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जनज्वार एक्सक्लूसिव : इलाहाबाद कुंभ का बजट था 4500 करोड़ का और जाँच हुई सिर्फ 980 करोड़ की

Prema Negi
1 Nov 2019 5:22 AM GMT
जनज्वार एक्सक्लूसिव : इलाहाबाद कुंभ का बजट था 4500 करोड़ का और जाँच हुई सिर्फ 980 करोड़ की
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कुंभ मेला कार्यों के एक चौथाई बजट से कम के कार्यों की हुई थर्ड पार्टी जांच, लोक निर्माण विभाग की सड़कों व पीडीए के विद्युतीकरण ने थर्ड पार्टी ऑडिट पर उठाये सवाल

इलाहाबाद से जेपी सिंह की रिपोर्ट

जनज्वार। प्रयागराज कुम्भ का कुल बजट तो लगभग 4500 करोड़ का था, लेकिन पतित पावनी गंगा, पुण्य सलिला यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम तट पर वर्ष 2019 में लगने वाले कुंभ मेले में होने वाले 980.94 करोड़ रुपये के कामों की जांच थर्ड पार्टी से कराई गयी है। इस तरह केवल एक चौथाई बजट से कम बजट के कार्य ही थर्ड पार्टी ऑडिट के दायरे में हैं, जबकि पूरे मेले की ऑडिट देर सबेर कैग(सीएजी) करेगा तब असली घोटाले सामने आ पाएंगे।

रअसल 25 फरवरी 2018 को तत्कालीन मुख्य सचिव राजीव कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस पर निर्णय लिया गया था कि 980.94 करोड़ रुपये के कामों की जांच थर्ड पार्टी से कराई जाएगी । प्रमुख सचिव नगर विकास मनोज कुमार सिंह ने इस संबंध में संबंधित विभागों को निर्देश भेज दिया था।

रकार द्वारा बताया गया था कि लोक निर्माण विभाग को 39641.26 लाख, पावर कार्पोरेशन 151.89, जल निगम 15564.32 लाख, नगर निगम इलाहाबाद 3019.93 लाख रुपये का काम दिया गया है। इसी तरह स्वास्थ्य विभाग 25 लाख, नगर पंचायत झूंसी 67.06 लाख, इलाहाबाद विकास प्राधिकरण 7429.14 लाख, राज्य सड़क परिवहन निगम 195.52 लाख, सेतु निगम 32000 लाख रुपये काम कराने के लिए दिए गए हैं।

सके लिए इलाहाबाद विकास प्राधिकरण (अब प्रयागराज विकास प्राधिकरण) ने ई-टेंडरिंग के माध्यम से थर्ड पार्टी के चयन की प्रक्रिया शुरू की थी। इसमें कुल सात फर्मों ने भाग लिया था। इसमें से तीन फर्मों का तकनीकी स्कोर कटआफ से ऊपर पाया गया। इन तीन फर्मों में बीएलजी कान्सट्रक्शन, टीयूवीएसयूडी तथा मेन हार्ट कम्पनियों द्वारा दिये जाने वाले प्रस्तुतीकरण के बाद टीयूवीएसयूडी का चयन किया गया।

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हा जाता है कि टीयूवीएसयूडी के माध्यम से कुंभ मेला कामों की थर्ड पार्टी जांच कराई गयी। परीक्षण के दौरान सभी कम्पनियों के टर्नओवर, उनकी जनशक्ति तथा उनके अवस्थापना सम्बन्धी विषयों के विशेषज्ञों द्वारा गहराई से छानबीन की गयी तथा स्वास्थ्य विभाग, लोक निर्माणव विभाग, जल निगम, एडीए के अधिकारियों ने उनकी क्षमता, लैब, मैनपावर तथा विभिन्न तकनीकों के आधार पर कम्पनी के चयन पर अपना मत सुनिश्चित किया।

बीएलजी कान्सट्रक्शन, टीयूवीएसयूडी तथा मेन हार्ट कम्पनियों द्वारा दिये जाने वाले प्रस्तुतीकरण का परीक्षण करने के लिए मण्डलायुक्त और मेलाधिकारी के साथ उपाध्यक्ष विकास प्राधिकरण, नगर आयुक्त तथा लोक निर्माण विभाग, सेतु निगम, जल निगम, बिजली विभाग के सर्वोच्च अधिकारी एवं विशेषज्ञ मौजूद रहे।

ण्डलायुक्त डॉ आशीष कुमार गोयल ने यह बात सभी कम्पनियों के सामने प्रमुखता से रखी कि चयनित होने वाली कम्पनी को अनिवार्य रूप से न्यूनतम 30 प्रतिशत स्टाफ एवं ऐसा अनुभवी टीम लीडर अपने निजी पे रोल पर रखना होगा, जो कम्पनी के उद्देश्य और कार्यशैली से अच्छी तरह वाकिफ हो तथा कार्य प्रारंभ करने में विलम्ब न कर सके। इसी तरह मण्डलायुक्त ने निर्देश दिया कि काम करने वाली टीम में यथासम्भव अनुभवी, दक्ष और युवा जनशक्ति रखी जाय।

ही नहीं टीयूवी कम्पनी द्वारा विकसित एक सॉफ्टवेयर के बारे में दावा किया गया कि समस्त कार्यों के प्रगति की रिपोर्ट सभी विभाग सॉफ्टवेयर में दिये गये पाठय में नियमित रूप अंकित करते रहेंगे, तथा कुम्भ की प्रगति से सम्बन्धित साप्ताहिक समीक्षा बैठकों से लेकर मुख्य सचिव/स्तर से होने वाली सभी बैठकों में कार्य की प्रगति का आंकलन इसी साफ्टवेयर में सभी विभागों की समस्त कार्यो का वर्गीकृत विवरण विकास कार्यों की समयबद्ध प्रगति के अनुसार माइलस्टोन के रूप में अंकित होता रहेगा, जिसकी वास्तविक परीक्षण थर्ड पार्टी निरीक्षण एजेंसी अपने स्तर से करते हुए समयबद्ध रूप से मण्डलायुक्त और प्रशासन को अवगत कराती रहेगी।

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सॉफ्टवेयर में समस्त कार्यों के समयबद्ध चार्ट के अनुसार मौलिक प्रगति का उल्लेख माइलस्टोन के रूप में दिखता रहेगा तथा कार्य के सापेक्ष अवमुक्त धनराशि के व्यय की भी स्थिति पारदर्शी ढंग से दिखाई देती रहेगी। इस प्रकार कार्य की भौतिक, वास्तविक आख्या गुणवत्ता एवं समयबद्ध अनुपालन के रूप में पारदर्शी ढंग से रिखाई देती रहेगी।इससे विकास कार्यों की समयबद्धता और उनकी गुणवत्ता पर हस्तक्षेप के केन्द्रीय नियंत्रण रहेगा तथा हर विभाग की प्रगति आख्या सॉफ्टवेयर पर पारदर्शी ढंग से उपलब्ध रहेगी।

लोक निर्माण विभाग का कारनामा

ये सब तो दावे थे लेकिन हकीकत में क्या हुआ इसे कुम्भ के दौरान लोक निर्माण विभाग के कारनामों से समझा जा सकता है। थर्ड पार्टी ऑडिट और कथित साफ्टवेयर के बावजूद लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में सड़कों के निर्माण में खुलकर मानकों की अनदेखी पकड़ी गई। सड़कों के निर्माण में अफसरों की मिलीभगत से जमकर अंधेरगर्दी की गई। निर्माण खंड-4 (कुंभ मेला) डिवीजन की सड़कों में बिना काम पूरा कराए करोड़ों रुपये का भुगतान करा लिया गया।

ठेका फर्मों ने आधा-अधूरा जो काम कराया भी, वह अधोमानक पाया गया है। इस मामले में कुंभ मेला डिवीजन के एक्सईएन विपिन पचौरिया व प्रोन्नति पाकर कुंभ से पहले अधीक्षण अभियंता बने केके पाहूजा समेत 20 अभियंताओं की गर्दन फंस गई है। स्टेट लेबल कमेटी की जांच में सड़क निर्माण में करोड़ों रुपये की हुई अनियमितता में मुख्य अभियंता हिमांशु मित्तल पर भी तलवार लटक गई है।

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प्रमुख अभियंता वीके सिंह ने इन अभियंताओं को गड़बड़ी का जिम्मेदार ठहराते हुए आरोप पत्र जारी कर घोटाले की धनराशि की रिकवरी कराने का निर्देश दिया है। मई 2018 में करीब 20 करोड़ रुपये की लागत से 17.7 किमी लंबे बलरामपुर बाजार से रेलवे क्रासिंग पार होते हुए लीलापुर-जीटी रोड मार्ग का बांड गठित हुआ था।

स सड़क के निर्माण में मानक को ताक पर रखकर काम कराया गया। काम पूरा कराए बिना ही 80 फीसदी भुगतान भी करा लिया गया। इसमें बिटुमेन की मात्रा का ध्यान नहीं रखा गया, साथ ही बीसी एवं डीवीएम की डेंसिटी बेहद कम पाई गई। इसी तरह 16 किमी लंबे कटरा-खानपुर से भरतपुर-मदारी मार्ग पर भी काम मानक के अनुरूप पूरा कराए बिना कराए ही 50 फीसदी से अधिक भुगतान करा लिया गया है।

पीडब्ल्यूडी में मानक के विपरीत सड़क निर्माण पर शासन की सख्ती से अभियंताओं-ठेकेदारों पर शिकंता कस गया है। बलरामपुर बाजार से रेलवे क्रासिंग पार होते हुए लीलापुर-जीटी रोड का निर्माण कराने वाली ठेका फर्म शिवम कंस्ट्रक्शन से 70 लाख रुपये की रिकवरी कर ली गई है। इसी तरह कुंभ के पहले प्रयागराज से मीरजापुर मार्ग पर सड़क निर्माण में अनियमितता सामने आई है।

गभग 250 करोड़ रुपये की लागत से बनी सड़क में तकरीबन 18 किमी की गुणवत्ता फेल पाई गई है। इसके कारण लगभग 40 करोड़ रुपये का भुगतान रोक दिया गया है। जांच रिपोर्ट मिलने पर अब आगे की कार्रवाई भी कराई जा रही है। खराब मिली 18 किमी सड़क में निर्माण सामग्री घटिया किस्म की प्रयुक्त हुई थी।

शास्त्री पुल से अंदावा तक विद्युतीकरण का ठेका घोटाला

ब जरा कुंभ मेले के विद्युतीकरण ठेका घोटाले पर नजर डालें। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रयागराज में कुम्भ मेले के दौरान शास्त्री पुल से अंदावा तक विद्युतीकरण का ठेका घोटाले की विजिलेंस या निष्पक्ष एजेंसी से जांच की मांग में दाखिल जनहित याचिका पर राज्य सरकार, प्रयागराज विकास प्राधिकरण(पीडीए) से जवाब मांगा है और प्रताप विहार गाजियाबाद की ठेका लेने वाली कम्पनी मेसर्स अनू वेन्चर्स को नोटिस जारी की है।याचिका में कम्पनी पर फर्जी प्रमाणपत्र के जरिये पीडीए के अधिशाषी अभियंता अवनींद्र कुमार सिंह की मिलीभगत से ठेका लेकर काम किये बगैर 80 फीसदी भुगतान लेने और सरकार को करोड़ों का नुकसान पहुचाने का आरोप लगाया गया है।

ह आदेश न्यायमूर्ति राम सूरत राम मौर्य तथा न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने अधिवक्ता अरुण मिश्र की याचिका पर दिया है। याची का कहना है कि कम्पनी को कार्य अनुभव नही है। उसने नगर पालिका परिषद अयोध्या में कार्य का फर्जी प्रमाणपत्र देकर ठेका ले लिया और कार्य पूरा किये बगैर भुगतान ले लिया। जब धांधली का खुलासा हुआ तो अपनी खाल बचाने के लिए 22 फरवरी 19 को अनू वेन्चर्स के खिलाफ गवन व षड्यंत्र के आरोप में सिविल लाइंस थाना, प्रयागराज में एफ़आईआर दर्ज कराई गई है, किंतु कोई ठोस कार्यवाही नही की जा रही है।

अरुण मिश्र का कहना है कि विद्युतीकरण का काम कराना यूपी पावर कॉरपोरेशन का दायित्व है, लेकिन कुम्भ में 104 रुपये का विद्युतीकरण का काम पीडीए को दे दिया गया। ऐसा करके इलेक्ट्रीसिटी एक्ट 2003 की धारा 14 के तहत प्रदत्त लाइसेंस का उल्लंघन किया गया। साथ ही सुपरविजन चार्ज, कंटीजेंसी आदि का साढ़े 19 प्रतिशत चार्ज भी नहीं लिया गया। याचिका हाईकोर्ट में लम्बित है।

बजट रिलीज की जिम्मेदारी मण्डलायुक्त की

उल्लेखनीय है कि कुम्भ के किसी भी विभाग का बजट मण्डलायुक्त /अध्यक्ष पीडीए की स्वीकृति से रिलीज होता है तो लोकनिर्माण और पीडीए को उक्त मदों बजट में क्यों और कैसे रिलीज हुआ? बजट की जाँच की भी जिम्मेदारी भी मण्डलायुक्त /अध्यक्ष पीडीए की ही है।

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