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अंधविश्वास

भूत-पिचाश के नाम पर झारखंड में दो बच्चों की चढ़ाई बलि, पुलिस ने कहा मानसिक रोगी है हत्यारा

Prema Negi
16 July 2019 4:31 PM GMT
भूत-पिचाश के नाम पर झारखंड में दो बच्चों की चढ़ाई बलि, पुलिस ने कहा मानसिक रोगी है हत्यारा

अंधविश्वास के नाम पर की जाने वाली हत्याओं के मामले में हमारा देश चरम छू रहा है, झारखंड के पिछड़े इलाकों में तो ऐसी घटनाओं ने कीर्तिमान ही स्थापित किया हुआ है। एक बार फिर झारखंड का लातेहार इलाका चर्चा में है, कारण है दो स्कूली बच्चों की बलि दिया जाना....

जनज्वार। अंधविश्वास के नाम पर दी जाने वाली नरबलियों और डायन—बिसही के नाम पर किए जाने वाले उत्पीड़न हत्याओं की खबरें आए दिन मीडिया में छायी रहती हैं। खासकर झारखंड ने तो इसका कीर्तिमान ही स्थापित किया हुआ है। यहां डायन—बिसही और बच्चों की बलि देने के मामले आए दिन सुर्खियों में रहते हैं। एक बार फिर इसी तरह का एक मामला झारखंड के लातेहार इलाके में सामने आया है। यहां दो स्कूली बच्चों की बलि चढायी गई है।

प्रभात खबर में छपी एक खबर के मुताबिक लातेहार के मनिका थाना क्षेत्र स्थित माइल गांव के सेमरहट टोला में दो स्कूली बच्चों की बलि दी गई है। बलि देने वाले ने दोनों बच्चों के सिर बेरहमी से काट काटकर कहीं और रख दिये और धड़ को अपन घर के पास मौजूद बालू में छिपा दिया। हत्या का खुलासा तब हुआ जब आरोपी के घर के पास एक बच्चे का एक पिता अपने बच्चे को खोजता हुआ पहुंचा और बारिश के बाद बह चुकी बालू में उसे बच्चे का पैर दिखायी दिया। इसी बालू में दोनों बच्चों के धड़ बरामद किये गये।

जानकारी के मुताबिक अंधविश्वास की इंतहा पार करते हुए माइल गांव के सेमरहट टोला के सुनील उरांव ने 14 वर्षीय निर्मल उरांव और 7 साल की शीला कुमारी को धोखे से अगवा किया और फिर जादू—टोने, तंत्र—मंत्र से अपनी सिद्धि प्राप्त करने के नाम पर दोनों की बलि ले ली। मारे गये दोनों बच्चे अलग-अलग परिवार से थे। 11 जुलाई की सुबह दोनों बच्चों के बिना सर के शव सुनील उरांव के घर के पास बालू में मिले, जिसके बाद पुलिस ने वहां पहुंचकर दोनों धड़ों को अपने कब्जे में लिया। इसके बाद आरोपी सुनील उरांव को गिरफ्तार कर पुलिस ने उससे पूछताछ की, मगर वह पहले हत्या की बात से इंकार करता रहा, मगर बाद में स्वीकारा कि उसी ने दोनों बच्चों की हत्या की है।

त्यारे सुनील उरांव की निशानदेही पर पुलिस ने देर रात मार दिये गये बच्चे निर्मल उरांव का सिर बरामद किया, जबकि बच्‍ची शीला का सिर नहीं​ मिल पाया। शीला के पिता के मुताबिक सुनील ने कहीं रास्ते से मेरी बच्ची को अगवा किया होगा, और उसके बाद उस नरपिशाच ने मेरी बच्ची की बलि ले ली।

मृतक बच्चे निर्मल उरांव के पिता वीरेंद्र उरांव ने पुलिस को बताया कि मंगलवार 9 जुलाई को हत्यारे सुनील उरांव के ससुराल से मेरे मोबाइल पर उसके लिए फोन आया था। उसने फोन लौटाया तो मैंने दूसरे दिन यानी 10 जुलाई को अपने बच्चे निर्मल को फोन वापस लेने उसके घर भेजा, मगर वहां से मेरा बेटा वापस नहीं आया। जब मैंने सुनील से पूछा कि मेरा बेटा कहां है, तो उसने कहा तुम्हारा बेटा फोन लेकर वापस चला गया है, मगर मेरा बच्चा वापस नहीं पहुंचा था। दूसरे दिन सुबह जब मैं फिर से सुनील उरांव के घर गया तो उसके घर पर ताला लटका हुआ था। घर के पीछे देखा तो वहां बालू के नीचे बच्चे का पैर दबा हुआ दिखाई दिया। पैर देखकर मैंने शोर मचाया तो गांव के लोग वहां आये।'

ग्रामीणों का कहना है कि अंधविश्वास की पराकाष्ठा पार करते हुए गांव के ही सुनील उरांव ने दोनों बच्चों की गला काट कर नरबलि दी है। मारे गये बच्चे निर्मल उरांव के पिता का कहना है कि ओझा गुनी के चक्कर में उसने बच्चों की बलि दी है। दोनों बच्चों की बलि देने के बाद से सुनील अपने घर से गायब हो गया। रांची से आई फॉरेंसिक टीम ने सेमरहट टोला पहुंच सुनील उरांव के घर का ताला तोड़ा और अंदर रखे सामानों की जांच की तो घर में खून के धब्बे और खून से सने कपड़े बरामद किये।

हालांकि सुनील के घर के अंदर किसी तरह का पूजा—पाठ, तंत्र-मंत्र से संबंधित सामान नहीं मिला, मगर जहां उसने बच्चों की लाशें छिपायी थीं वहां 13 मिट्टी के दीये, धान, सिंदूर और अरवा चावल बरामद किये गये।

शुरुआती जांच के बाद पुलिस का यह भी कहना है कि सुनील उरांव मानसिक तौर पर विक्षिप्त और आपराधिक प्रवृत्ति का रहा है। उसने पहले भी हत्या जैसी कई वारदातों को अंजाम दिया है। मगर गांव के मुखिया राजेंद्र उरांव का भी दावा है कि हत्यारे सुनील उरांव ने भूत पिचास के चक्कर में बच्चों की बलि दे दी।

हीं इस मामले की जांच कर रही झारखंड पुलिस ने दावा किया कि नाबालिग बच्चों की निर्मम हत्या वास्तव नरबलि​ के लिए नहीं की गई थी, बल्कि इसलिए की गई थी क्योंकि वह बच्ची शीला के साथ अपने घर में गंदी हरकत कर रहा था, जिसे निर्मल उरांव ने देख लिया। इसी से बचने के लिए उसने इस दोहरे हत्याकांड को अंजाम दिया।

लामू क्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक विपुल शुक्ला के मुताबिक जब निर्मल ने शीला के साथ गंदी हरकत करते हुए सुनील को देख लिया तो उसने दोनों बच्चों को पकड़कर अपने घर के अंदर बंद कर दिया और 10 जुलाई की रात को ही तेजधार हथियार से दोनों का गला रेतकर हत्या कर दी। हत्या में प्रयोग किया गया हथियार भी पुलिस ने बरामद कर लिया। इसके आधार पर पुलिस का कहना है कि हत्यारे सुनील के मानसिक रोगी होने के संकेत मिले हैं। गौरतलब है कि दो बच्चों की नृशंसता से हत्या करने वाला सुनी इससे पहले अपने बहनोई डुडुआ भगत और गांव के ही एक शख्स को मौत के घाट उतार चुका है।

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