Top
राजनीति

चीन में हो रहे ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होगा भारत

Janjwar Team
28 Aug 2017 10:12 AM GMT
चीन में हो रहे ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होगा भारत

पिछले वर्ष भारत ने सार्क के बजाय बिम्सटेक देशों के राष्ट्राध्यक्षों को आमंत्रित कर पाकिस्तान को किनारे करने की कोशिश की थी, इस बार चीन कर सकता है ब्रिक्स में पाकिस्तान को आमंत्रित...

बीजिंग से जय प्रकाश पांडे की रिपोर्ट

ब्रिक्स का नौवां शिखर सम्मलेन जब 3 से 5 सितंबर तक चीन के फूचिएन प्रांत के शियामन में हो रहा होगा तो इस पर दुनिया की नजर रहेगी। यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब इस मंच के दो प्रमुख देशों भारत और चीन के रिश्तों में डोकलाम समस्या ने खटास भर दी है। दूसरा डोनाल्ड ट्रम्प के राष्ट्रपति बनने के बाद पश्चिम में संरक्षणवाद के उभार से विकासशील देशों के सामने इससे निपटने की नई चुनौती है।

हालांकि लगता नहीं है कि भारत चीन सीमा विवाद का इस पर कोई खास असर पड़ेगा। वैसे इस बहुप्रतीक्षित सम्मेलन में आर्थिक मुद्दों और व्यापार बढ़ाने को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय हो सकते हैं। इसके अलावा ब्रिक्स के विस्तार पर भी चर्चा हो सकती है क्योंकि चीन पूर्व में ब्रिक्स प्लस का भी प्रस्ताव रख चुका है। वहीं क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता पर भी ब्रिक्स देशों का ध्यान रहेगा।

मई में 'वन बेल्ट वन रोड' फोरम के सफल आयोजन के बाद चीन ब्रिक्स की मेजबानी कर रहा है। चीन की विदेश नीति की प्राथमिकताओं में अपनी क्षेत्रीय नेतृत्व की महत्वाकांक्षाओं को मजबूत करना है। उम्मीद की जाती है कि ब्रिक्स सम्मलेन में चीन इनका भी ख्याल रखेगा। वह पड़ोसी देशों को सम्मेलन में भाग लेने के लिए आमंत्रित करेगा। चीन इसके संकेत भी दे चुका है।

हांलाकि चीन के पास एक और मंच बेल्ट और रोड का है मगर चीन ब्रिक्स को कम अहमियत नहीं दे रहा है। ब्रिक्स देशों के बुद्धिजीवियों और जनता के बीच संवाद बढ़ाने के लिए तैयारियों के मद्देनजर कई कार्यक्रम आयोजित हो चुके हैं। इसी कड़ी में ब्रिक्स खेलों का आयोजन दक्षिण चीन के क्वांगचो में किया गया। शियामन के अलावा देश स्तर में भी सम्मेलन की तैयारी चल रही है। चीन ने ब्रिक्स पर डाक टिकट भी जारी किया है।

इस बार ब्रिक्स सम्मेलन की थीम सुनहरे भविष्य के लिए मजबूत भागेदारी है। सम्मेलन में पांच बिंदुओं पर जोर दिया जाएगा। इसमें वैश्विक शासन, सहयोग को मजबूत करना, व्यापक साझेदारी का निर्माण, संस्थागत सुधार और जनता के बीच आदान प्रदान बढ़ाना शामिल है।

भारत और चीन ब्रिक्स के दो महत्वपूर्ण सदस्य हैं। इन दो पड़ोसियों के बेहतर संबंध इस मंच की सफलता और इसके भविष्य को प्रसस्त करेंगे। इस साल शुरुआत से ही दोनों देशों के बीच कुछ न कुछ विवाद सिर उठाता रहा है।

न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप की सदस्यता और पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद भारत के पुराने मुद्दे हैं। ब्रिक्स के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिंगपिंग की डोकलाम विवाद पर बातचीत हो सकती है। वार्ता के बाद भी इस विवाद पर दोनों देश किसी नतीजे पर पहुंच पाएंगे कहा नहीं जा सकता है। हालिया समस्या के बाद पहले भी मोदी और शी हैम्बर्ग में जी 20 शिखर सम्मेलन में मुलाकात कर चुके हैं।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रो. स्वर्ण सिंह का मानना है कि भारत चीन के बीच विभिन्न मंचों पर हो रही बातचीत से द्विपक्षीय संबंधों में स्थिरता लाने में सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। दोनों देशों के नेताओं, अफसरों और बुद्धिजीवियों की बैठकों में क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा के दौरान अक्सर समान नजरिया देखने को मिलता है।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले हुई 50 बैठकों में विभिन्न स्तरों पर आपसी मनमुटाव के मुद्दों पर बातचीत करने का मौका मिला है। यह वार्ता डोकलाम सेक्टर और लद्दाख सेक्टर में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए उपयोगी हो सकती है। हालांकि ब्रिक्स सम्मेलन में भारत चीन सीमा गतिरोध पर चर्चा की आशा की जाती है। प्रो. सिंह कहते हैं कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की 19वीं पार्टी कांग्रेस होने वाली है। भारत चीनी राष्ट्रपति शी जिंगपिंग की सीमाओं को समझता है कि वे चीन के हितों की मजबूत संरक्षक की अपनी छवि को कमजोर नहीं करना चाहते हैं।

पिछले साल गोवा में हुए ब्रिक्स सम्मेलन में भारत ने आतंकवाद का मुद्दा मजबूती से उठाया था। यह सम्मेलन उरी आतंकी हमले के महीने भर बाद हुआ था। भारत ने इस हमले के लिए पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद को जिम्मेदार ठहराया था। पाकिस्तान को कूटनीतिक तौर पर अलग.थलग करने के लिए अभियान भी चलाया था।

ब्रिक्स सम्मेलन में भारत को इस मसले पर एकराय बनाने में कामयाबी भी मिली थी। ब्रिक्स सम्मेलन के घोषणा पत्र में आतंकवाद की कड़े शब्दों में निंदा की गई थी। इसके अलावा भारत ने सार्क के बजाय बिम्सटेक देशों के राष्ट्राध्यक्षों को आमंत्रित कर पाकिस्तान को किनारे करने की कोशिश की। जानकारों का कहना है कि इस बार चीन पाकिस्तान को भी आमंत्रित कर सकता है।

ब्रिक्स दुनिया की उभरती हुई अर्थव्यवस्था वाले देशों का मंच है। विश्व की आबादी की 40 प्रतिशत आबादी इन देशों में रहती है। 2016 में ब्रिक्स देशों की जीडीपी लगभग 16.55 अरब डॉलर थी । रेटिंग एजेंसी एस एंड पी ग्लोबल रेटिंग्स ने ब्रिक्स देशों में बेहतर आर्थिक विकास की उम्मीद जताई है। उसका मानना है कि ब्राजील और रूस मंदी के दौर से उबरने की स्थिति में हैं। भारत और दक्षिण अफ्रीका के 2016 के प्रदर्शन में सुधार आएगा, हालांकि चीन के उच्च विकास में थोड़ा गिरावट आ सकती है।

मौजूदा अंतरराष्ट्रीय मंचों में ब्रिक्स के पास दुनिया के विकास में सहभागिता बढ़ाने की क्षमता है। 2000 के वैश्विक वित्तीय संकट के समय बना जी 20 अपनी प्रसांगिकता खो रहा है। इसकी बैठकों में द्विपक्षीय और त्रिपक्षीय प्रारूपों में गिरावट आ रही है। पश्चिमी देश अपने संकट और अंतर्विरोधों में उलझे हैं। पूर्व में पश्चिमी देशों का बाकी दुनिया के देशों के साथ संघर्ष था आज पश्चिमी देशों में खुद के बीच तनाव है।

नाटो शिखर सम्मेलन और जी 7 की बैठक में अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच गंभीर मतभेद सामने आए थे। ये मुद्दे जलवायु परिवर्तन के पेरिस समझौते से अमेरिका के बाहर आने और नाटो के सदस्यों के सैन्य खर्च चुकाने को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सख्त रवैये को लेकर थे। ऐसे दौर में ब्रिक्स की भूमिका बढ़ जाती है।

ब्रिक्स में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। ब्रिक्स का पहला सम्मेलन रूस के येकेटेरिनबर्ग में 2009 में हुआ था। दक्षिण अफ्रीका इस मंच में 2010 में शामिल हुआ। पिछले साल ब्रिक्स का आठवां सम्मेलन गोवा में हुआ था। उम्मीद की जानी चाहिए कि शियामन सम्मेलन से उभरती अर्थव्यवस्थाएं दुनिया को एक महत्वपूर्ण संदेश देंगी।

Next Story

विविध

Share it