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20 लाख में जमीन बेचकर कुछ कमाने ऑस्ट्रेलिया गया किसान का बेटा, लॉकडाउन में फंसा

Nirmal kant
2 May 2020 2:30 AM GMT
20 लाख में जमीन बेचकर कुछ कमाने ऑस्ट्रेलिया गया किसान का बेटा, लॉकडाउन में  फंसा
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हरियाणा से कम से कम हजार बेरोजगार युवक आस्ट्रेलिया, अमेरिका और इंग्लैंड में स्टडी वीजा पर गये थे। इसके लिये उन्होंने भारी खर्च वहन करने के लिए किसी ने जमीन बेच दी किसी ने कीमती सामान गिरवी रखा।लेकिन अब लॉकडाउन में फंस गये हैं....

जनज्वार ब्यूरो, चंडीगढ़। जींद जिले का निवासी सतेंद्र कुमार अपनी एक एकड़ जमीन 20 लाख रुपये में बेच कर स्टडी वीजा पर ऑस्ट्रेलिया इस उम्मीद में गया था कि वहां जाकर वह डालर कमा घर की गरीबी दूर करेगा। वहां जाने के तीन माह माह बाद ही कोरोना की वजह से लॉकडाउन में वह फंस गया है।

तेंद्र के पास जो पैसे थे वह दलाल और फीस में चले गये। अब उसके पास पैसे खत्म हो गये हैं। यहां भी उसके परिवार की स्थिति ऐसी नहीं कि उसे वहां आर्थिक मदद पहुंचायी जा सके। ऐसे दस हजार से ज्यादा युवा स्टडी वीजा पर इसलिये विदेशों में गये कि वहां काम कर अच्छी खासी कमायी कर लेंगे। लेकिन उनके साथ हो उल्टा गया है। अब उनके परिवार के सामने समस्या यह है कि उन्हें वापस कैसे लाया जाये?

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पंजाब के बाद हरियाणा के युवाओं में भी विदेश जाकर रोजगार करने का क्रेज काफी बढ़ गया है। इसके लिए वह स्टडी वीजा पर विदेश जाते हैं। इस तरह के वीजा भेजने वाले युवाओं से खूब पैसा ऐंठते है। सब कुछ जानते हुए भी युवाओं को लगता है कि यहां यदि थोड़ा खर्च कर वह बस एक बार विदेश चले जाए, इसके बाद तो डालरों की बरसात कर देंगे। उनकी इसी तरह से सोच उन्हें विदेश जाने के लिये हर जोखिम उठाने को प्रेरित कर ही है।

में इसी तरह से युवाओं को अब भारी दिक्कत आ रही है। एनआरआई अमित कुमार जो कि इन दिनों ऑस्ट्रेलिया में रह रहा है, उन्होंने बताया कि ऐसे युवाओं का यहां बुरा हाल है। पहले कुछ दिन तो उन्हें काम मिला। उनका गुजारा ठीक चल रहा था। लेकिन अब कोरोना संकट की वजह से उनका सारा सिस्टम बिगड़ गया है। काम ठप हो गया है। अब उन्हें न सिर्फ हॉस्टल या कमरे का किराये का प्रबंध करना मुश्किल हो रहा है, बल्कि खाने का सामान भी तेजी से खत्म हो रहा है।

अंबाला के गांव माजरा के निवासी सतबीर सिंह ने बताया कि उनका बेटा स्टडी वीजा पर कैनेडा गया था। उसे अंबाला में चल रहे एक स्टडी सेंटर के माध्यम से भेजा गया था। उसे बताया गया था कि वहां जाकर काम भी मिल जायेगा। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। अब न उसका बेटा वापस आ पा रहा है न वह उसका वहां का खर्च उठा पा रहे हैं। इन्होंने बताया कि अब क्या करें।

स्ट्रेलिया में रह रहे अमित कुमार ने बताया कि यहां जिनके पास नागरिकता हैं, उन्हें सरकारी मदद मिल रही है। लेकिन स्टूडेंट वीजा पर आये युवाअों को अभी तक कोई मदद नहीं मिली है। इधर क्योंकि अब लॉकडाउन है। इसलिए खर्च बढ़ रहा है। यहां मकान का किराया ही इतना ज्यादा है कि रुपयों में इसे चुकाना काफी आर्थिक दिक्कत वाला काम है।

बताया कि यह भी नहीं पता कि लॉकडाउन चलेगा कितने समय तक। इसके बाद भी ऐसे युवाओं को काम मिलेगा या नहीं इस बात की भी गारंटी नहीं है। अब जो युवा वास्तव में यहां पढ़ने के लिए आये, वह तो किसी तरह से इस खर्च को वहन कर भी लेंगे। जो सिर्फ स्टडी वीजा पर आये ही कमाने के लिए थे, उनके लिए हालात मुश्किल वाले हैं।

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मित ने यह भी बताया कि यहां से बड़ी संख्या में भारतीय अब वापस आना चाह रहे हैं। इसके लिए वह लगातार विदेश मंत्रालय को ट्वीट भी कर रहे हैं। लेकिन अभी तक कोई रिस्पांस नहीं मिला है। ऐेसे अनेक लोग है, जो इस स्थिति में डरे हुये हैं। अब किसी भी तरह से वापस आना चाह रहे हैं। उनके सामने समस्या यह है कि आये कैसे?

धर केंद्र सरकार ने हरियाणा से ऐसे लोगों को डाटा मंगाने का काम तो शुरू कर दिया है, जो विदेश में फंसे हुये हैं। अभी डाटा जुटाने का काम ही चल रहा है। इस पर आगे क्या कदम उठाये जायेंगे इस बारे में अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं हो रहा है।

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