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दिल्ली

औरत अगर आंदोलनकारी है तो उसे सत्ता के साथ मर्दों की कुंठा से भी पड़ता है लड़ना

Nirmal kant
6 May 2020 10:14 AM GMT
औरत अगर आंदोलनकारी है तो उसे सत्ता के साथ मर्दों की कुंठा से भी पड़ता है लड़ना
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जेल में बंद महिला आंदोलनकारी सफूरा जरगर सफूरा गर्भवती हैं और उनके गर्भावस्था की दूसरी तिमाही चल रही है। उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर कुछ यूजर अभद्र टिप्पणियों का इस्तेमाल कर रहे हैं...

नई दिल्ली। दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी की 27 वर्षीय पी.एचडी शोध की छात्रा और आंदोलनकारी सफूरा जरगर को पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के लिए उनकी कथित भूमिका के चलते यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम) के तहत जेल में करीब तीन सप्ताह हो चुके हैं। सफूरा गर्भवती हैं और उनके गर्भावस्था की दूसरी तिमाही चल रही है। इस बीच सफूरा जरगर के नाम से बीते 72 घंटों से भी ज्यादा समय से ट्विटर पर सत्ता समर्थकों और सफूरा जरगर के समर्थक ट्रेंड चला रहे हैं।

मतौर पर इस तरह की अभद्र टिप्पणियों को खबरों में लिखने से बचा जाता है लेकिन इस समय यह बेहद जरुरी है कि जैसा को तैसा पेश किया जाए ताकि तथ्यों की सच्चाई को समझा जा सके। कई ट्वीटर यूजर सफूरा जरगर के बेहद आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं। उनकी गर्भावस्था और वैवाहिक जीवन की प्रकृति को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं जो उनकी निजी जिंदगी का हिस्सा है। कुछ ट्रोल्स 'सफूरा जरगर हुई बिना पति गर्भवती' ट्रेंड चला रहे हैं।

सुनील शर्मा नाम का एक अन्य ट्वीटर हैंडल सवाल करता है कि सफूरा_जरगर को अपनी बहन बताने वाले यह क्यों नहीं बताते हैं, कि उनका बहनोई कौन है? क्योंकि सवाल बहन के होने का नहीं बल्कि सफूरा जरगर को प्रेग्नेंट कर, अदृश्य बहनोई के ना मिल पाने का था? सफुरा_जरगर_का_पति_कौन_है।

ही नहीं सफूरा जरगर के सहारे अन्य लोगों के लिए भी आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है। एक ट्रोल्स तो वरिष्ठ पत्रकार और सीपीआई नेता कन्हैया कुमार को सफूरा जरगर के साथ जोड़ते हुए आपत्तिजनक शब्दों का इस्ततेमाल करता है।

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हीं कुछ अन्य यूजर्स ने भी सफूरा जरगर के खिलाफ दुष्प्रचार का अभियान छेड़ रखा है। फर्जी तस्वीरों को जारी कर उन्हें सफूरा जरगर की तस्वीर बताया जा रहा है। इस तरह के हजारों ट्वीट माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर पोस्ट किए गए हैं।

हालांकि दूसरी ओर कुछ यूजर्स सफूरा जरगर के समर्थन में भी आए हैं और वे 'सफूरा जरगर मेरी बहन' ट्रेंड चला रहे हैं। ये यूजर्स सफूरा जरगर की शादी की तस्वीरें पोस्ट कर दुष्प्रचार करने वालों को जवाब दे रहे हैं।

बीना अदीब नाम के एक ट्वीटर हैंडल ने लिखा, 'सफ़ूरा ज़रगर तो बस एक बहाना है, इनका निशाना उन सभी औरतों पर है जो इस मुल्क में अपने दम पर आगे बढ़ना चाहती हैं,‌‌ जो अच्छा पढ़ना चाहती हैं, कुछ अच्छा बनना चाहती हैं, आगे बढ़ना हर इंसान का हक़ है इसमें कोई रुकावट नहीं आनी चाहिए इसलिए मैं कहती हूँ, महिलाओं पर गंदे कमेंट करना बंद करो।

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव गुलजेब अहम ने अपने ट्वीट में लिखा, 'मैं ये गर्व से कह सकता हूँ कि 'सफूरा_जरगर_मेरी_बहन_है' और इस वक़्त जब वो संविधान बचाने के लिए लड़ रही है तो उसके लिए ये पंक्तियाँ समर्पित हैं- “औरत हैं मगर सूरत-ए-कोहसार खड़ी हैं, एक सच के तहफ़्फ़ुज़ के लिए सबसे लड़ी हैं!'

ह पहली बार नहीं है जब किसी आंदोलन को दबाने के लिए महिला आंदोलनकारी को इस तरह की अभद्र टिप्पणियों का सामना करना पड़ा हो। हर दौर में ऐसा होता आया है कि आंदोलनकारी अगर औरत है तो उसे सत्ता के साथ मर्दों की कुंठा से भी पड़ता है। देश की आजादी का आंदोलन या सीएए विरोधी आंदोलन, महिलाएं हमेशा आगे रही हैं।

बीते कुछ साल पहले जब सीपीआईएमएल की नेता कविता कृष्णन ने 'फ्री सेक्स' को लेकर टिप्पणी की थी। कविता ने यह टिप्पणी महिला के अधिकारों और सहमति से सेक्स को लेकर की थी लेकिन इसका अर्थ बदलकर मर्दों ने उन पर अभद्र टिप्पणियां करनी शुरु कर दीं थीं।

रअसल फेसबुक के एक पेज‘द स्पॉइल्ट मॉडर्न इंडियन वुमन’पर 28 अप्रैल को कविता कृष्णन ने पोस्ट की थी। जिसमें लिखा था कि किस तरह एक टीवी डिबेट में सुब्रमण्यम स्वामी ने कविता कृष्णन को एक नक्सलवादी कहते हुए एक ‘फ्री सेक्स’ करने वाली औरत कहा था। 'नारीवादी इस पहल का मकसद लिंग आधारित छवि को तोड़ना है।' कविता कृष्‍णन ने अपने फेसबुक पेज पर यह कोट किया और इसके साथ ही 'फ्री सेक्‍स' को लेकर बहस शुरू हो गई थी। इस तरह के कई उदाहरण सामने हैं।

फूरा जरगर के खिलाफ चल रहे दुष्प्रचार के अभियान के खिलाफ कुछ यूजर कार्रवाई की मांग भी कर रहे हैं लेकिन दिल्ली पुलिस की ओर से अभी तक किसी भी प्रकार की कार्रवाई की खबर सामने नहीं आयी है।

रगर को 13 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने दावा कि वो 22-23 फरवरी को दिल्ली के जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के नीचे एक सीए-सीए विरोध और सड़क नाकाबंदी का आयोजन करने वालों लोगों में से एक थीं। गिरफ्तारी के समय वह 13 सप्ताह की गर्भवती थीं।

रगर के वकील रितेश धर दुबे ने हाल में उन्हें जमानत दिए जाने की मागं की थी। उन्होंने दिल्ली की एक अदालत से कहा कि उन्हें झूठे आरोपों में फंसाया गया है और एफआईआर में उनका नाम भी नहीं था। हालांकि कोर्ट ने उनकी अपील खारिज कर दी है। उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि वह तीन माह की गर्भवती हैं और सीआरपीसी की धारा 437 के प्रावधान को देखते हुए उन्हें जमानत पर रिहा किया जा सकता है।

हीं इस पूरे मामले पर दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। स्वाति मालीवाल ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से लिखा, 'सफूरा जरगर गर्भवती है और जेल में है। वह दोषी है या नहीं, इसका फैसला अदालत करेगी। लेकिन जिस तरह से ट्रोलरों ने एक गर्भवती महिला का चरित्र हनन किया वह शर्मनाक है। ट्रोल्स के खिलाफ कार्रवाई करने हेतु दिल्ली पुलिस साइबर सेल को सूचना जारी है।'

मनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया ने भी सफूरा जरगर की रिहाई की मांग की है। अपने ट्वीट में एमनेस्टी इंडिया ने लिखा, 'जामिया की शोध छात्रा सफूरा जरगर की उस समय गिरफ्तारी गई जब वह तीन महीने की गर्भवती थी। भारतत सरकार ने कोविड 19 के दौरान एक गर्भवती महिला को बेरहमी से गिरफ्तार किया और उसे एक भीड़भाड़ वाली जेल में भेज दिया।'

 

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