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राजनीति

समाजवादी पार्टी ने उन्नाव रेप पीड़िता और वकील को दी 16 लाख की मदद

Prema Negi
3 Aug 2019 4:03 AM GMT
समाजवादी पार्टी ने उन्नाव रेप पीड़िता और वकील को दी 16 लाख की मदद
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उन्नाव रेप पीड़िता के वकील ने उत्तर प्रदेश प्रशासन को 15 जुलाई को खत लिखकर 'तुरंत' उसे हथियार के लिए लाइसेंस देने की की थी अपील, साथ ही उन्नाव जिला मजिस्ट्रेट को लिखे खत में वकील ने आशंका जताई थी खुद और रेप पीड़िता की हत्या की क्योंकि उन्हें लगातार मिल रही थीं धमकियां....

जेपी सिंह की रिपोर्ट

न्नाव रेप केस मामले में उच्चतम न्यायालय के आदेश पर पीड़िता और पीड़िता के वकील महेंद्र सिंह के परिवार को सीआरपीएफ की सुरक्षा मुहैया कराई गई है तथा लखनऊ के ट्रामा सेंटर के बाहर सीआरपीएफ के जवानों की तैनाती की गई है।

क ओर जहां पीड़िता को उच्चतम न्यायालय के आदेश पर 25 लाख की अंतरिम सहायता उत्तरप्रदेश सरकार ने दे दी है, वहीं पीड़िता के गंभीर रूप से घायल वकील को अभी तक न तो राज्य सरकार ने न ही बार काउन्सिल ऑफ़ उत्तर प्रदेश या बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया से कोई आर्थिक सहायता मिली है। वकील के परिजनों की मानें तो सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद पहले दो दिन उन्हें अपने पैसे से इलाज कराना पड़ा। बाद में जब यह घटना मीडिया की सुर्खियां बनी, तब से राज्य सरकार इलाज करा रही है।

न्नाव रेप केस में उच्चतम न्यायालय के आदेश पर पीड़िता और वकील के परिवार को सीआरपीएफ की सुरक्षा मिल गई है। लखनऊ के ट्रामा सेंटर के बाहर सीआरपीएफ के जवान पहुंच गए हैं। यहीं पर पीड़िता के परिवार के बाकी सदस्य भी मौजूद हैं। इसके अलावा पीड़िता के वकील महेंद्र सिंह के घर के बाहर भी सीआरपीएफ के जवान पहुंच गए हैं।

सीआरपीएफ के जवानों के साथ उन्नाव पुलिस का एक सिपाही भी मौजूद है। पीड़िता के एक अन्य वकील अजेन्द्र अवस्थी को भी जिला प्रशासन ने पर्याप्त सुरक्षा मुहैया करायी है। अवस्थी ने रविवार 28 जुलाई की दुर्घटना के परिप्रेक्ष्य में सुरक्षा का आग्रह किया था।

गुरुवार 1 अगस्त को उन्नाव रेप मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि पीड़ित परिवार की सुरक्षा सीआरपीएफ बरेली की टीम करेगी। साथ ही पीड़िता के वकील को भी सीआरपीएफ की सुरक्षा दी जाएगी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सीआरपीएफ रिपोर्ट सौंपेगी।

त्तर प्रदेश बार काउन्सिल के पूर्व अध्यक्ष अमरेंद्र सिंह ने प्रदेश सरकार से तत्काल 25 लाख रुपये की सहायता देने की मांग की है और कहा है कि कौंसिल अधिकतम 10 हजार की सहायता ही दे सकती है। काउन्सिल के अध्यक्ष हरि शंकर सिंह ने बताया की पूर्ववर्ती सरकार पर 40 करोड़ तथा वर्त्तमान सरकार पर भी 40 करोड़ बकाया है, इस वजह से काउन्सिल पिछले तीन साल से बीमार वकीलों की मदद नहीं कर पा रही है।1200 प्रार्थनापत्र काउन्सिल में लंबित हैं।

रायबरेली एक्सीडेंट मामले में उन्नाव रेप पीड़िता के साथ घायल हुए अधिवक्ता महेन्द्र सिंह को भी आर्थिक मदद दिये जाने की मांग उठने लगी है। इस संबंध में अवध बार एसोसिएशन की ओर से मुख्यमंत्री को एक पत्र भी भेजा गया है, जिसमें अधिवक्ता व उनके परिवार को 25 लाख रुपये की सहायता राशि दिये जाने की मांग की गई है।

वध बार एसोसिएशन के अध्यक्ष आनंद मणि त्रिपाठी ने उक्त पत्र में लिखा है कि महेन्द्र सिंह इस समय ट्रामा सेंटर में जिंदगी और मौत से संघर्ष कर रहे हैं। उनका परिवार संकट में है। पत्र में कहा गया है कि रेप पीड़िता को प्रदेश सरकार ने 25 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की है, जबकि अधिवक्ता के परिवार को कोई सहायता राशि प्रदान नहीं की गई है। पत्र में मांग की गई है कि अधिवक्ता व उनके परिवार को कम से कम 25 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाए व उन्हें उचित इलाज दिलाया जाना सुनिश्चित किया जाए।

स बीच समाजवादी पार्टी की तरफ से दुष्कर्म पीड़िता के परिजनों को 16 लाख रुपये की मदद दी गई है। सपा के प्रतिनिधिमंडल ने पीड़िता के परिवार को 10 लाख रुपये और घायल वकील के परिवार को पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी। इसके अलावा एक लाख रुपये पार्टी फंड से दिया गया है। परिजनों को सपा प्रतिनिधि मंडल में शामिल मधु गुप्ता, जूही सिंह, जरीना उस्मानी व आईपी सिंह ने चेक सौंपा।

क अन्य सूचना के अनुसार उन्नाव रेप पीड़िता के वकील ने उत्तर प्रदेश प्रशासन को खत लिखकर 'तुरंत' हथियार के लिए लाइसेंस देने के लिए कहा था। यह खत 15 जुलाई को लिखा गया था। उन्नाव जिला मजिस्ट्रेट को लिखे खत में वकील ने कहा था कि मुझे डर है कि मुझे मारा जा सकता है।

क सप्ताह बाद ही पीड़िता और वकील दोनों एक कार से जा रहे थे, तभी उनकी कार को रायबरेली के पास एक ट्रक ने टक्कर मार दी। हादसे में दोनों गंभीर रूप से जख्मी हो गए, जबकि पीड़िता की दो रिश्तेदारों और ड्राइवर की मौत हो गई। खत में पीड़िता के वकील ने कहा था कि सितंबर 2018 में हथियार के लाइसेंस के लिए आवेदन किया था, लेकिन आज तक योगी सरकार के दबाव में जारी नहीं किया गया। उसे आशंका है कि उसकी हत्या भी की जा सकती है।

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