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अमानवीयता : मध्यप्रदेश में सोते मजदूर पर मिट्टी का ढेर खाली कर चला गया डंफर

Janjwar Team
19 Jun 2018 10:48 AM GMT
अमानवीयता : मध्यप्रदेश में सोते मजदूर पर मिट्टी का ढेर खाली कर चला गया डंफर
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सुबह कुत्ते जब मिट्टी में से नोचते दिखे हाथ तो आसपास के लोगों ने लाश की आशंका पर पुलिस को दी सूचना, पुलिस ने हटवाया मिट्टी का ढेर तो बेहोश हालत में मजदूर निकला अंदर

भोपाल। कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश में सोते कुत्ते पर गर्म कोलतार डालकर डामर कर दिए जाने का फोटो वायरल हो रहा था, अब एक इसी तरह की घटना मध्य प्रदेश के जबलपुर में भी घटी है, मगर यहां शिकार जानवर नहीं इंसान था।

मीडिया में आई खबरों के मुताबिक जबलपुर के नौदराब्रिज हनुमान मंदिर से लगे नगर निगम के खाली मैदान पर एक मजदूर विजय रात को सो रहा था तो एक डंफर वाला उसी पर मिट्टी का ढेर खाली कर चला गया। शायद विजय उसी में दफन हो जाता, मगर उसकी खुशकिस्मती से सुबह कुत्तों ने उसका हाथ निकालकर मांस नोचने के लिए खींचना शुरू कर दिया और यह सब स्थानीय लोगों ने देख लिया।

आनन फानन में लोगों ने लाश की आशंका होने पर पुलिस को मौके पर बुलाया। पुलिस ने मिट्टी का ढेर हटवाया तो बेहोशी की हालत में मजदूर विजय को बाहर निकाला गया और उपचार के लिए पास ही मौजूद अस्पताल में भेजा गया। हालांकि शुरुआत में जब उस पर पानी के छींटे डाले गए थे तो उसे होश आ गया था।

मीडिया में आ रही खबर के मुताबिक नगर निगम के मैदान में पिछले कुछ महीनों से मिट्टी और मलबा डाला जा रहा था। 17 जून की रात मजदूरी करने वाला बालाघाट निवासी 24 वर्षीय विजय विश्वकर्मा इसी मैदान के एक कोने में सो रहा था। रात को एक डंपर वहां मिट्टी उलीचने पहुंचा और बिना देखे उसने पूरी मिट्टी विजय के ऊपर उड़ेल दी। विजय लगभग 8—10 घंटे तक मिट्टी के अंदर दबा रहा।

फोटो : नई ​दुनिया से साभार

पुलिस को छानबीन में विजय ने बताया कि रात को वह थककर चूर होकर नगर निगम के खाली मैदान में सो गया था, डंफर उस पर कब मिट्टी का ढेर उलीचकर चला गया उसे पता ही नहीं चला। मेरी किस्मत अच्छी थी कि ​कुत्तों से नोचते हुए आसपास के लोगों ने देख लिया अन्यथा या तो मैं उसी के नीचे दबकर मर जाता या फिर कुत्ते ही मेरा मांस नोचकर खा जाते।

फिलहाल इस मामले में पुलिस ने क्या कार्रवाई की है इसकी सूचना नहीं है। मगर इंसानियत को शर्मसार करने वाली इस घटना के लिए आरोपी को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए, जिसके लिए सोते हुए मजदूर की जान की कोई कीमत नहीं थी।

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