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लॉकडाउन ख़त्म होने के बाद भी नहीं लौटे प्रवासी मज़दूर तो वेतन में होगी कटौती

Nirmal kant
14 May 2020 10:00 AM GMT
लॉकडाउन ख़त्म होने के बाद भी नहीं लौटे प्रवासी मज़दूर तो वेतन में होगी कटौती
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राज्य सरकारों को यह डर सता रहा है कि लॉकडाउन खुलने के बाद भी घर जा चुके प्रवासी मज़दूर लौट कर नहीं आएंगे। ऐसे में उनके राज्यों में व्यापार और उद्योग चलाने के लिए बड़ा संकट पैदा हो सकता है...

जनज्वार। लॉकडाउन के दौरान तमाम परेशानियां उठाकर अपने घर पहुंचे प्रवासी मज़दूरों की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। लॉकडाउन ख़त्म होने पर इन्हें एक नयी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। कई राज्य सरकारें अपने राज्य के फैक्ट्री मालिकों को एडवाइज़री जारी कर यह निर्देश देने की तैयारी कर रहीं हैं कि अगर तय समय-सीमा के अंदर कामगार वापिस नहीं लौटते हैं तो उनका वेतन काट लिया जाये और साथ ही दूसरी अनुशासनात्मक कार्यवाई भी की जाएँ।

कोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के अनुसार गुजरात श्रम विभाग के एक उच्च अधिकारी का कहना है कि इस बारे में विभाग के अंदर बातचीत तो चल रही है लेकिन अंतिम फैसला तभी लिया जाएगा जब लॉकडाउन 17 मई से आगे नहीं बढ़ाया जाता है।

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गौरतलब है कि हाल में भाजपा शासित प्रदेशों उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक में संभवतः इसी उद्देश्य के चलते श्रम क़ानूनों को कमज़ोर कर दिया गया है। फैक्ट्री क़ानून को कमजोर कर कामगार को मनमाने ढंग से निकालने और रखने का अधिकार फैक्ट्री मालिक को दे दिया गया है। उत्तर प्रदेश में तो कुछ प्रावधानों को छोड़ कर पूरा का पूरा श्रम क़ानून ही तीन वर्षों के लिए निलंबित कर दिया गया है।

डवाइज़री जारी करने के पीछे मंशा यह बतारयी है कि प्रवासी मज़दूर वापिस अपने पैतृक घरों को ना जाएँ और जो जा चुके हैं वे काम पर लौट आएं। साथ ही इसके द्वारा केंद्र सरकार मज़दूरों में नौकरी खो देने का डर पैदा करने के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित कर लेना चाहती है कि लॉकडाउन खुलने के बाद आर्थिक गतिविधियों को रफ़्तार देने के लिए ज़रूरी श्रम-शक्ति मौजूद हो।

राज्य सरकारों को यह डर सता रहा है कि लॉकडाउन खुलने के बाद भी घर जा चुके प्रवासी मज़दूर लौट कर नहीं आएंगे। ऐसे में उनके राज्यों में व्यापार और उद्योग चलाने के लिए बड़ा संकट पैदा हो सकता है।

मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक एडवाइज़री केंद्र सरकार के स्तर से जारी की जाने की बात सोची जा रही है। इस सन्दर्भ में 8 मई को केंद्रीय श्रम मंत्री संतोष कुमार गंगवार से फैक्ट्री मालिकों के दर्जन भर संगठनों ने मुलाक़ात की थी और उनसे इस तरह की एडवाइज़री जारी करने का अनुरोध किया था।

डवाइज़री जारी करने का यह प्रयोग लॉकडाउन के दौरान गोवा,गुजरात और दूसरे कुछ राज्यों में दूध, सब्ज़ी, फल, अनाज, दवाएं जैसी ज़रूरी सेवाओं के सन्दर्भ में हो चुका है।

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स सम्बन्ध में जारी किया जाने वाला कोई भी निर्देश फैक्ट्री क़ानून के तहत ही लागू होगा। इस क़ानून के तहत हर वो इकाई आती है जो 10 या 10 से ज़्यादा कामगारों को रखती है और उत्पादन के लिए बिजली का इस्तेमाल करती है या 20 और 20 से ज़्यादा कामगारों को रखती है, लेकिन बिजली का इस्तेमाल कर भी सकती है और नहीं भी कर सकती है।

ताया जा रहा है कि जारी किया गया इस तरह का सर्कुलर उस इकाई के सभी कामगारों पर लागू होगा। इनमें वे प्रवासी मज़दूर भी शामिल हैं जो अपने घर लौट चुके हैं और वे भी जो भविष्य की आशंका के चलते लौट जाने का विचार कर रहे हों।

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