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भारतीय न्याय व्यवस्था वकीलों में से जजों की खोज क्यों नहीं करती

Janjwar Team
28 March 2018 10:54 AM GMT
भारतीय न्याय व्यवस्था वकीलों में से जजों की खोज क्यों नहीं करती
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हमारी न्यायिक व्यवस्था एक वंशानुगत संस्था में बदलती जा रही है। न्यायाधीशों के बच्चे—बच्चियां न्यायाधीश बन रहे हैं। जब एक वकील का 10 वर्ष का अनुभव उन्हें न्यायाधीश बनने की योग्यता के दायरे में ला खड़ा करता है तो फिर वकील क्यों नहीं न्यायाधीश बनाए जाते, जबकि कई वकील बहुत ही काबिल और अनुभवी हैं...

जनज्वार, दिल्ली।' लॉयर्स फोरम फॉर डेमोक्रेसी एंड जस्टिस ने शहीद भगत सिंह की शहादत दिवस 23 मार्च को 'न्यायपालिका की स्वतंत्रता और लोकतंत्र के निहितार्थ' एक गोष्ठी का आयोजन किया। आयोजन इंडियन सोसाइटी आॅफ इंटरनेशनल लॉ के हॉल में हुआ।

कार्यक्रम में वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह, पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विश्वजीत भट्टाचार्या, लॉयर्स फोरम फॉर डेमोक्रेसी एंड जस्टिस 'एलएफडीजे' के संयोजक रवींद्र सिह गड़िया, चर्चित वकील केके मेनन, वृंदा ग्रोवर समेत न्याय और कानून के क्षेत्र के तमाम नामचीन दिग्गज मौजूद थे।

लॉयर्स फोरम फॉर डेमोक्रेसी एंड जस्टिस 'एलएफडीजे' के संयोजक रवींद्र सिंह गड़िया ने कार्यक्रम में प्रमुखता से अपनी बात रखी। कहा कि हमें न्यापालिका की स्वतंत्रता को न सिर्फ किसी भी तरह के दबावों से मुक्त रखना है बल्कि हमें एकता की एक ऐसी व्यापक तैयारी में भी जुटना है जिससे आने वाले दबावों के खिलाफ वकीलों के बीच मजबूती कायम हो।

न्यायपालिका की स्वतंत्रता और लोकतंत्र के निहितार्थ गोष्ठी में उपस्थित लोग

एलएफडीजे के संयोजक और नागरिक अधिकारों को लेकर सक्रिय रहने वाले सुप्रीम कोर्ट के रवींद्र गड़िया ने कार्यक्रम में हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र सच्चर का द्वारा भेजा गया संदेश भी पढ़ा। पत्र में पूर्व न्यायाधीश राजेंद्र सच्चर ने दो टूक लिखा कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ सीबीआई जांच का आदेश देने वाले न्यायाधीश जयंत पटेल को एक्टिंग मुख्य न्यायाधीश बनने से रोकने के लिए उनका ट्रांसफर पहले मुंबई और फिर इलाहाबाद करना, न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर हमला है। रवींद्र गड़िया ने सच्चर साहब का पत्र पढ़ने के बाद कहा कि इस मसले पर हमें राष्ट्रपति से मिलना चाहिए और आंदोलन खड़ा करने की दिशा में भी आगे बढ़ना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील और मानवाधिकार मसलों को लेकर सक्रिय इंदिरा जयसिंह ने न्यायपालिका में होने वाली नियुक्तियों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। बताया कि हमारी न्यायिक व्यवस्था एक वंशानुगत संस्था में बदलती जा रही है। न्यायाधीशों के बच्चे—बच्चियां न्यायाधीश बन रहे हैं। जब एक वकील का 10 वर्ष का अनुभव उन्हें न्यायाधीश बनने की योग्यता के दायरे में ला खड़ा करता है तो फिर वकील क्यों नहीं न्यायाधीश बनाए जाते, जबकि कई वकील बहुत ही काबिल और अनुभवी हैं। आखिर न्याय व्यवस्था वकीलों में से जजों की खोज क्यों नहीं करती।'

अगले वक्ता के रूप में अपनी बातचीत रखते हुए पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विश्वजीत भट्टाचार्य ने कहा, 'जिन चार जजों ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ प्रेस कांफ्रेंस की थी उन पर कोई सवाल नहीं बनता। उन जजों का यह कहना कि हमने आत्मा की आवाज सुनी और जनता के बीच आए, साबित करता है कि हमारी न्यायपालिका गंभीर खतरे में है।'

एलएफडीजे द्वारा 23 मार्च को आयोजित इस कार्यक्रम को वकील वृंदा ग्रोवर, चर्चित सुप्रीम कोर्ट वकील केके मेनन, मनीष छिब्बर, मोहन गोपाल, इंदिरा उन्नियार और संगीता मदान ने भी संबोधित किया।

कार्यक्रम के आखिर में रवींद्र गड़िया ने सदन के समक्ष प्रस्ताव पढ़े, जिसे ध्वनिमत से वक्ताओं और श्रोताओं ने पारित किया। साथ ही उन्होंने न्यायाधीश केएम जोसेफ और इंदू मल्होत्रा को तुरंत प्रभाव से सुप्रीम कोर्ट का जज बनाए जाने को लेकर राष्ट्रपति से मांग की।

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