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नेहरू खानदान को अपना इतिहास स्वयंभू मसीहा से लिखवाना चाहिए!

Prema Negi
13 May 2019 5:57 AM GMT
नेहरू खानदान को अपना इतिहास स्वयंभू मसीहा से लिखवाना चाहिए!
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नेहरु खानदान को जो अपने बारे में जानकारी नहीं है, वह इनके भाषणों से प्रचारित की जाती है। दरअसल, कभी-कभी तो महसूस होता है कि नेहरु खानदान को अपना इतिहास इन्हीं से लिखवाना चाहिए...

महेंद्र पाण्डेय, वरिष्ठ लेखक

मानसिक दिवालियेपन की सबसे बड़ी पहचान है कि वह अपने आपको सर्वज्ञानी समझता है। हरेक विषय का विशेषज्ञ समझता है। सांख्यिकी विशेषज्ञों से अधिक ज्ञानी, अर्थशास्त्रियों से अधिक ज्ञानी, वैज्ञानिकों से अधिक जानकार, सेना के प्रमुखों से बड़ा, पर्यावरणविदों से बड़ा और पूरे देश से भी बड़ा समझने वाला एक मानसिक दिवालिया है जो अपने आप को स्वयंभू मसीहा मानता है।

मसीहा तो हमें भी मानना पड़ेगा, क्योंकि इतने के बाद भी जनता विश्वास कर रही है और उसे भी विश्वास है कि गद्दी तो उसी की है। एक सामान्य आदमी जितने झूठ जिन्दगी भर में बोल पाता होगा, उतने झूठ तो स्वयंभू मसीहा एक दिन में ही बोल जाता है।

दरअसल जब वह बोलना शुरू करता है तब पूरे भाषण में से सच को खोजना पड़ता है, जैसे बादलों के बीच से राडार वायुयान को खोजता है या फिर नहीं खोज पाता। वैज्ञानिकों को भी हैरानी होती होगी कि झूठ बोलने की कोई सीमा है भी या नहीं।

मानसिक दिवालियों की पूरी एक फ़ौज है। अब जब वायु सेना के अधिकारी कुछ नहीं कर पाते तब यह दिवालिया रास्ता दिखाता है, उसी तरह इसकी फ़ौज के पास भी कोई काम नहीं है सिवाय इसके झूठ को और आगे फैलाने का। इसकी फ़ौज के एक सिपाही ने हाल में यही काम किया। एक झूठ जिसे दिवालिया ने हवा में हाथ लहराकर कहा था, उसे इस सिपाही ने आगे बढ़ाया।

कहा, नौसेना के पोत पर जश्न मना था या नहीं इसे उस समय के नौसेना अधिकारी नहीं जानते, लेकिन हम जानते हैं क्योंकि उस समय के अखबारों में यह लिखा था। अब इस सिपाही को कौन समझाये कि यदि अखबार की कतरनें ही इतना सही बोलतीं हैं तो फिर राफेल से सम्बंधित कतरनें क्यों नहीं देखतीं या फिर गोधरा काण्ड के समय की भी कतरनें कभी तो देख कर गलत-सही का पता कर लें।

अभी तो ज्ञान केवल राडार तक ही पहुंचा है, इन्हें अगले पांच साल और दे दीजिये। प्रस्तावित चंद्रयान की कोई पहेली यदि इसरो के वैज्ञानिक नहीं बूझ पाएंगे तो हमारे स्वयंभू इस पहेली को चुटकियों में हल करने की क्षमता रखते हैं। अगली बार तक तो समस्या से पहले ही हल निकल आएगा, आखिर इंटायर पोलिटिकल साइंस जैसे विषय के दुनियाभर में अकेले छात्र जो ठहरे।

नेहरु खानदान को जो अपने बारे में जानकारी नहीं है, वह इनके भाषणों से प्रचारित की जाती है। दरअसल, कभी-कभी तो महसूस होता है कि नेहरु खानदान को अपना इतिहास इन्हीं से लिखवाना चाहिए।

ये महान वैज्ञानिक भी हैं। शंकर जी को भले ही न पता हो कि गणेश जी प्लास्टिक सर्जरी की देन हैं, पर इन्हें यह भी खबर है। डीएनए के बारे में तो ये शक्ल देखकर ही बता देते हैं कि खराब है या अच्छा। जब कोई नेता कोई और दल छोड़कर इनकी शरण में आ जाता है तब ये अपनी रहस्यमयी शक्तियों से उसके खराब डीएनए को अच्छा भी कर देते हैं।

झूठ, फरेब और बंटवारा करने के बाद शासन कैसे चलाना है, यह इनसे सीखा जा सकता है। देश की जनता महान है, झूठ सहने की क्षमता भी अदभुत है। झूठे गढ़े गए नारों जा जयकारा लगाने लगी है। अपने और देश का विकास इसी झूठ में खोजने लगी है। पड़ोस में मरता किसान नहीं दिखाई देता, पर किसानों का स्वयंभू मसीहा दिखता है।

अपने बेरोजगार बच्चे नहीं दिखाते पर मनगढ़ंत रोजगार के आंकड़े दिखाते हैं। नोटबंदी की मार नहीं दिखती, पर इसके झूठे फायदे दिखाते हैं। सीमा पर अपने जवान जो मर रहे हैं नहीं दिखते पर बिना सबूत वाली एयर स्ट्राइक दिखती है। जनता को ही बदलना होगा, नहीं तो मानसिक विकलांग ही हम पर शासन करेंगे और अगले पांच वर्षों में पता नहीं देश का क्या होगा।

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