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आरएसएस के स्कूल में शिक्षिका से बनवाते थे खाना, कराते सफाई का काम

Janjwar Team
9 Nov 2017 5:11 PM GMT
आरएसएस के स्कूल में शिक्षिका से बनवाते थे खाना, कराते सफाई का काम

अनुराधा शहर के अपने घर से स्कूल पढ़ाने आती थीं, लेकिन प्रधानाचार्य अनिल पांडेय कभी उनको सफाई के काम में लगा देते तो किसी अन्य काम में। रोजमर्रा पढ़ाने के काम में बाधा पहुंचती देख अनुराधा साथी शिक्षकों से अपना दुख साझा करतीं, लेकिन साथी शिक्षक उसे अनसुना कर देते...

अजय पांडेय की रिपोर्ट

महिला अधिकारों व 'बेटी पढ़ाओ व बेटी बचाओ' के तरफदार हमारे प्रधानमंत्री मोदी केंद्र में सत्तासीन हैं और उत्तर प्रदेश में भी भाजपा की ही सरकार है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से ही भाजपा का जन्म हुआ है, मगर आरएसएस के स्कूलों में ही महिला अधिकारों की खुलेआम धज्जियां उड़ रही हैं, मगर प्रबंधन चुप्पी साधे बैठा है। उत्तर प्रदेश के देवरिया में योगी राज में एक महिला टीचर का प्रधानाचार्य तरह—तरह से उत्पीड़न करता रहा, मगर प्रबंधन चुप्पी साधे बैठा रहा।

अनुराधा (बदला हुआ नाम) बहुत संघर्ष करके शिक्षक बनी थीं। इससे पहले कई स्कूलों में पढ़ाने के बाद उन्हें राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) के स्कूल सरस्वती शिशु मंदिर में पढ़ाने का अवसर मिला था। वह बहुत खुश थीं। उन्हें लगता था कि जीवन की कठिनाई के दिन अब दूर हो जाएंगे।

आरएसएस के स्कूलों की चकाचौंध अनुराधा के नजरों में बसी थी। अनुराधा ने बाकायदा प्रांतीय स्तर पर प्रशिक्षण प्राप्त कर देवरिया के अंसारी मार्ग के सरस्वती शिशु मंदिर में शिक्षक की जिम्मेदारी संभाल ली। लेकिन अनुराधा नहीं जानती थीं कि उनकी मुश्किलें कम नहीं होंगी, बल्कि बढ़ जाएंगी।

अनुराधा ने सुल्तानपुर में प्रशिक्षण के बाद अंसारी मार्ग देवरिया के सरस्वती शिशु मंदिर में 9 अप्रैल 2016 को शिक्षक का कार्यभार संभाला। वह नर्सरी, एलकेजी व यूकेजी में अपनी सेवाएं दे रही थीं, मगर आए दिन शिशु मंदिर के प्रधानाचार्य अनिल पांडेय उनके सामने नई मुसीबतें खड़ी करते थे।

अनुराधा शहर के अपने घर से स्कूल पढ़ाने आती थीं, लेकिन प्रधानाचार्य अनिल पांडेय कभी उनको सफाई के काम में लगा देते तो किसी अन्य काम में। रोजमर्रा पढ़ाने के काम में बाधा पहुंचती देख अनुराधा साथी शिक्षकों से अपना दुख साझा करतीं, लेकिन साथी शिक्षक उसे अनसुना कर देते। आरएसएस का स्कूल होने के नाते प्रधानाचार्य का भय दूसरे शिक्षकों पर पूरी तरह से हावी दिखाई देता था। इसकी पुष्टि तब भी हुई, जब यह रिपोर्टर स्कूल खबर के सिलसिले में पहुंचा।

अनुराधा के लिए स्थिति उस दिन सबसे ज्यादा अजीब हो गई जब प्रधानाचार्य अनिल पांडेय ने अनुराधा को खाना बनाने व सब्जी काटने जैसे काम रोज कहने लगे। काफी जद्दोजहद कर शिक्षक बनने की ख्वाहिश अब अनुराधा पर भारी पड़ने लगी। इस मामले में प्रबंधन से अनुराधा ने शिकायत की, मगर कोई सुनवाई नहीं हुई। प्रबंधन को दिए पत्र में अनुराधा ने लिखा कि शिक्षक का काम बच्चों को पढ़ाना होता है, लेकिन प्रिंसिपल हमें अनाप-शनाप कार्य सौंप देते थे। प्रिंसिपल हम सभी शिक्षकों से झूठ बोलवाते थे। विद्या मंदिर के खुले होने के बावजूद भी सरस्वती शिशु मंदिर, अंसारी मार्ग को बंद करा देते थे।

प्रबंधन को लिखे पत्र में शिक्षिका ने बताया कि प्रिंसिपल द्वारा मेरी छवि को धूमिल करने का प्रयास किया गया। प्रधानाचार्य परेशान करने से बाज नहीं आते थे और कहते थे कि जब हम नहीं चाहेंगे तब तक किसी का कोई कार्य नहीं होगा। महोदय मैंने कई बार दूसरी शाखा में तबादले के लिए कहा, लेकिन प्रधानाचार्य चाल चलते रहे।

दूसरी तरफ स्कूल की हालत यह है कि सरस्वती शिशु मंदिर अंसारी मार्ग पर 200 बच्चों के लिए सिर्फ दो चपरासी (सफाईकर्मी) हैं। ऐसे में नर्सरी का एक बच्चा टॉयलेट करता है तो दूसरा पूरे कामों के लिए मौजूद। स्कूल की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। हालांकि सरस्वती शिशु मंदिर अंसारी मार्ग में सभी शिक्षिकाओं के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार होता है, लेकिन कोई इसके खिलाफ शिकायत नहीं करता।

अनुराधा चाहती है कि उन्हें ससम्मान नौकरी वापस मिले, चाहे फिर इसके लिए उसे कितनी भी लड़ाई क्यों न लड़नी पड़े।

इस मामले में प्रधाचार्य अनिल पांडेय से बात की गई तो वह पूरे मामले को नकारते और झुठलाते रहे, मगर अनुराधा मामले में किसी भी सवाल का जवाब देने को तैयार नहीं हुए। स्कूल प्रबंधन भी इस मामले में चुप्पी साधकर बैठा हुआ है। प्रबंधन में शामिल राजेश गोयल, जयेश बरनवाल व प्रेमशीला शुक्ला इस संबंध में कुछ भी कहने से इनकार किया।

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