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सतना जुड़वा बच्चों की हत्या का मुख्य आरोपी बजरंग दल नेता का भाई

Prema Negi
24 Feb 2019 12:50 PM GMT
सतना जुड़वा बच्चों की हत्या का मुख्य आरोपी बजरंग दल नेता का भाई
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श्रेयांश और प्रियांश के अपहरण के लिए जिस बाइक और कार का इस्तेमाल किया गया था उस बाइक की नंबर प्लेट पर रामराज्य लिखा हुआ था और कार पर भाजपा का झंडा लगा हुआ था....

जनज्वार। मध्प्रदेश के सतना जनपद के चित्रकूट से 12 फरवरी को 5 साल के दो जुड़वा भाइयों को उस समय स्कूल से अगवा कर लिया गया था जब वो स्कूल से घर लौट रहे थे। अब इन दोनों मासूम बच्चों श्रेयांश और प्रियांश की लाश 13 दिन बाद उत्तर प्रदेश के बांदा से बरामद हुई है।

गौरतलब है कि पेशे से तेल व्यापारी बृजेश रावत के दो जुड़वा बच्चों को 12 फरवरी को स्कूल परिसर में ही मोटरसाइकिल पर सवार दो नकाबपोश युवकों ने पिस्तौल दिखाकर बस को रोका और बच्चों को अगवा कर ले गए। इस घटना की सूचना पुलिस को देने के बावजूद और घटना सीसीटीवी कैमरे में दर्ज होने के बावजूद अपरा​धी पकड़े नहीं जा सके। पुलिस ने आरोपियों पर 50 हजार रुपये का इनाम भी रखा था, मगर बावजूद इसके इतने दिनों तक किसी को उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया।

12 फरवरी को जुड़वा बच्चों के अपहरण के बाद इसकी जांच एसटीएफ को सौंपी गई थी, मगर बच्चों और अपहरणकर्ताओं का कोई सुराग नहीं मिल पाया था। अब बच्चों की लाश बरामद होने के बाद पुलिस ने जरूर इस मामले में कई लोगों को हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है।

रीवा जोन के आईजी चंचल शेखर के मुताबिक पुलिस ने बच्चों के अपहरण और हत्या के मुख्य आरोपी पदम शुक्ला सहित छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। पदम शुक्ला बजरंग दल के संयोजक विष्णुकांत शुक्ला का भाई है। शक जताया जा रहा है कि बच्चों के अपहरण और उन्हें मारने में विष्णुकांत की भी संदिग्ध भूमिका है। ऐसा इसलिए क्योंकि आरोपियों ने अपहरण के लिए जिस बाइक और कार का इस्तेमाल किया था उस बाइक की नंबर प्लेट पर रामराज्य लिखा हुआ था और कार पर भाजपा का झंडा लगा हुआ था।

मीडिया में आ रही जानकारी के मुताबिक बृजेश रावत ने फिरौती के 25 लाख रुपए भी ​बदमाशों को दे दिए थे, मगर बावजूद इसके उन्हें अपने बच्चे नहीं उनकी लाश मिली, वो भी बहुत बुरी हालत में। बांदा में हत्या के बाद बदमाशों ने इन दोनों मासूमों को अवगासी घाट पर फेंक दिया था।

कहा जा रहा है कि शायद बच्चों ने अपराधियों को पहचान ​लिया होगा, इसलिए जुर्म का भंडाफोड़ होने के डर से उन्होंने उनको मारकर नदी में फेंक दिया। फिलहाल पुलिस ने शवों को अपने कब्जे में ले उन्हें पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

मगर बच्चों की मौत से गुस्साए चित्रकूट के लोगों ने पुलिस पर अपना गुस्सा निकाला। भीड़ ने पुलिस की गाड़ियों पर पथराव किया। लोगों के गुस्से और बढ़ते तनाव को देखकर इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और धारा 144 लगा दी गई है।



पुलिस के मुताबिक अपहरणकर्ताओं ने एक बार इंटरनेट कॉलिंग के जरिए बच्चों की पिता बृजेश रावत से बात करवाई थी। अपहरण के दो दिन बाद आरोपियों ने राह चलते लोगों से बृजेश रावत का नंबर मांग उनको फोन किया और उनसे दो करोड़ रुपए की फिरौती मांगी थी। 19 फरवरी को परिजनों ने 25 लाख रुपए दिए भी, मगर 21 फरवरी को बच्चों को मौत के घाट उतार दिया गया।

चित्रकूट के जानकी कुंड इलाके में लोगों ने जाम लगाकर पुलिस और सद्गुरु सेवा ट्रस्ट के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पूरे इलाके में दो से तीन हजार की भीड़ इस घटना के रोष में सड़कों पर उतर आई है। कुछ जगहों पर नाराज लोगों ने तोड़फोड़ की घटनाओं को भी अंजाम दिया है। यात्री बसों और ऑटो को रोका जा रहा है। उग्र भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने इलाके में आंसू गैस के गोले भी दागे हैं।

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