15 साल प्रदेश अध्यक्ष रहे, समेत 24 अन्य का पर्चा खारिज किया गया। सुनील सिंह का पर्चा यह कहकर खारिज कर दिया गया कि शपथ पत्र पर दस्तखत नहीं थे, जबकि चुनाव आयोग के वेबसाइट पर उनके दस्तखत देखे जा सकते हैं।

जानकारी के मुताबिक सुनील सिंह का पर्चा जिलाधिकारी ने सरकार के इशारे पर निरस्त किया। इसी तरह बांसगांव सुरक्षित संसदीय सीट से कांग्रेस प्रत्याशी कुश सौरभ राव समेत सात प्रत्याशियों का नामांकन खारिज कर दिया गया।

सुनील सिंह का आरोप है कि मुख्यमंत्री योगी के इशारे पर जिला निर्वाचन अधिकारी ने मेरा नामांकन खारिज किया है। मेरा नामांकन खारिज करने के लिए नामांकन पत्र के दस्तावेज बदले गए। सुनील सिंह ने इसके खिलाफ कैंट थाना जाकर जिला निर्वाचन अधिकारी के खिलाफ तहरीर भी दी है।

गोरखपुर के वरिष्ठ पत्रकार मनोज सिंह कहते हैं, 'अगर हिंदू युवा वाहिनी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और योगी के बेहद करीबी रहे चर्चित नेता सुनील सिंह खड़े हो जाते तो साफ है कि गोरखपुर भाजपा प्रत्याशी रवि किशन का जीतना तकरीबन असंभव हो जाता। सुनील सिंह के नामांकन का जलवा रवि किशन से कहीं ज्यादा था। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी समझ गए कि अगर सुनील सिंह मैदान में रहेंगे तो इज्जत पर बन आएगी। सुनील सिंह के पर्चा निरस्तगी से स्पष्ट है कि भाजपा ने चुनाव आयोग के जरिए अपने रास्ते का कांटा निकाला है।'

इस बात में दम इसलिए भी लगता है क्योंकि जिस आरोप में सुनील सिंह का पर्चा खारिज किया गया है, वह निराधार है। चुनाव आयोग ने पर्चा खारिज करते हुए कहा कि हलफनामें उनके दस्तखत नहीं हैं, जबकि जनज्वार पर लगे हलफनामे आप उनका हस्ताक्षर साफ-साफ देख सकते हैं।

देवरिया लोकसभा से वामपंथी ​पार्टी सीपीआईएमएल रेड स्टार से खड़े हुए शिक्षक नेता और देवरिया क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता चतुरानन ओझा का आरोप है कि उन्हें बताया ही नहीं गया कि उनका पर्चा किस कमी से खारिज हुआ है। चतुरानन ओझा ने जनज्वार से बातचीत में कहा, 'मुझे न बताया गया और न ही गलती सुधार का कोई वक्त दिया गया। बस मेरा पर्चा खारिज करने की सूचना दी गयी! मैं मानता हूं कि ऐसा रि​टर्निंग आफिसर ने किसी दबाव में किया है। मुझे संदेह है कि ऐसा सत्ताधारी पार्टी के लाभ के लिए किया जा रहा है, क्योंकि इतनी बड़ी संख्या में बिना कारण बताए पर्चा खारिज करने का क्या औचित्य है।'

वहीं बनारस से रामराज्य परिषद के प्रत्याशी भगवान ब्रह्मचारी का पर्चा खारिज करने के विरोध में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद 30 अप्रैल को शाम अपने सहयोगियों के साथ कचहरी परिसर में धरना पर बैठे हैं। यह तस्वीर रात्रि 8.30 बजे की है। रात्रि में भी धरना जारी रखने का उन्होंने ऐलान किया है।

मीडिया से मुखातिब सुनील सिंह

गोरखपुर न्यूज लाइन में प्रकाशित मनोज सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक बलिया में 35 में से 16, चंदौली में 42 में से 19, गाजीपुर में 31 में 7, गोरखपुर में 45 में से 30, कुशीनगर में 28 में से 2, रार्बट्सगंज में 24 में से 12, सलेमपुर में 38 में से 12 नामांकन निरस्त कर दिए गए हैं। इस तरह 13 सीटों पर करीब 40 फीसदी नामांकन खारिज कर दिए गए हैं जो एक बड़ी संख्या है। अभी दो और सीटों पर नामांकन पत्रों के खारिज होने के विवरण इसमें जोड़े जाने हैं। जाहिर है कि यह संख्या और बढ़ेगी।

बनारस से प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ गठबंधन के प्रत्याशी नामांकन रद्द किए जाने के खिलाफ फौजी तेजबहादुर अपने समर्थकों व वकीलों के साथ कचहरी में नामांकन स्थल के पास डटे हैं। उन्होंने दो पर्चे भरे थे और दोनों में एक ही आपत्ति लगाकर चुनाव अधिकारी ने पर्चा निरस्त करने की टिप्पणी की है।

तेज बहादुर को आज बुधवार को 11 बजे तक चुनाव आयोग ने अपना पक्ष रखने का समय दिया गया है। उल्लेखनीय है कि तेज बहादुर को सपा-बसपा गठबंधन ने अपना प्रत्याशी बनाया है। उन्हें सपा ने अपना सिम्बल दिया है। सैनिकों की असल हालात सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के बाद तेज बहादुर को बीएसएफ से बर्खास्त कर दिया गया है। बनारस से तेजबहादुर का पर्चा निरस्त होने से माहौल बहुत गरम है, इसलिए सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था की गई है। जानकारी के मुताबिक यहां से 50 से अधिक प्रत्याशियों का नामांकन निरस्त किया गया है।

फौजी तेजबहादुर यादव का नामांकन रद्द किए जाने का विरोध करते उनके समर्थक

उल्लेखनीय है कि बनारस संसदीय क्षेत्र से कुल 102 प्रत्याशियों ने अलग-अलग सेट में 199 नामांकन पत्र दाखिल किए थे। अंतिम दिन 29 अप्रैल को 71 नामांकन दाखिल किये गए, जबकि मंगलवार 30 अप्रैल को नामांकन पत्रों की जांच हुई, जिसमें 50 से अधिक नामांकन निरस्त किए जाने की खबर है। 2 मई को नाम वापसी के बाद तय होगा कि बनारस में कितने उम्मीदवार होंगे।

नामांकन की अंतिम तारीख 29 अप्रैल को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ काशी में थे। देर रात उन्होंने काशी क्षेत्र के 14 लोकसभा क्षेत्रों के जिलाध्यक्षों, लोकसभा चुनाव संयोजकों, चुनाव प्रभारी व प्रदेश के पदाधिकारियों के साथ बैठक की। यह बैठक सोनारपुरा स्थित एक होटल में आयोजित की गई थी।

बैठक में अमित शाह ने पार्टी कार्यकर्ताओं को चुनाव जीतने का मंत्र दिया। पार्टी अध्यक्ष ने कहा कि बूथ जीत लेंगे तो रण जीत लेंगे। अमित शाह और योगी की बनारस में उपस्थिति को लेकर भी राजनीतिक हल्के में विभिन्न प्रकार की चर्चाएं व्याप्त हैं। पदाधिकारियों से उन्होंने प्रत्याशियों के पक्ष में चुनाव माहौल पर फीडबैक भी लिया और रात में भी वो लोग वहीं रुके।

सुनील सिंह कल 2 मई की सुबह नौ बजे अपनी शिकायत लेकर गोरखपुर संसदीय क्षेत्र के पर्यवेक्षक से मिलेंगे। उन्होंने कहा कि जिला निर्वाचन अधिकारी ने उनके नामांकन खारिज करने का कारण हलफनामे पर दस्तखत न होना बताया, जबकि निर्वाचन आयोग की बेबसाइट पर शपथपत्र सही दिख रहा है।

चुनाव आयोग द्वारा नामांकन ख़ारिज होने के बाद सुनील सिंह ने दी जिला निर्वाचन अधिकारी के खिलाफ तहरीर

गौरतलब है कि गोरखपुर में 35 प्रत्याशियों ने पर्चा दाखिल किया था, जिसमें से चौबीस प्रत्याशियों के पर्चे खारिज कर दिये गए हैं। योगी आदित्यनाथ के बागी शिष्य कहे जाने वाले सुनील सिंह ने सभा और जुलूस के जरिए शक्ति प्रदर्शन कर खुली चुनौती दी है।

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