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तरुण सागर की वीभत्स अंतिम यात्रा, इस अंधविश्वास की हो रही चौतरफा आलोचना

Prema Negi
2 Sep 2018 7:33 AM GMT
तरुण सागर की वीभत्स अंतिम यात्रा, इस अंधविश्वास की हो रही चौतरफा आलोचना
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19 साल की उम्र से दुनिया को कड़वे प्रवचन देने वाले तरुण मुनि सागर के प्रवचनों का असर इतना रहा कि उनके मरने के बाद उनके चेले—चपाटों और जैन धर्मावलंबियों ने उनकी लाश की भी बोली करोड़ों में लगाई...

19 साल की उम्र से दुनिया को कड़वे प्रवचन देने वाले तरुण मुनि सागर के प्रवचनों का असर इतना रहा कि उनके मरने के बाद उनके चेले—चपाटों और जैन धर्मावलंबियों ने उनकी लाश की भी बोली करोड़ों में लगाई...

जनज्वार। कड़वे वचन फेम जैन मुनि तरुण सागर का कल निधन हो गया। 51 वर्षीय तरुण सागर ने दिल्ली में शाहदरा के कृष्णा नगर इलाके में अंतिम सांस ली। मगर मौत के बाद उनके अंतिम संस्कार को धर्म—आस्था का जिस तरह से व्यापार बनाया गया और आस्तिकता के नाम पर उनके शरीर को रस्सियों से बांध जबरन पदमासन में बिठाए हुए यात्रा निकाली गई, वह दृश्य विचलित कर देता है।

गौरतलब है कि तरुण सागर पीलिया से पीड़ित थे और दिल्ली के एक प्राइवेट अस्पताल से अपना इलाज करवा रहे थे। मौत से पहले उनका पूरा शरीर पीला पड़ चुका था। ​मीडिया में आई खबरों के मुताबिक वे संथारा प्रथा का पालन कर रहे थे और उन्होंने दवाइयां लेने से इंकार कर दिया था। यानी जबरन मौत के मुंह में गए या फिर धकेले गए।

संथारा से जबरन मौत की तरफ जाना तो जैन धर्म का मोक्ष से जुड़ा मामला है, मगर मौत के बाद उनकी शवयात्रा में जिस तरह से उनका शरीर पदमासन में जबरन रस्सियों से बांधकर रखा गया था वह धर्म के पाखंडियों की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा, हिंसक और इंसानियत को भी शर्मसार करने वाला था। एक मुनि जिसके बारे में कहा जाता था कि वह अपने कड़वे वचनों से अंधविश्वास को दूर करने का काम कर रहा था उसकी मौत से लेकर अंतिम क्रिया तक बहुत बड़ा पाखंड और अंधविश्वास बनकर रह गई।

19 साल की उम्र से दुनिया को कड़वे प्रवचन देने वाले तरुण मुनि सागर के प्रवचनों का असर इतना रहा कि उनके मरने के बाद उनके चेले—चपाटों और धर्मावलंबियों ने उनकी लाश की भी बोली करोड़ों में लगाई, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। उनकी अंतिम यात्रा का चित्र शेयर करते हुए आस्तिक और नास्तिक दोनों थू—थू कर रहे हैं।

तरुण सागर की अंतिम यात्रा का चित्र साझा करते हुए वरिष्ठ लेखक अनिल जनविजय लिखते हैं, तरुण सागर को निर्वाण के बाद करुण सागर बना दिया इन मूर्ख पाखण्डियों ने।

वहीं समीर सलिल लिखते हैं, 'अगर लोग इसे ही आस्था कहते हैं तो मैं नास्तिक ही सही!श्रद्धेय तरुण सागर जी महाराज जी के मृत शरीर के साथ ऐसा बर्ताव देखकर मन विचलित हो गया। प्रभु ने आपको संत तो बना दिया पर संस्कारियों ने भक्ति नहीं सीखी। हे ईश्वर सद्बुद्धि दे।'

वरिष्ठ पत्रकार अनिल जैन लिखते हैं, 'श्रद्धा का अंधत्व? देह की लाचारी-बेबसी! सच में मुनिधर्म की परम्परा का निर्वहन कितना कठिन होता है? दिवंगत जैन मुनि के पार्थिव शरीर के साथ इस तरह का क्रूर और हिंसक सुलूक करने वाले 'श्रद्धालुओं' को क्या सभ्य कहा जा सकता है?'

लेखक सचिन कुमार जैन तरुण सागर के मृत शरीर का चित्र साझा करते हुए लिखते हैं, 'जो व्यक्ति समाज का नेत्र खुलवा रहा था, जो अहिंसा की बात कर रहा था, उसके साथ समाज ने अमानवीय और हिंसक व्यवहार किया। वो पता नहीं किस मुक्ति की बात करते रहे कि उनके अनुयायी समाज ने उन्हें ही बंदी बना दिया। जरा विचार कीजिये इस चित्र को देखकर बच्चों के मन में क्या भाव आएंगे? मैं अपने समाज के इस तरह के व्यवहार और इस तरह की कट्टर परंपराओं के पक्ष में नहीं हूँ। उनके अंतिम संस्कार से जुड़ी प्रक्रियाओं के लिए करोड़ों रुपये की बोलियां लगाई गयीं, यह तो जैन धर्म का सिद्धांत नहीं है, फिर हम ऐसा कर क्यों रहे हैं? अपने धर्म को बचाइए, इसे खत्म किया जा रहा है।'

वहीं तारा शंकर सोशल मीडिया पर लिखते हैं, 'मुनि का दिगंबर (नंगा रहना) होना उनकी धार्मिक और व्यक्तिगत स्वतंत्रता है! उसका पूरा सम्मान करता हूँ लेकिन चित्र में जैन अनुयायी तरुण सागर के शव को बाँधकर सार्वजानिक तौर पर भरे बाज़ार घुमा रहे हैं! ये उनके आइडेंटिटी क्राइसिस का प्रमाण है, दिखावा है, मुनि के लिए मरणोपरांत अपमानजनक है और दुखद है।'

डॉ. प्रकाश हिंदुस्तानी तो धर्म के इस नंगेपन को और नंगा करते हुए खुलासा करते हैं, 'तरुण सागर के अंतिम संस्कार देने की बोली ₹ 1 करोड़ 94 लाख लगाई गई। अन्य बोली में -चादर की बोली 52,94000, मुहपति की बोली 21,94,194, बांया कंधा आगे वाला लगाने की बोली 32,00,000, सीधा कंधा आगे वाला लगाने की बोली 21,21,111, बांया कंधा पीछे वाला 22,00,000, सीधा कंधा पीछे वाला 22,00,000, गुलाल उछाल की बोली 41,00,000, सिक्के उछाल की बोली सोना चांदी आदि 21,00,000 और अग्नि संस्कार देने की बोली 1 करोड़ 94 लाख।'

जितेंद्र कुमार ने कटाक्ष किया है, 'धर्म के इस वीभत्स प्रदर्शन को देखें। किसी संत की शवयात्रा कहीं ऐसे निकाली जाती है? जैन मुनि तरुण सागर के पूर्व किस जैन मुनि की शवयात्रा इस तरह निकाली गई?'

अरविंद कुमार कहते हैं, 'यह कैसा अभद्र तरीक़ा है - मुनि तरुण सागर की शवयात्रा का।'

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