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राजनीति

डर सिर्फ इतना विश्वास गए राज्यसभा तो बन जाएंगे केजरीवाल से बड़े नेता

Janjwar Team
1 Nov 2017 10:14 AM GMT
डर सिर्फ इतना विश्वास गए राज्यसभा तो बन जाएंगे केजरीवाल से बड़े नेता
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जिस तरह विश्वास के राज्यसभा जाने की बात से ही केजरीवाल असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, वैसी ही असुरक्षा योगेंद्र को लेकर भी केजरीवाल को होने लगी थी, तभी उनको पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया...

दिल्ली से स्वतंत्र कुमार की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

आम आदमी पार्टी में चल रही आपसी खींचतान बढ़ती जा रही है। मंगलवार 31 अक्तूबर को भी कुमार के अपनी पार्टी के नेताओं पर हमले जारी रहे।

हम बताते हैं इस झगड़े की असली वजह। ऊपरी तौर पर आप में राज की वजह अमानतुल्ला का निलंबन वापस लेने पर कुमार का नाराज़ होना और कुमार का खुले तौर पर 2018 जनवरी के लिए राज्यसभा के लिए दावेदारी ठोकना लग रहा है। मगर असली वजह ये है कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व यानी केजरीवाल को उनके आसपास की टीम जिसे कुमार कोटरी कहते हैं, यह कहकर डरा रही है कि यदि कुमार को एक बार राज्यसभा भेज दिया तो वो उनसे यानी केजरीवाल से भी बड़े नेता बन जायेंगे।

अभी भी सार्वजनिक मंचों पर कुमार पार्टी के खिलाफ खुलकर बोलते रहते हैं। अगर कुमार को ऊपरी सदन में भेज दिया तो वहां जाकर भी स्वतंत्र होकर पार्टी लाइन से अलग जाकर बोलेंगे। उनकी सदन में उठाई गई बात पूरे देश में जाएगी। ऐसे में ब्रांड केजरीवाल कहीं न कहीं कुमार की चमक के आगे फीके पड़ जायेंगे।

इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि भगवंत मान सांसद बनने से पहले एक क्षेत्रीय कॉमेडियन थे। लेकिन सांसद बनने के बाद देश में जाना—पहचाना चेहरा हैं। भगवंत मान ने कई बार सदन में मोदी पर कटाक्ष कर पूरे देश के लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचा है और मीडिया में भी हेडलाइन बने हैं।

कुमार हर मामले में भगवंत से आगे हैं। पार्टी के मैनेजर इस बात को अच्छी तरह समझते हैं। यही वजह है कुमार पर लांछन लगाकर उन्हें पार्टी आए बाहर का रास्ता दिखाने के लिए काफी समय से तैयारी चल रही है, लेकिन अभी तक पार्टी के कुछ नेता इसमें सफल नहीं हो पाए हैं।

आप की राजीनीति पर नजर रखने वाले विश्लेषक बताते हैं कि केजरीवाल के लिए कुमार को राज्यसभा भेजना इतना बड़ा मुद्दा नहीं है। असल मुद्दा ये है कि केजरीवाल और उनकी टीम केजरीवाल से बड़ा नेता पार्टी में किसी को नहीं बनने देंगे। फिर चाहे इसके लिए उन्हें किसी की भी बलि लेनी पड़े।

राजनीतिक विश्लेषकों का तो यह भी कहना है कि योगेंद्र को लेकर भी केजरीवाल को असुरक्षा महसूस होने लगी थी, तभी उनको बाहर का रास्ता दिखाया गया और योगेंद्र का साथ देने पर प्रशांत भूषण को भी पार्टी से बाहर जाना पड़ा।

कुमार को लेकर आप के रणनीतिकार 2 नवंबर यानी कल दिल्ली में होने होने वाली राष्ट्रीय परिषद की बैठक में जुट गए हैं। जिसका खुलासा जल्द किया जाएगा।

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