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जिन विधायकों को भाजपा ने रखा है छुपाकर गुड़गांव में, उनके पास नहीं है जरूरत का सामान

Janjwar Team
14 March 2020 12:17 PM GMT
जिन विधायकों को भाजपा ने रखा है छुपाकर गुड़गांव में, उनके पास नहीं है जरूरत का सामान
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विधायकों को कई दिन पहले हरियाण के गुड़गांव के होटल में लाया गया था। विधायक तब तक यहां रहेंगे जब तक कि भोपाल में चल रहे सियासी उठा पटक का कोई हल नहीं निकल पाता...

जनज्वार, चंडीगढ़ ब्यूरो। गुड़गांव में होटल में रह रहे मध्य प्रदेश के भाजपा विधायक अब परेशान हो गए हैं। बताया जा रहा है कि विधायक बहुत कम सामान लेकर यहां आए थे। उन्हें यह नहीं बताया गया था कि इतने लंबे दिनों के लिए प्रवास करना होगा। दूसरी समस्या यह है कि उन्हें बाहर के घटनाक्रम से अवगत भी नहीं होने दिया जा रहा है। हरियाणा में भाजपा सरकार होने के बाद भी उन्हें न तो बाहर जाने दिया जा रहा है न ही किसी से मिलने की इजाजत है।

स वजह से विधायक अब उब रहे हैं। उनकी परेशानी यह भी है कि यही पता नहीं चल पा रहा कि अब उन्हें यहां कब तक रहना पड़ सकता है। इन विधायकों को कई दिन पहले हरियाण के गुड़गांव के होटल में लाया गया था। विधायक तब तक यहां रहेंगे जब तक कि भोपाल में चल रहे सियासी उठाक पटक का कोई हल नहीं निकल पाता।

के मोबाइल तक बंद करा दिये गये हैं। इस वजह से वह किसी से बातचीत भी नहीं कर सकते हैं। विधायकों की शिकायत है कि उन्हें रिश्तेदारों और परिजनों से बातचीत नहीं करने दी जा रही है। यदि किसी विधायक को अपने परिजनों से बातचीत करनी है तो इसके लिए वह पहले बताते हैं। किससे बात करनी है। इसके बाद उनकी बातचीत का इंतजाम किया जाता है। इस तरह से देखा जाए तो भाजपा को भी कहीं न कहीं अपने विधायकों पर विश्वास नहीं है।

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हालांकि भाजपा के सीनियर नेता समय समय पर आकर उनके साथ बातचीत कर रहे हैं। इसी क्रम में मध्यप्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष राकेश सिंह और राज्यसभा सदस्य व हरियाणा भाजपा प्रभारी अनिल जैन होटल में आकर विधायकों से बातचीत कर रहे हैं। उनकी कोशिश है कि खाली समय में विधायकों को व्यस्त रखा जा सके।

विधायकों की सुरक्षा के लिए हरियाणा पुलिस बल को तैनात किया गया है। इसके साथ ही बड़ी संख्या में खुफिया विभाग के कर्मचारियों को भी लगा रखा है। स्थिति यह है कि होटल की ओर जाने वाले रास्तों पर नाका लगा दिया गया है। जिससे कोई भी आगे न जाने पाए। यहां तक की मीडिया को इस जोन से दूर रखा गया है। बिना नंबर की गाड़ियों में सुरक्षाकर्मी यहां आते जाते हैं।

सुरक्षा के लेकर कितनी मुस्तैदी बरती जा रही है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सुरक्षाकर्मियों को भी कैदियों को लाने ले जाने वाले वाहन में बिठा कर लाया जा रहा है। जिससे किसी को उनके आने जाने का पता ही न चल सके।

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हां सुरक्षा के लिए ऐसे सुरक्षाकर्मियों को लगाया गया है जिनका व्यवहार एक दम रूखा है। यदि कोई भी उनसे बातचीत करने की कोशिश करें तो एक ही जवाब दिया जाता है कि हम बातचीत नहीं करेंगे। इतना ही नहीं वह बाहर से आने वालो को देखते ही वहां से भगाने की कोशिश में जुट जाते हैं। यदि कोई अपना प्रभाव दिखाने की कोशिश करता है तो उसे धक्के तक देने से पीछे नहीं हट रहे हैं।

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