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राजनीति

पिन्हा था दाम-ए-सख्त करीब आशियां के, उड़ने न पाए थे कि गिरफ्तार हम हुए

Prema Negi
11 Jun 2019 1:06 PM GMT
पिन्हा था दाम-ए-सख्त करीब आशियां के, उड़ने न पाए थे कि गिरफ्तार हम हुए
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ग़ालिब के शेर के साथ कठुआ कांड में जज ने सुनाई बच्ची के बलात्कार के बाद नृशंसता से हत्या करने वाले तीन आरोपियों को उम्रकैद, सबूत मिटाने के लिए दोषी पाए जाने पर तीन पुलिसकर्मियों को 5-5 साल की कैद...

जेपी सिंह, वरिष्ठ पत्रकार

जम्मू-कश्मीर के कठुआ में खानाबदोश समुदाय की 8 साल की बच्ची के गैंगरेप और हत्या मामले में पठानकोट कोर्ट ने सोमवार को 3 आरोपियों को आपराधिक साजिश और हत्या के अपराध में उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके अलावा उन्होंने सबूत मिटाने के जुर्म में 3 अन्य आरोपियों को 5-5 साल जेल की सजा सुनाई है, जबकि एक आरोपी को बरी कर दिया है।

इस फैसले की शुरुआत में न्यायाधीश तेजविंदर सिंह ने तल्ख टिप्पणी में कहा कि इस मामले से ऐसा लगता है कि समाज में ‘जंगल का कानून’ है। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण अपहरण, नशीले पदार्थ देना, गलत तरीके से बंधक बनाना, 8 साल की एक बच्ची के बलात्कार और उसकी हत्या ने आपराधिक कानून को गति में ला दिया।

जज ने अपराध की जघन्यता बयां करने के लिए मिर्जा गालिब के एक शेर का जिक्र किया 'पिन्हा था दाम-ए-सख्त करीब आशियां के, उड़ने न पाए थे कि गिरफ्तार हम हुए' जिसका अर्थ है कि शिकारियों ने इतना कड़ा जाल बिछा रखा था कि उड़ने से पहले ही पकड़ लिया गया। देश को चौंका देने वाले इस मामले की बंद कमरे में हुई सुनवाई 3 जून को पूरी हो गई थी।

कोर्ट ने मुख्य आरोपी सांझीराम के साथ-साथ प्रवेश कुमार और दीपक खजुरिया को आजीवन कारावास की सजा सुनाई, जबकि शेष 3 आरोपियों को सबूत नष्ट करने के मामले में 5 साल की सजा सुनाई गई। हालांकि मुख्य आरोपी सांझीराम के बेटे (सातवें आरोपी) विशाल को अदालत ने बरी कर दिया गया। हालांकि कठुआ गैंगरेप के बाद नृशंसता से मौत के घाट उतार दी गई बच्ची के परिजन इस फैसले से खुश नजर नहीं आए, वे आरोपियों के लिए फांसी की सजा की मांग कर रहे थे।

पुलिस के मुताबिक इस मामले का मास्टरमाइंड ग्राम प्रधान सांझी राम था। उसके अलावा स्पेशल पुलिस ऑफिसर दीपक खजूरिया, सुरेंद्र वर्मा, हेड कॉन्स्टेबल, आनंद दत्ता और प्रवेश भी इस मामले में अदालत द्वारा दोषी करार दिए गए हैं। आरोपियों के खिलाफ सिद्ध आरोप सोमवार 10 जून सुबह जिला और सत्र न्यायाधीश तेजविंदर सिंह की अदालत ने सभी सातों आरोपियों पर अपना फैसला पढ़ा।

स्पेशल कोर्ट ने 6 दोषियों में से 3 को रेप और हत्या का दोषी पाया, जबकि 3 को सबूत मिटाने का दोषी माना गया। सांझी राम, प्रवेश कुमार, दीपक खजुरिया को रनबीर पैनल कोड की धारा 302 (मर्डर), 376 (रेप), 120 बी (साजिश) 363 (किडनैपिंग) के तहत दोषी करार दिया गया। कोर्ट ने पुलिसकर्मी आनंद दत्ता, सुरेंद्र कुमार , तिलक राज को धारा 201 (सबूतों को मिटाना) के तहत दोषी माना।

इस मामले में इन-कैमरा ट्रायल 3 जून को समाप्त हो गया था और इसके बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश तेजविंदर सिंह ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। चार्जशीट के मुताबिक, बच्ची का अपहरण कर लिया गया था और उसे पिछले साल 10 जनवरी को कठुआ जिले के एक गांव के मंदिर में ले जाया गया था। 4 दिनों के दौरान उससे कैद में बलात्कार किया गया। उसके बाद उसे मौत के घाट उतार दिया गया। पीड़िता का शव 17 जनवरी को एक जंगली इलाके में मिला था।

किशोर आरोपी के खिलाफ बाकी है सुनवाई

3 दिन बाद एक आरोपी किशोर को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उसके मामले की सुनवाई शुरू होनी अभी बाकी है, क्योंकि उसकी उम्र का निर्धारण करने वाली याचिका पर जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय द्वारा सुनवाई बाकी है।

मामले में अन्वेषण और गिरफ्तारी बाद में यह मामला क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया, जिसके बाद सबूत नष्ट करने के लिए एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर और एक हेड कांस्टेबल को गिरफ्तार किया गया। मुख्य आरोपी सांझी राम ने 20 मार्च को आत्मसमर्पण कर दिया था। सांझी राम के अलावा, मामले में गिरफ्तार किए गए अन्य लोगों में उसका बेटा विशाल, एक "किशोर" भतीजा, उसका दोस्त आनंद दत्ता और 2 विशेष पुलिस अधिकारी हैं, जिनकी पहचान दीपक खजुरिया और सुरेंद्र वर्मा के रूप में की गई है। सबूत नष्ट करने के आरोपी पुलिसकर्मी हेड कांस्टेबल तिलक राज और सब-इंस्पेक्टर आनंद दत्ता हैं।

लड़की से बलात्कार और हत्या की कथित वजह क्राइम ब्रांच द्वारा की गई जांच में पता चला है कि कठुआ क्षेत्र में लगातार घुमंतू लोगों के बीच भय पैदा करने और उन्हें बाहर निकालने के प्रयास में आरोपी द्वारा कथित रूप से लड़की से बलात्कार और उड़की हत्या की गई थी।

9 अप्रैल 2018 को वकीलों ने कठुआ की अदालत में अपराध शाखा को चार्जशीट दाखिल करने से रोक दिया। इसके बाद उच्चतम न्यायालय ने मामले के ट्रायल को जम्मू और कश्मीर से बाहर पठानकोट स्थानांतरित कर दिया था। उच्चतम न्यायालय के आदेश पर किशोर को छोड़कर सभी आरोपियों को गुरदासपुर जेल भेज दिया गया और पठानकोट में जिला और सत्र न्यायाधीश द्वारा रोजाना इन- कैमरा ट्रायल का आदेश दिया गया।

15 पन्नों की चार्जशीट में कहा गया था कि पिछले साल 10 जनवरी को अगवा की गई 8 साल की बच्ची को कठुआ जिले के एक गांव के मंदिर में बंधक बनाकर उसके साथ दुष्कर्म किया गया था। उसे चार दिन तक बेहोश रखा गया था और बाद में उसकी हत्या कर दी गई थी।

गौरतलब है कि भारत के जम्मू कश्मीर राज्य में जो दंड संहिता लागू है, उसे रणबीर दंड संहिता कहा जाता है। भारतीय संविधान की धारा 370 के मुताबिक जम्मू कश्मीर राज्य में भारतीय दंड संहिता का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। यहां केवल रणबीर दंड संहिता का प्रयोग होता है। ब्रिटिश काल से ही इस राज्य में रणबीर दंड संहिता लागू है।

दरअसल, भारत के आजाद होने से पहले ही जम्मू कश्मीर एक स्वतंत्र रियासत था। उस वक्त जम्मू कश्मीर में डोगरा राजवंश का शासन था। महाराजा रणबीर सिंह वहां के शासक थे। इसलिए वहां 1932 में महाराजा के नाम पर रणबीर दंड संहिता लागू की गई थी। यह संहिता थॉमस बैबिंटन मैकॉले की भारतीय दंड संहिता के ही समान है, लेकिन कुछ मामलों में अंतर है।

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