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संस्कृति

नहीं रहे तारक मेहता के डॉ. हाथी, सदमे में टीवी जगत

Prema Negi
9 July 2018 1:04 PM GMT
नहीं रहे तारक मेहता के डॉ. हाथी, सदमे में टीवी जगत
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साथी कलाकारों ने कहा यकीन नहीं हो रहा कि ए​क हंसता—खेलता इंसान नहीं रहा अब हमारे बीच...

जनज्वार। ख्यात टीवी शो 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' में डॉक्टर हंसराज हाथी का रोल न‍िभाने वाले एक्टर कव‍ि कुमार आजाद का आज हार्ट अटैक के कारण अचानक न‍िधन हो गया। उन्हें इलाज के लिए महाराष्ट्र के मीरा रोड वॉकहार्ट हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, वहीं उनका ​हार्टअटैक से निधन हो गया।

घर घर में डॉ. हाथी के नाम से जाने जाने वाली कवि कुमार आजाद लंबे वक्त से 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' का हिस्सा थे। उनकी अचानक इस तरह हुई मौत से टीवी जगत अवाक रह गया है। 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' के कलाकार तो उनकी मौत पर सहसा यकीन ही नहीं कर पा रहे हैं।

मीडिया से डॉ. हाथी की मौत की खबर साझा करते हुए शो के निर्माता असित मोदी कहते हैं, कवि कुमार आजाद कमाल के एक्टर थे और बहुत ही सकारात्मक इंसान थे। उन्हें शो से बहुत ज्यादा प्यार था। बीमार होने के बावजूद वे शूटिंग पर आते। आज सुबह भी उनका फोन आया था कि उनकी तबियत ठीक नहीं है और वे शूटिंग पर नहीं आ पाएंगे, मगर उनके फोन के थोड़ी देर बाद ही यह बुरी खबर आई कि दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। यह खबर हमारे लिए शॉकिंग हैं, हम विश्वास नहीं कर पा रहे कि जो शख्स थोड़ी देर पहले तक फोन पर मौजूद था वह अब इस दुनिया में नहीं रहा। 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' की पूरी टीम कवि कुमार आजाद की मौत से सकते में है।

मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक कवि कुमार आजाद ने 2010 में अपना 80 किलो वजन सर्जरी से कम किया था। इस सर्जरी के बाद उन्हें रोजाना की ज‍िंदगी में काफी आसानी हो गई थी। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा भी था कि मुझे खुशी है कि लोगों ने मुझे मेरे किरदार के लिए पसंद किया। जानकारी के मुताबिक मौत के वक्त भी कवि कुमार आजाद का वजन तकरीबन 215 किलो था।

डॉक्टरों के मुताबिक अन्य वजहों के अलावा इतना ज्यादा वजन भी उनकी मौत का एक बड़ा कारण बना।

मूल रूप से बिहार के सासाराम के रहने वाले कवि कुमार बचपन से एक्टर बनना चाहते थे। उन्हें कविताएं लिखने का बहुत शौक था, लेकिन उनके घर वाले उनके एक्टर बनने के खिलाफ थे। अपने सपने को पूरा करने के लिए वो घर से भागकर मुंबई आ गए थे और लंबे संघर्ष के बाद 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' के जरिए एक पहचान कायम की थी।

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