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पंजाबी गायिका अफसाना खान के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की मांग

Janjwar Team
8 March 2020 11:26 AM GMT
पंजाबी गायिका अफसाना खान के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की मांग
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पंजाब व हरियाणा उच्च न्यायालय ने भी गीतों में नशा व हिंसा को बढ़ावा देने वाले शब्दों पर रोक लगाने का आदेश दे रखा है। इस संबंध में कोर्ट ने डीजीपी को आदेश दिए थे कि यदि कोई गायक अपने गीत के माध्यम से इस तरह की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ तुरंत एक्शन लिया जाना चाहिए..

जनज्वार ब्यूरो। पंजाबी गायकों का अपने गीतों में हिंसा को महिमामंडन करने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक और पंजाबी गायिका अफसाना खान ने इसी साल एक गाना गाया 'जिसके बो है, पुलिस डरदी, उस यार नाल तेरी यारी' पंजाब व हरियाणा उच्च न्यायालय के एडवोकेट एचसी अरोड़ा ने बताया कि इस गीत के बोल गैंगस्टर कल्चर को महिमामंडन कर रहे हैं। उन्होंने डीजीपी पंजाब को पत्र लिखकर गायिका के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की है।

चसी अरोड़ा ने बताया कि पंजाबी गायकों की यह आदत अभी भी नहीं सुधर रही है। वह अपने गीतों में इस तरह के शब्दों का प्रयोग करते हैं जो हिंसा और नशे को बढ़ावा देने वाले हैं। पहले ही पंजाब के हालात खराब हो रहे हैं। यहां का युवा नशे की गिरफ्त में तेजी से आ रहा है। युवा वर्ग इन गायकों को अपना आदर्श मानता है इसलिए वह इनके बहकावे में आ जाता है।

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ससे पहले गायक मूसेवाला के खिलाफ भी एचसी अरोड़ा ने गीतों में हिंसा को बढ़ावा देने का मामला दर्ज कराया था। इसके बाद मूसेवाल ने माफी मांगी थी। इतना ही नहीं गायक ने अकाल तख्त पर पेश होकर भी माफी मांगी थी। इसके बाद यह विवाद तो खत्म हो गया था। लेकिन अब अफसाना ने नया विवाद खड़ा कर दिया है।

ह गीत युवाओं में खासा लोकप्रिय भी हो रहा है। अरोड़ा ने मांग है कि इस गीत पर भी तुरंत ही रोक लगनी चाहिए। उन्होंने बताया कि यदि जल्दी ही इस पर ठोस कार्यवाही नहीं होती तो दूसरे गायकों का भी हौंसला बढ़ता है। वह भी अपने गीतों में इस तरह के शब्दों का प्रयोग करते हैं।

पंजाब व हरियाणा उच्च न्यायालय ने भी लगा रखी है रोक

पंजाब व हरियाणा उच्च न्यायालय ने भी गीतों में नशा व हिंसा को बढ़ावा देने वाले शब्दों पर रोक लगाने का आदेश दे रखा है। इस संबंध में कोर्ट ने डीजीपी पंजाब व हरियाणा को आदेश दिए थे कि यदि कोई गायक अपने गीत के माध्यम से इस तरह की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ तुरंत एक्शन लिया जाना चाहिए। इसके बाद भी गायक इस तरह के गीतों का प्रयोग कर रहे हैं।

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आखिर कुछ तो जिम्मेदारी निभानी चाहिए

चसी अरोड़ा ने बताया कि गायकों की भी समाज के प्रति जिम्मेदारी बनती है। क्या वह समाज को खराब करना चाहते हैं। उनकी कोशिश तो होनी चाहिए कि वह सामाजिक बुराईयों को खत्म करने की दिशा में काम करें। यहां तो उलटा हो रहा है, वह अपने गीतों से सामाजिक बुराईयों को ही बढ़ावा दे रहे हैं। यह गलत है। इसे किसी भी तरह से बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

न्होंने बताया कि गायकों की इसी आदत की वजह से एक पीआईएल कोर्ट में लगायी थी। इसके बाद ही कोर्ट ने यह आदेश दिया था। अब भी यदि गायक नहीं मान रहे हैं तो निश्चित ही पुलिस को उनके खिलाफ कार्यवाही करनी चाहिए।

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