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शिक्षा

पिथौरागढ़ में शिक्षकों और किताबों के लिए छात्र 21 दिन से आंदोलनरत और भाजपा-कांग्रेस शराब फैक्टरी विवाद में व्यस्त

Prema Negi
10 July 2019 5:26 PM GMT
पिथौरागढ़ में शिक्षकों और किताबों के लिए छात्र 21 दिन से आंदोलनरत और भाजपा-कांग्रेस शराब फैक्टरी विवाद में व्यस्त
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पिथौरागढ़ महाविद्यालय में पुस्तकों और अध्यापकों की कमी को दूर करने को लेकर यहां के छात्र पिछले 21 दिन से आंदोलन कर रहे हैं, मगर सत्तासीन भाजपा और विश्वविद्यालय प्रशासन के कान में नहीं रेंग रही जूं...

जनज्वार। एक तरफ मोदी सरकार नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2019 का ड्राफ्ट लेकर आयी है, जिसे लागू कर दिये जाने की पूरी संभावना है। इसे तरह-तरह से छात्रों का हितैषी बताकर प्रचारित किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ इसी देश के पहाड़ी राज्य उत्तराखण्ड में बच्चे किताबों और शिक्षकों की मांग को लेकर पिछले 21 दिन से आंदोलनरत हैं।

हां छात्र ​शिक्षकों और किताबों के लिए आंदोलन कर रहे हैं, वहीं सत्तासीन भाजपा और विपक्षी कांग्रेस में शराब फैक्टरी पर संग्राम मचा हुआ है। देवप्रयाग के पास शराब बॉटलिंग प्लांट लगाया जा रहा है, जिसे लेकर सत्तासीन भाजपा और कांग्रेस के बीच संग्राम मचा है।

गौरतलब है कि उत्तराखण्ड के कुमाऊं मंडल के दूसरे सबसे बड़े महाविद्यालय पिथौरागढ़ के लक्ष्मण सिंह महर राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में पुस्तकों और अध्यापकों की कमी को दूर करने को लेकर यहां के छात्र पिछले 21 दिन से आंदोलन कर रहे हैं, मगर सत्तासीन भाजपा और विश्वविद्यालय प्रशासन के कान में जूं नहीं रेंग रही। अब छात्रों के साथ उनके अभिभावक भी आंदोलन का हिस्सा बन गये हैं। सोशल मीडिया पर भी इस आंदोलन को व्यापक समर्थन मिल रहा है।

छात्रों के साथ उनके अभिभावक भी आंदोलन का हिस्सा

ह आंदोलन छात्रसंघ अध्यक्ष राकेश जोशी के नेतृत्व में अनवरत चल रहा है। 21 दिन से छात्रों की जायज मांगों पर सरकारी की तरफ से कोई सकारात्मक कार्रवाई न किया जाना और विश्वविद्यालय प्रशासन की चुप्पी दर्शाती है कि छात्रों के लिए किताबों और शिक्षकों का न होना उनके लिए कोई मायने नहीं रखता।

आंदोलनरत छात्रों का कहना है कि उन्हें महाविद्यालय लाइब्रेरी में चार दशक पुरानी किताबें पढ़ने के लिए दी जा रही हैं और वे भी पर्याप्त संख्या में नहीं हैं। शासन—प्रशासन के उपेक्षित रवैये के कारण ही यहां के युवा उच्च शिक्षा के लिए पलायन कर रहे हैं, मगर जो गरीब छात्र हैं, उनकी मजबूरी यहीं रहकर पढ़ाई करना है।

ब छात्रों का यह आंदोलन व्यापक रूप में फैलता जा रहा है। पिथौरागढ़ के लक्ष्मण सिंह महर राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के छात्र परीक्षाओं में भी आंदोलनरत हैं और बारिश का भी उन पर कोई असर नहीं पड़ रहा। आंदोलनरत छात्रों की मांग है कि जब तक सरकार हमारी मांगें नहीं मान लेती हम आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे।

राज्य और केंद्र दोनों में सत्तासीन भाजपा नेता कॉलेजों में शौर्य दीवार बनवाने, कन्वोकेशन के लिए नई ड्रेस तैयार करवाने, सभी कॉलेजों में झंडा फहरवाने जैसे कामों में पूरी ऊर्जा लगाते हैं और उच्च शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धन सिंह ऐसे कार्यक्रमों में बढ़—चढ़कर हिस्सेदारी करते हैं, मगर लगता है उन्हें छात्रों की आवाज से ज्यादा शराब पर मची रार में दिलचस्पी है। यह हाल तब है ज​बकि राष्ट्रीय मीडिया ने भी इस मुद्दे को पर्याप्त स्पेस दिया है।

7000 से भी ज़्यादा छात्र संख्या वाले पिथौरागढ़ महाविद्यालय में स्थानीय छात्रों के अलावा बड़ी संख्या में नेपाल और पड़ोसी जिलों के छात्र भी पढ़ते हैं। छात्र आंदोलन के समर्थन में उतरे राजकीय महाविद्यालय पिथौरागढ़ के पूर्व छात्र और सिने अभिनेता हेमंत पांडेय कहते हैं, 2019 में महाविद्यालय के छात्रों को बीती शताब्दी की किताबें पढ़ाना दुर्भाग्यपूर्ण है। महाविद्यालय में पढ़ने वाले सीमांत जिले के अधिकांश युवा कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि से आते हैं, जिनके लिए महंगी किताबें खरीद पाना संभव नहीं है। विद्यार्थियों को नई और पर्याप्त किताबें उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। शिक्षा ही बेहतर नहीं होगी तो राजकाज भी सही नहीं चलेगा। मुख्यमंत्री और कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति को छात्रों की मांगें पूरी करने के लिए जल्दी से कदम उठाने चाहिए।

त्तराखंड में इतने बड़े स्तर पर छात्र आंदोलन के इतर सत्तासीन भाजपा और विपक्षी पार्टी कांग्रेस देवप्रयाग शराब बॉटलिंग प्लांट की राजनीति में व्यस्त हैं। दोनों एक दूसरे पर शराब प्लांट को लेकर आरोप—प्रत्यारोप लगा रहे हैं। जहां पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत कह रहे हैं कि 'हमारी कांग्रेस सरकार ने उत्तराखंड में फ्रूट वाइनरी बनाने के लिए पहल की थी, लेकिन इस सरकार ने व्हिस्की बनाने का ठेका ही दे दिया है। पहाड़ के ‘बी’ और ‘सी’ कैटेगरी के फलों को उचित बाजार दिलाने को फ्रूट वाइनरी का विचार लागू किया गया था। इसके तहत देवप्रयाग और भीमताल में लाइसेंस भी दिए गए, मगर विरोध होने पर इसे रोक भी दिया गया था। हमने देवप्रयाग को कुंभ क्षेत्र में शामिल करवाया था, मगर धर्म की स्वयभूं रक्षक भाजपा सरकार ने वहां शराब बनाने की अनुमति दे दी।'

हीं सत्तासीन भाजपा का कहना है कि पहले हरीश रावत अपनी याददाश्त को दुरस्त करें और फिर मीडिया को कोई बयान दें। भाजपा अपने बचाव में कह रही है कि शराब के जिस देवप्रयाग प्लांट को लेकर हरीश रावत सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं, उसकी मंजूरी खुद पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने दिसंबर, 2016 में दी थी। भाजपा ने इस प्रोजेक्ट को सिर्फ आगे बढ़ाया है और स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार दिलाया है।

भाजपा के मुताबिक पूर्व में आबकारी नियमों में यह व्यवस्था थी कि शराब बॉटलिंग प्लांट की मंजूरी पर आवेदक को 5 साल में इसे स्थापित करना होगा। अक्तूबर, 2016 में हरीश सरकार ने पहाड़ में बॉटलिंग प्लांट की बाध्यकारी शर्तों को हटा दिया था और कहा कि आवेदक अपने ब्रांड की बॉटलिंग भी कर सकता है। अब जब बॉटलिंग प्लांट का निर्माण पूरा हुआ तो भाजपा सरकार ने इसकी इजाजत दी है। हरीश सरकार ने तो अपने कार्यकाल में मंडी परिषद को एफएल-टू का लाइसेंस दे दिया था और उस समय मंडी परिषद वाइनरी लगाने के लिए प्रति पेटी शुल्क भी वसूला करती थी।

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