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यूपी में दो नाबालिग इसलिए मारे गए कि पुलिस ने गाड़ी गंदी होने के चक्कर में नहीं पहुंचाया अस्पताल

Janjwar Team
19 Jan 2018 9:45 PM GMT
यूपी में दो नाबालिग इसलिए मारे गए कि पुलिस ने गाड़ी गंदी होने के चक्कर में नहीं पहुंचाया अस्पताल
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अब योगी प्रशासन कहता है कि दोषी पुलिसवालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, मगर इससे क्या वो दोनों युवा वापस तो नहीं आ पाएंगे। दो मांओं की कोख फिर से तो हरी नहीं हो पाएगी...

सहारनपुर। यूपी के सूबेदार योगी आदित्यनाथ आए दिन बड़े—बड़े मंचों से जनता के हितों के मद्देनजर बड़े—बड़े वादे करते हैं, कहते हैं कि यूपी पुलिस हर पल, हर नागरिक के लिए उपलब्ध है, मगर इस बार पुलिस ने कुछ ऐसा किया जिस पर खुद उन्हें भी शर्मसार हो जाना चाहिए।

हालांकि पुलिसवालों की निर्ममता के किस्से तो आए दिन मीडिया में छाए रहते हैं, फिर एक बार उसका असली चेहरा सामने आया है। पुलिसवालों की संवेदनहीनता के कारण दो नाबालिग लड़कों की मौत हो गई। लड़के सड़क पर जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे थे और पुलिसवाले थे कि जनता से बहस कर रहे थे कि उनकी गाड़ी गंदी हो जाएगी इसलिए वे उन्हें अस्पताल नहीं पहुचाएंगे। साथ ही कह रहे थे कोई आॅटो करके इन्हें अस्पताल पहुंचा दो। पुलिसवालों की संवेदनहीनता बयां करता मौके का किसी ने वीडियो शूट कर लिया जो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है।

उप्र पुलिस का ऐसा घिनौना चेहरा सामने आया कि उन पुलिसवालों को खुद को इंसान भी नहीं कहना चाहिए। खून से लथपथ जख्मी दोनों युवक सड़क पर तड़पते रहे, मगर पुलिसकर्मियों ने उन्हें इसलिए अस्पताल नहीं पहुंचाया कि गाड़ी गंदी न हो जाए। बाद में वहां मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने टेंपो से किशोरों को अस्पताल पहुंचाया, मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थी। मौके पर ज्यादा खून बह जाने के कारण दोनों की मौत हो गई।

हालांकि अब योगी प्रशासन कहता है कि दोषी पुलिसवालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, मगर इससे क्या वो दोनों युवा वापस तो नहीं आ पाएंगे। दो मांओं की कोख फिर से तो हरी नहीं हो पाएगी।

घटनाक्रम के मुताबिक कल 18 जनवरी की रात को सहारनपुर में दो लड़के दुर्घटना के बाद सड़क पर पड़े कराह रहे थे। पुलिस ने 100 नंबर पर कॉल कर पुलिस को बुलाया। पुलिस आई तो मगर असंवेदनशीलता की पराकाष्ठा को पार कर गई।

सहारनपुर शहर कोतवाली के नुमाइश कैंप सेतिया विहार के रहने वाले 16 वर्षीय अर्पित खुराना और 17 वर्षीय सन्नी गुप्ता दसवीं में पढ़ते थे। कल रात को तकरीबन साढ़े ग्यारह बजे दोनों लड़के बाइक से बाहर घूमने निकले, तभी उनकी अनियंत्रित बाइक एक खंभे से टकरा गई। दोनों लड़के पास में मौजूद नाली में गिर गए, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं।

मौके पर मौजूद लोगों ने उन्हें नाली से बाहर निकाला, जबकि पास में ही यूपी पुलिस की 100 नंबर गाड़ी खड़ी थी। जब मौका—ए—वारदात पर खड़े लोगों ने 100 नंबर गाड़ी के पास तैनात पुलिसकर्मियों से घायलों को जल्दी अस्पताल पहुंचाने की गुहार की, तो पुलिसवाले टाल गए। कहा कि उनकी गाड़ी खून से गंदी हो जाएगी।

बावजूद इसके लोगों ने पुलिसवालों ने खूब मिन्नत की, मगर पत्थरदिल पुलिसवालों का सीना नहीं पसीजा। बाद में एक आॅटो में लोग घायल बच्चों को लेकर लगभग 12 बजे अस्पताल पहुंचे, मगर तब तक ज्यादा खून बह जाने के चलते दोनों की मौत हो चुकी थी।

पुलिसकर्मियों की इस करतूत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मचा। डीआइजी सुनील इमैनुअल ने यूपी 100 पर तैनात एएसआइ इंद्रपाल, कांस्टेबल पंकज कुमार, कांस्टेबल चालक मनोज कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया, जबकि मामले की जांच एसपी सिटी को सौंपी गई है।

पुलिस चाहे अब कुछ भी कर ले, मगर जिस असंवेदनशीलता का परिचय यूपी 100 नंबर पुलिस ने दिया, वह इंसानियत को शर्मसार करने वाला जरूर है। (फोटो : प्रतीकात्मक)

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