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विमर्श

पत्र पॉलिटिक्स में मोदी सरकार पर भारी पड़ती कांग्रेस, चुप्पी कहीं भारी न पड़ जाये

Prema Negi
26 April 2020 4:22 PM GMT
पत्र पॉलिटिक्स में मोदी सरकार पर भारी पड़ती कांग्रेस, चुप्पी कहीं भारी न पड़ जाये
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लॉकडाउन में सभी कामकाज ठप हो जाने के कारण हर रोज हो रहा है भारी नुकसान, करोड़ों-करोड़ युवाओं के रोजगार पर भी मंडरा रहा है खतरा

जेपी सिंह का विश्लेषण

जनज्वार। एक और देश की पहले से डूब रही अर्थव्यवस्था,नगदी संकट से आकंठ तक डूबी मोदी सरकार कोरोना संकट से निपटने के लिए चारों तरफ हाथ पांव मार रही है, वहीं कांग्रेस कोविड-19 संक्रमण को रोकने में सरकार को पूरा सहयोग देने की प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए ऐसे महत्वपूर्ण सुझाव दे रही है, जो सरकार के परेशानी का सबब बनता जा रहा है।

रकार इन सुझावों को माने तो क्रेडिट कांग्रेस को भी मिलेगी और न माने तो कोई वैकल्पिक योजना भी सामने नहीं ला पा रही है। ऐसे में कोरोना संकट में घिरी मोदी सरकार कांग्रेस को माकूल जवाब नहीं दे पा रही है।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रधानंमत्री नरेंद्र मोदी को कोविड-19 संक्रमण को रोकने के संदर्भ में लिखे अपने दूसरे पत्र में सरकार को पांच सुझाव दिए हैं। यह सुझाव देने से पहले कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस की कोर टीम ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) से जुड़े करीब 5000 लोगों से चर्चा की है।

प्रधानमंत्री को लिखे दूसरे पत्र में कांग्रेस अध्यक्ष ने उनका ध्यान इस क्षेत्र की तरफ आकर्षित कराया है। उनसे क्षेत्र को आर्थिक राहत पैकेज देने, करीब 11 करोड़ युवाओं के रोजगार पर मंडरा रहे खतरे को दूर करने की सलाह दी है।कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने पत्र में लिखा है कि देश की जीडीपी में सूक्ष्म, लघु, मझोले उद्योगों (एमएसएमई) का योगदान एक तिहाई है।

देश से किए जाने वाले निर्यात में एमएसएमई का योगदान आधा रहता है, लेकिन लॉकडाउन के बाद से इस क्षेत्र को भारी नुकसान हुआ है। सभी कामकाज ठप हो जाने के कारण हर रोज यह क्षेत्र करीब 30 हजार करोड़ रुपये का भारी—भरकम नुकसान झेल रहा है। इसके कारण 6.3 करोड़ एमएसएमई इकाइयों से 11 करोड़ युवाओं के रोजगार पर खतरा मंडरा रहा है।

त्र में कहा गया है कि एमएसएमई सेक्टर के लिए एक लाख करोड़ रुपये के वेतन रक्षा पैकेज (वेज प्रोटेक्शन) की घोषणा की जाए। इससे लोगों की नौकरी पर मंडराता खतरा और क्षेत्र का आर्थिक संकट दूर किया जा सकेगा। इससे मनोबल बढ़ाने में मदद मिलेगी।एक लाख करोड़ रुपये के क्रेडिट गारंटी फंड का गठन किया जाए। इससे एमएसएमई को काम करने के लिए पूंजी मिल जाएगी और अर्थव्यवस्था में तरलता आएगी।

त्र में कहा गया है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने कदम उठाए हैं/घोषणा की है। इसका असर जमीन पर कमर्शियल बैंकों के कामकाज में दिखाई दे ताकि एमएसएमई को यथाशीघ्र आसान दरों पर कर्ज आदि मिल सके। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति और सरकार के समर्थन को देखते हुए वित्त मंत्रालय में एक 24 घंटे सक्रिय रहने वाली हेल्प लाइन सेवा इसमें काफी कारगर होगी।

रिजर्व बैंक ने लोन मोरेटोरियम की घोषणा की है। लोन भुगतान के क्रम में इसका एमएसएमई इकाइयों के लिए तीन माह से अधिक का विस्तार किया जाए। एमएसएमई को टैक्स में छूट देनी चाहिए। एमएसएमई के लिए गारंटी सुरक्षा को आसान बनाया जाए, ताकि उन्हें आसानी से कर्ज मिल सके। मार्जिन मनी की सीमा को भी घटाया जाए, ताकि इस क्षेत्र को कर्ज मिलने में आसानी हो।

न्होंने इसके पहले लिखे पत्र में प्रधानमंत्री को सुझाव दिया था कि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्रियों और नौकरशाहों के विदेश दौरों को स्थगित करने और सरकारी विज्ञापनों पर भी रोक लगाने की जरुरत है। सोनिया ने सांसदों के वेतन में 30 फीसदी की कटौती का समर्थन करते हुए कहा कि 'पीएम केयर्स' कोष की राशि को भी प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में हस्तातंरित किया जाए।

र्थिक संकट से उबारने के लिए मुख्य रूप से खर्चों में कटौती करना, 20,000 करोड़ रुपये की लागत से बनाए जा रहे ‘सेंट्रल विस्टा’ ब्यूटीफिकेशन एवं कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट को स्थगित किया जाना, भारत सरकार के खर्चे के बजट (वेतन, पेंशन एवं सेंट्रल सेक्टर की योजनाओं को छोड़कर) में भी इसी अनुपात में 30 प्रतिशत की कटौती किया जाना शामिल है। यह राशि लगभग 2.5 लाख करोड़ सालाना प्रवासी मजदूरों, श्रमिकों, किसानों, एमएसएमई एवं असंगठित क्षेत्र में काम करने वालों को आवंटित की जाए।

ह भी सुझाव था कि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों, राज्य के मंत्रियों तथा नौकरशाहों द्वारा की जाने वाली सभी विदेश यात्राओं को स्थगित किया जाए। केवल देशहित के लिए की जाने वाली आपातकालीन एवं अत्यधिक आवश्यक विदेश यात्राओं को ही प्रधानमंत्री द्वारा अनुमति दी जाए।पीएम केयर्स’ फंड की संपूर्ण राशि को ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत फंड’ (पीएम-एनआरएफ) में स्थानांतरित किया जाए। इससे इस राशि के आवंटन एवं खर्चे में एफिशियंसी, पारदर्शिता, जिम्मेदारी तथा ऑडिट सुनिश्चित हो पाएगा।

सोनिया गांधी ने यह सुझाव भी दिया था कि प्रिंट, इलैक्ट्रॉनिक एवं सोशल मीडिया को सरकारी विज्ञापन अगले 2 सालों तक के लिए रोक देने चाहिए। इस कदम से 1,250 करोड़ रुपए बचेंगे। सोनिया ने 20,000 करोड़ रुपए के सैंट्रल विस्टा प्लान को भी रोकने की मांग की।

स बीच राहुल गांधी ने ट्वीट करके मोदी सरकार की दुखती रग पर हाथ रख दिया है।राहुल गांधी ने अपने ट्वीट में लिखा, ‘लाखों करोड़ की बुलेट ट्रेन परियोजना और केंद्रीय विस्टा सौंदर्यीकरण परियोजना को निलंबित करने की बजाय कोरोना से जूझ कर जनता की सेवा कर रहे केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशन भोगियों और देश के जवानों का महंगाई भत्ता काटना सरकार का असंवेदनशील तथा अमानवीय निर्णय है।‘

रअसल, केंद्र सरकार ने जिस कटौती का ऐलान किया है, उससे करीब सरकारी खजाने में सवा लाख करोड़ रुपये की बचत होगी। कोरोना वायरस की वजह से पैदा हुए संकट के बीच सरकार इसे बड़ा कदम बता रही है। बीते मार्च महीने में मोदी सरकार ने केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनभोगी के लिए महंगाई भत्ते में 4 फीसदी का इजाफा कर दिया।

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