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झारखंड

Lockdown: भूख और बीमारी से जूझ रहे रांची के परवेज की अहमदाबाद में मौत

Manish Kumar
25 April 2020 9:27 AM GMT
Lockdown: भूख और बीमारी से जूझ रहे रांची के परवेज की अहमदाबाद में मौत
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मदद की गुहार लगाते परवेज का एक वीडियो पिछले दिनों वायरल हुआ था जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका...

राहुल सिंह की रिपोर्ट

रांची, जनज्वार: रांची के इटकी के परवेज अंसारी नाम के एक युवक की गुरुवार 23 अप्रैल की रात को भूख व टीबी बीमारी से अहमदाबाद में मौत हो गयी. वह पिछले साल ईद का त्यौहार मना कर रांची से अहमदाबाद गया था. एक महीने के लॉकडाउन में उसकी हालत बिगड़ गई.

हाल ही में उसका एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वह कहता दिख रहा था कि उसकी हालत बहुत खराब हो गई है, उसे घर पहुंचा दिया जाए. इस वीडियो में परवेजय यह भी कह रहा था कि वह अहमदाबाद के रबानी कॉलोनी में है. वीडियो से यह साफ होता है कि मजदूरी करने वाले इस व्यक्ति के पास खाने-पीने की चीजें नहीं थीं. उसके पास पैसे नहीं थे.

परवेज वीडियो में बहुत कमजोर दिख रहा था और रुक रुक कर बोल रहा था.

एक एनजीओ से जुड़े व्यक्ति ने परवेज का यह वीडियो बनाया गया था और इसे संबंधित लोगों के पास भेजा व वायरल किया, जिसके बाद उसका मामला सबके सामने आया.

वीडियो में परवेज इतना कमजोर व लाचार दिख रहा था कि छोटी-छोटी पंक्ति बोलेने के बाद रुक रहा था और साथ के लोग उसे अपनी परेशानी बताने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. वह बैठे-बैठे ही अपनी बात कहता हुआ वीडियो में दिख रहा है.

वीडियो के जरिए उसका मामला संज्ञान में आने के बाद उसे सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन परवेज को बचाया नहीं जा सका और गुरुवार को उसकी मौत हो गई. इंडियन एक्सप्रेस की अहमदाबाद से लिखी गयी खबर के अनुसार, डॉक्टरों ने बताया कि 23 अप्रैल की रात में टीबी से उसकी मौत हो गई.

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इस मामले में सिविल अस्पताल के डॉ जीतू पारिख ने कहा कि मरीज टीबी से पीड़ित था, उसकी ओर से यहां कोई मौजूद नहीं था. उसका कोविड-19 टेस्ट निगेटिव आया था, शव का पोस्टमार्टम कराया गया है ताकि उसकी मौत के वास्तविक कारणों का पता लगे, रिपोर्ट का इंतजार है.

परवेज के भाई तौहीद अंसारी ने कहा है कि अगर उसका भाई रांची में होता तो बच जाता है. उनके अनुसार, अस्पताल में भर्ती कराए जाने के समय परवेज से उनकी 20 सकेंड की बात हुई थी, परवेज की हालत खराब थी और वह बोलने में असमर्थ था. परवेज के परिवार में उसके अलावा उसकी मां व एक भाई व एक बहन हैं. उसके पिता आजम अंसारी का निधन हो चुका है और उसकी मां आमना खातून उसकी मौत के बाद बदहवास हैं.

परवेज की मां

उसके गांव के एमएम राही ने जनज्वार को बताया कि उसने पिछले पांच दिनों से खाना नहीं खाया था. वह अकेले ही वहां रह रहा था. कुछ स्थानीय लोगों ने उसे कुछ खाने को दिया था, लेकिन उसके साथ दिक्कतें काफी अधिक थीं. उसकी तबीयत बिगड़ने के बाद फोन पर अहमदाबाद से लोगों ने संपर्क किया. पर लॉकडाउन की वजह से एक गरीब परिवार के लिए उसके पास पहुंचना असंभव सा था.

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इस मामले के सामने आने के बाद झारखंड सरकार के वरिष्ठ मंत्री आलमगीर आलम ने मुख्य सचिव को पत्र लिख कर पीड़ित की आवश्यक मदद करने को कहा था. इसके बाद मुख्य सचिव के ओएसडी भोर सिंह यादव ने अहमदाबाद प्रशासन से संपर्क कर उसे मदद पहुंचाने व उसका इलाज कराने की पहल की. इलाज के दौरान ही उसकी कोरोना जांच करायी गयी जो निगेटिव आयी. पर, भूख व अन्य बीमारियों की वजह से उसकी हालत बिगड़ती गयी और गुरुवार रात उसकी मौत हो गयी. इसके बाद स्थानीय प्रशासन के लोग उसके घर पहुंचे और सारी जानकारी ली.

मंत्री आलमगीर आलम द्वारा मुख्य सचिव को लिखा गया पत्र

मौत के बाद अंतिम संस्कार से पहले उसके शव को अस्पताल प्रशासन एक सप्ताह के लिए रखने को तैयार था, लेकिन उसके एक तो उसके परिवार की माली हालत बहुत खराब है और उस पर लॉकडाउन है. इन हालात में उनके लिए प्रशासन से विशेष पास लेकर जाना भी बेहद खर्चिला होता. ऐसे में मौत के बाद एनजीओ चांदनी फाउंडेशन की मदद से उसके मिट्टी की रस्म पूरी की गयी. वीडियो कॉल के जरिए उसके परिवार के सदस्यों ने उसके मिट्टी की रस्म देखी.

उसकी मिट्टी की रस्म पूरी कराने वाले चांदनी फाउंडेशन के चांदनी निबहनानी ने कहा कि हमने कुछ वालंटियर को जमा किया और इस्लामिक परंपरा के अनुसार उसके मिट्टी की रस्म पूरी की. उन्होंने कहा कि हमने वीडियो कॉल के जरिए इस रस्म को उसके परिवार को दिखाया.

परवेज के भाई तौहिद अंसारी ने 24 अप्रैल को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को इस संबंध में विस्तृत पत्र लिखा. पत्र में सरकार से आवश्यक मदद की गुहार तो लगायी ही गयी है, साथ ही विस्तार से यह बताया गया कि लाॅकडाउन में भूख की वजह से उसकी स्थिति बिगड़ती गयी और आखिरकार मौत हो गयी. पत्र में यह भी कहा गया है कि उसका अस्पताल में अच्छे से इलाज नहीं किया जा रहा था और उसे खाने-पीने को भी अच्छे से नहीं मिला रहा था. भाई ने पत्र में इस बात का भी उल्लेख किया कि उसे कोरोना नहीं था.

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