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राजनीति

मनोहर पर्रिकर के नाम से बीमारी वाला इमोशनल पत्र निकला फर्जी

Janjwar Team
26 March 2018 9:52 AM GMT
मनोहर पर्रिकर के नाम से बीमारी वाला इमोशनल पत्र निकला फर्जी
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गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के आॅफिस ने कहा पश्चाताप और आत्मनिरीक्षण वाला ऐसा कोई पत्र नहीं लिखा है मुख्यमंत्री ने, उनको कैंसर की पुष्टि होने के बाद शरारती तत्वों ने कराया है इसे सोशल मीडिया पर वायरल

पश्चाताप वाला एक ऐसा ही फर्जी पत्र 2011 में तब भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था जब एप्पल के सह संस्थापक स्टीव जॉब्स का हुआ था निधन, उनके नाम से भी पश्चाताप वाला फेक लेटर खूब हुआ था सोशल मीडिया पर वायरल

जनज्वार। गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर इन दिनों बीमार हैं। इसी को देखकर उनके नाम से सोशल मीडिया पर एक पत्र तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि यह मैसेज मनोहर पर्रिकर ने सीधे अस्पताल के बिस्तर से लिखा है। इस मैसेज के साथ उनकी सेहत को लेकर कुछ दावे भी किए गए हैं, जिसके बाद गोवा मुख्यमंत्री कार्यालय ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर इस पत्र का खंडन करते हुए कहा है कि पर्रिकर के नाम से जो पत्र वायरल हो रहा है वह पूरी तरह झूठा है।

कल 25 मार्च को सीएम ऑफिस ने वायरल हो रहे पत्र के बारे में एक बयान जारी कर कहा, सोशल मीडिया पर सीएम पर्रिकर के नाम से लिखे गए फर्जी पत्र को लेकर काफी सारे मैसेज छाए हुए हैं। कहा जा रहा है कि पश्चाताप और आत्मनिरीक्षण पत्र मनोहर पर्रिकर ने लिखा है, जबकि यह पूरी तरफ झूठ और किसी की शरारत है। मनोहर पर्रिकर सिर्फ उनके वेरिफाईड सोशल मीडिया हैंडल के जरिए ही कोई पत्र या संदेश जारी करेंगे, जबकि उनके प्रामाणिक सोशल मीडिया एकाउंट से इस तरह का कोई पत्र जारी नहीं किया गया है। सोशल मीडिया पर अपने फेक पत्र के बारे में सीएम मनोहर पर्रिकर ने भी कहा है कि मेरे बारे में किसी भी तरह के हृयूमर पर कृपया विश्वास न करें, यह शरारती तत्वों द्वारा चली गई चाल है।

आइए पढ़ते हैं सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वो फेक लेटर, जिसे पढ़कर लोग पर्रिकर के जल्द स्वास्थ्य लाभ की रहे हैं दुआएं

"मैंने राजनीतिक क्षेत्र में सफलता के अनेक शिखरों को छुआ... दूसरों के नजरिए में मेरा जीवन और यश एक दूसरे के पर्याय बन चुके हैं... फिर भी मेरे काम के अतिरिक्त अगर किसी आनंद की बात हो तो शायद ही मुझे कभी प्राप्त हुआ, आखिर क्यों?

तो जिस political status जिसमें मैं आदतन रम रहा था, आदी हो गया था वही मेरे जीवन की हकीकत बन कर रह गई...

इस समय जब मैं बीमारी के कारण बिस्तर पर सिमटा हुआ हूं, मेरा अतीत स्मृतिपटल पर तैर रहा है, जिस ख्याति, प्रसिद्धि और धन संपत्ति को मैंने सर्वस्व माना और उसी के व्यर्थ अहंकार में पलता रहा। आज जब खुद को मौत के दरवाजे पर खड़ा देख रहा हूँ तो वो सब धूमिल होता दिखाई दे रहा है साथ ही उसकी निर्थकता बड़ी शिद्दत से महसूस कर रहा हूं...

आज जब मृत्यु पल पल मेरे निकट आ रही है, मेरे आस पास चारों तरफ हरे प्रकाश से टिमटिमाते जीवन ज्योति बढ़ाने वाले अनेक मेडिकल उपकरण देख रहा हूँ। उन यंत्रों से निकलती ध्वनियां भी सुन रहा हूं, इसके साथ साथ अपने आगोश में लपेटने के लिए निकट आ रही मृत्यु की पदचाप भी सुनाई दे रही है।

अब ध्यान में आ रहा है कि भविष्य के लिए आवश्यक पूंजी जमा होने के पश्चात दौलत संपत्ति से जो अधिक महत्वपूर्ण है, वो करना चाहिए। वो शायद रिश्ते नाते संभालना सहेजना या समाज सेवा करना हो सकता है।

निरंतर केवल राजनीति के पीछे भागते रहने से व्यक्ति अंदर से सिर्फ और सिर्फ पिसता... खोखला बनता जाता है... बिल्कुल मेरी तरह।

उम्रभर मैंने जो संपत्ति और राजनीतिक मान सम्मान कमाया वो मैं कदापि साथ नहीं ले जा सकूंगा... दुनिया का सबसे महंगा बिछौना कौन सा है, पता है? "बीमारी का बिछौना" गाड़ी चलाने के लिए ड्राइवर रख सकते हैं, पैसे कमा कर देने वाले मैनेजर मिनिस्टर रखे जा सकते हैं, परंतु अपनी बीमारी को सहने के लिए हम दूसरे किसी अन्य को कभी नियुक्त नहीं कर सकते हैं।

खोई हुई वस्तु मिल सकती है, मगर एक ही चीज ऐसी है जो एक बार हाथ से छूटने के बाद किसी भी उपाय से वापस नहीं मिल सकती है। वो है, अपना "आयुष्य", "काल" "समय"

ऑपरेशन टेबल पर लेटे व्यक्ति को एक बात जरूर ध्यान में आती है कि उससे केवल एक ही पुस्तक पढ़नी शेष रह गई थी और वो पुस्तक है "निरोगी जीवन जीने की पुस्तक"

फिलहाल आप जीवन की किसी भी स्थिति- उमर के दौर से गुजर रहे हों तो भी एक न एक दिन काल एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर देता है कि सामने नाटक का अंतिम भाग स्पष्ट दिखने लगता है। स्वयं की उपेक्षा मत कीजिए, स्वयं ही स्वयं का आदर कीजिए, दूसरों के साथ भी प्रेमपूर्ण बर्ताव कीजिए।

लोग मनुष्यों को इस्तेमाल (use) करना सीखते हैं और पैसा संभालना सीखते हैं। वास्तव में पैसा इस्तेमाल करना सीखना चाहिए व मनुष्यों को संभालना सीखना चाहिए। अपने जीवन की शुरुआत हमारे रोने से होती है और जीवन का समापन दूसरों के रोने से होता है। इन दोनों के बीच में जीवन का जो भाग है वह भरपूर हंस कर बिताएं और उसके लिए सदैव आनंदित रहिए व औरों को भी आनंदित रखिए।"

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