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सोनभद्र के पत्थर खदान में बड़ा हादसा, एक मजदूर की मौत और कई घायल

Nirmal kant
29 Feb 2020 8:50 AM GMT
सोनभद्र के पत्थर खदान में बड़ा हादसा, एक मजदूर की मौत और कई घायल
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एनडीआरएफ की टीम ने एक मजदूर का शव निकाला है जिसकी पहचान की जा चुकी है। रेस्क्यू ऑपरेशन रात से लगातार चल रहा है। तीन पोकलेन मशीन मलबा हटाने के काम मे लगी है। मलबे में और मजदूरों के दबे होने की आशंका को देखते हुए रेस्क्यू अभियान जारी है..

सोनभद्र से पवन जायसवाल की रिपोर्ट

जनज्वार। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के बिल्ली- मारकुंडी खनन क्षेत्र में शुक्रवार 28 फरवरी को एक पत्थर खदान धसने से एक मज़दूर की मौत हो गई जबकि कई मजदूर घायल हो गए। इस घटना के बाद जिले में हड़कंप मच गया। पत्थर में होल करने के दौरान यह घटना घटी। इस घटना में दो मजदूर गम्भीर अवस्था में शुक्रवार को ही बाहर निकाले लिए गए जबकि कई संख्या में मज़दूर खादान में फंसे हुए थे।

हीं वाराणसी से देर रात खदान में दबे मजदूरों के रेस्क्यू के लिए घटनास्थल पर एनडीआरएफ की टीम पहुंची। एनडीआरएफ की टीम ने एक मजदूर का शव निकाला है जिसकी पहचान की जा चुकी है। रेस्क्यू ऑपरेशन रात से लगातार चल रहा है। तीन पोकलेन मशीन मलबा हटाने के काम मे लगी है। मलबे में और मजदूरों के दबे होने की आशंका को देखते हुए रेस्क्यू अभियान जारी है।

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सोनभद्र के पुलिस अधीक्षक आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि जैसे ही हमें घटना की जानकारी हुई फौरन मौके पर पहुंचकर पुलिस द्वारा राहत बचाव कार्य जारी किया गया। शुक्रवार देर शाम ही दो घायलों को निकाल दिया गया था अभी उनकी स्थिति सही है। 4-5 मजदूर खदान में दबे हुए हैं उस संबंध में रातभर बचाव कार्य किया गया। एनडीआरएफ की टीम मौके पर आ गई है। एनडीआरएफ की टीम के साथ प्रशासन और स्थानीय लोग मिलकर काम कर रहे हैं।

न्होंने बताया कि शनिवार की सुबह एक मजदूर का शव मलबे से मिला, उसकी पहचान हो चुकी है। अभी भी हमारी टीम और एनडीआरएप के टीम बचाव कार्य में लगी हुई हैं। मलबे में दबे लोगों की खोजबीन जारी है। कोशिश करेंगे कि अगर कोई अंदर है तो उसे निकाल लिया जाए।

हादसे में घायल मजदूर

हीं सोनभद्र के जिलाधिकारी यस राज लिंगम ने कहा कि शुक्रवार 28 फरवरी को हुई घटना के बाद 2 मज़दूरों को तत्काल निकाला गया, जो कि गंभीर अवस्था मे थे। उन्हें प्राथमिक इलाज़ के बाद लोढ़ी जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया है। जिलाधिकारी ने बताया कि शासन-प्रशासन की मौजूदगी में राहत एवं बचाव का कार्य चल रहा है। मशीनों से मलबा हटा कर मजदूरों को निकालने का प्रयास किया जा रहा है। जब तक रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा नहीं हो जाता तब तक आला अधिकारी मौके पर मौजूद रहेंगे। हमारी तरफ से भी लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।

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स्थानीय लोगों की माने तो खदान में हादसे की मुख्य वजह खनन नीति को ताक पर रखकर खनन कार्य बताया जा रहा है। आए दिन खदान में हादसा होता रहता है। कुछ की खबर लोगों को पता चल जाती है। कुछ हादसों की खबर को दबा दिया जाता है। 28 फरवरी 2012 में भी शारदा मन्दिर के पास पत्थर खदान धसने की घटना घटित हुई थी, उस दौरान घटना मे 10 से अधिक मजदूरों की हुई मौत हो गई थी।

के ठेकेदार खदानों मे काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा का पालन नही करते हैं। प्रशासन भी खदानों मे काम करने वालो की सुरक्षा की सुध नहीं लेता। अब जो भी हो सभी की लापरवाही से गरीब मजदूरों को अपनी जान गवानी पड़ती है।

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