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नागरिकता संशोधन कानून (CAA) पर मोदी सरकार के 7 सबसे बड़े झूठ

Nirmal kant
10 Jan 2020 2:32 AM GMT
नागरिकता संशोधन कानून (CAA) पर मोदी सरकार के 7 सबसे बड़े झूठ
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नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के समर्थन देशभर में रैलियों का आयोजन कर एक पर्चा बांटा जा रहा है। इस पर्चे के माध्यम से भाजपा द्वारा झूठ और सिर्फ झूठ को प्रचारित कर जनता को गुमराह किया जा रहा है। इस पर्चें में भाजपा ने 7 झूठ कहे हैं, आप भी पढ़िये क्या हैं भाजपा के वे 7 झूठ...

मुनीष कुमार, स्वतंत्र पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के समर्थन देश भर में रैलियों का आयोजन कर एक पर्चा बांटा जा रहा है। इस पर्चे के माध्यम से भाजपा द्वारा झूठ और सिर्फ झूठ को प्रचारित कर जनता को गुमराह किया जा रहा है। इस पर्चें में भाजपा ने 7 झूठ कहे हैं।

झूठ नं. 1

इस कानून से पड़ोसी... भारत की नागरिकता ले सकेंगे।

नागरिकता कानून में जो संशोधन किया गया है, उसमें 31 दिसम्बर 2014 से पहले आए हिन्दू, सिख, पारसी जैन, बौद्ध व इसाइयों को नागरिकता देने की बात कही गयी है, परन्तु धार्मिक उत्पीड़न का CAA में कहीं भी उल्लेख नहीं है। इस तरह पर्चे में कही गयी धार्मिक उत्पीड़न की बात झूठ साबित हो रही है। इसके लिए मूल कानून को देखा जा सकता है।

CAA जैसा कानून केवल भारत में ही लाया गया है। पाकिस्तान, अफगानिस्तान व बांग्लादेश के नागरिकता कानूनों में किसी भी व्यक्ति को धर्म के अनुसार नागरिकता से वंचित करने का प्रावधान नहीं है।

संबंधित खबर : सिर्फ मुसलमानों को ही नहीं हिंदुओं की भी NPR-NCR से है नागरिकता खतरे में

झूठ नं. 2

पाकिस्तान, बांग्लादेश...दायरे से बाहर रखा गया है।

पाकिस्तान व अफगानिस्तान ने ही स्वयं को संविधानिक तौर पर मुस्लिम राष्ट्र घोषित किया है। बांग्लादेश का संविधान बांग्लादेश को धर्मनिरपेक्ष देश घोषित करता है। कट्टरपंथी केवल अल्पसंख्यकों पर ही जुल्म नहीं करते हैं, बल्कि उन वहुसंख्यकों पर भी जुल्म करते हैं जो कट्टरपंथी ताकतों का विरोध करते हैं।

भारत में केवल अल्पसंख्यक मुसलमान, सिख व इसाईयों पर ही हमले नहीं हुए हैं बल्कि उन हिन्दुओं को भी निशाना बनाया जा रहा है जो संघ परिवार के द्वारा किए गये धार्मिक उत्पीड़न के खिलाफ बोल रहे हैं। यही हाल पाकिस्तान बांग्लादेश व अफगानिस्तान में कट्टरपंथ के खिलाफ बोल रहे लिबरल व डेमोक्रेट मुसलमानों का भी है। वहां के कट्टरपंथी लिबरल व डेमोक्रेट मुसलमानों को किसी भी कीमत पर बर्दास्त करने को तैयार नहीं हैं। तस्लीमा नसरीन को मुस्लिम होने के बावजूद भी कट्टरपंथियों के कारण बांग्लादेश छोड़ना पड़ा है।

झूठ नं. 3

इस कानून की जरूरत...2019 लाया गया है।

अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा व सम्मान में पाकिस्तान ही नहीं, भारत भी फेल रहा है। देश न तो 1984 के सिख विरोधी दंगे भूला है और न ही उड़ीसा में ग्राहम स्टेन्स व उसके बच्चों को जिन्दा जला देने की घटना। देश के लोगों को 2002 के गुजरात दंगे व माब लिंचिंग में अल्पसंख्यकों को मार देने की घटनाएं अभी भी याद हैं।

भाजपा तमाम झूठों के साथ CAA-NRC पर प्रचारित-प्रसारित कर रही है यह पर्चा

1947 में जब देश का बंटवारा हुआ तब कोई जनगणना नहीं हुयी थी। जनगणना 1941 में हुयी थी। 1947 में बंटवारे के समय 47 लाख से अधिक हिन्दू पाकिस्तान से भारत आए थे। तथा 65 लाख मुसलमान भारत छोड़कर पाकिस्तान चले गये थे। इस दौरान हिन्दुओं और मुसलमानों का भारी कत्लेआम भी हुआ था। भारतीय पंजाब में मुस्लिमों की संख्या 1941 में जो 32.3 प्रतिशत थी वह 1947 के भारत-पाक बंटवारे के बाद 1951 में घटकर 0.8 प्रतिशत यानी कि 1 प्रतिशत से भी कम रह गयी। इस सबके कारण 1951 की जनगणना में पश्चिमी पाकिस्तान (वर्तमान पाकिस्तान) में हिन्दुओं की संख्या घटकर 1.6 प्रतिशत रह गयी थी। पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) में यह जनसंख्या 22.5 प्रतिशत थी। अतः भाजपा सरकार द्वारा हिन्दुओं की जनसंख्या को लेकर कही गयी बात झूठी है।

नं. 4

इन देशों में बीते... ठोस दस्तावेज मिल सकेगा।

2011 की जनगणना के अनुसार देश में कुल विदेशी शरणार्थियों की संख्या 55 लाख दर्ज की गयी है। इन सभी को जाति, धर्म, लिंग, भाषा, संस्कृति से ऊपर उठकर नागरिकता मिलनी चाहिए। जहां तक शिक्षा, स्वास्थ्य व मूलभूत सुविधाओं का सवाल है तो सरकार बताए कि देश के चन्द लोगों को छोड़कर, कितने लोगों को मूलभूत सुविधाएं मिल रही हैं।

दूर की बात क्या करें रामनगर विधानसभा क्षेत्र में 2 दर्जन से अधिक गांव ऐसे हैं, जो कि वन गांव घोषित किए जाने के कारण बिजली, पानी, सड़क व ग्राम प्रधान चुनने व चुने जाने के बुनियादी अधिकार से वंचित हैं। देश की मोदी सरकार बताने का कष्ट करेगी कि देश में सभी को समान शिक्षा, इलाज व राजेगार का अधिकार देकर देशवासियों के मानवाधिकारों की रक्षा का उसके पास क्या कार्यक्रम है।

जिस देश में लाखों लोग भूख और इलाज न मिल पाने के कारण दम तोड़ देते हैं, उस देश की सरकार द्वारा विदेशी शरणार्थियों के मानवाधिकार का मुद्दा उठाना जनता को गुमराह करने से ज्यादा कुछ नहीं है।

झूठ नं. 5

विपक्षी पार्टियां... डरने की जरूरत नहीं है।

NRC देश में आकर रहेगी, ये बयान विपक्ष ने नहीं बल्कि देश के गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में दिसम्बर माह में दिया था। सरकार देश में आसाम को छोड़कर राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर NPR बनाने की कवायद जो आगामी 1 अप्रैल से सितम्बर अंत तक चलाने वाली है। वह पिछले दरवाजे से लायी जा रही NRC ही है। सरकारी गणनाकार घर-घर आकर जो डाटा एकत्र करेंगे, बाद में उसका सत्यापन किया जाना है। जिस व्यक्ति के डाटा में कोई गलती रह गयी तो उसकी नागरिकता खतरे में पड़ जाएगी।चाहे वह हिन्दू हो या मुसलमान। साथ में दिया गया लिंक जरुर देख लीजिए।

नं. 6

नागरिकता कानून बनाकर...आधार पर सोचते हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2014 में हर वर्ष 2 करोड़ लोगों को रोजगार का वचन दिया था, इसके तहत अब तक 12 करोड़ लोगों को रोजगार दिया जाना चाहिए था। उन्होंने यह भी वचन दिया था कि प्रधानमंत्री बनने के बाद हर देशवासी के खाते में 15-15 लाख रुपये विदेशों से काला धन लाकर डाले जाएंगे। क्या हुआ मोदी जी के इन वचनों का। सही बात तो यह है कि मोदी सरकार इन वचनों से जनता ध्यान भटकाने के लिए CAA लेकर आयी है।

झूठ न. 7

जब विपक्ष जनता... का पर्दाफाश करें।

इस कानून का विरोध विपक्ष नहीं देश की जनता कर रही है। CAA देश के संविधान की प्रस्तावना में दर्ज धर्म निरपेक्षता के सिद्धांत व संविधान के अनुच्छेद 14 में दर्ज कानून के समक्ष समानता के अधिकार का उल्लंघन है।

इस बात के पक्षधर नहीं हैं कि जिन शरणार्थियों को नागरिकता दी जा रही है, उन्हें नागरिकता से वंचित कर दिया जाए। देश के लोग चाहते हैं कि CAA को लाकर जिस तरह से देश में फूट डाली जा रही है उसे बंद किया जाना चाहिए। नागरिकता संशोधन कानून में हिन्दू, सिख, पारसी जैन, बौद्ध व इसाइयों के साथ मुसलमानों व अन्य लोगों को भी देश की नागरिकता दी जानी चाहिए।

मोदी सरकार और उसके लगुए-भगुए पर्चे के रुप में झूठ का पुलिन्दा बांटकर जनता को गुमराह करने की घृणित राजनीति कर रहे हैं।

(मुनीष कुमार समाजवादी लोक मंच के संयोजक हैं।)

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