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प्रोफेसर दिलीप मंडल के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के 23 छात्र निष्कासित

Nirmal kant
18 Dec 2019 8:11 AM GMT
प्रोफेसर दिलीप मंडल के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के 23 छात्र निष्कासित
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माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के 23 छात्र निष्कासित, जांच कमेटी की रिपोर्ट के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने दिया निष्कासन का आदेश, प्रोफेसर दिलीप मंडल और प्रोफेसर मुकेश कुमार के खिलाफ किया था प्रदर्शन, विश्वविद्यालय में हुई थी तोड़फोड़...

जनज्वार, भोपाल। माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार और प्रोफेसर दिलीप सी मंडल और प्रोफेसर मुकेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले 23 छात्रों को यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा जांच कमेटी की रिपोर्ट के बाद यूनिवर्सिटी से निष्कासित करने का आदेश जारी कर दिया गया जिन्हें आगामी प्रायोगिक परीक्षाएं और सेमेस्टर एग्जाम से भी बाहर किया गया है।

विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से 23 छात्रों को लिए यह आदेश जारी किया गया है कि वह अपने विभाग के विभागाध्यक्ष को यह लिखित में दें कि मैं इस ग्रुप में शामिल था और इसके लिए मैं माफी मांगता हूं, उस आधार पर उन्हें परीक्षा में बैठने दिया जाएगा और उनका निष्कासन निरस्त कर दिया जाएगा।

23 निष्कासित छात्रों में से एक छात्रा विधि सिंह ने पत्रकारिता विभाग से लिखित में माफीनामा दिया है, जिसके आधार पर उनका निष्कासन निरस्त कर दिया गया है। इसके साथ ही पत्रकारिता विभाग ने अपने विद्यार्थियों के प्रायोगिक परीक्षाओं की तारीख को आगे बढ़ा दी गई है।

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छात्र विपिन तिवारी कहते हैं कि यूनिवर्सिटी का यह बहुत अन्यायपूर्ण रवैया है। हम अपनी बातों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। शांतिपूर्ण यूनिवर्सिटी में आ जा भी रहे थे लेकिन कल शाम अचानक हम 23 छात्रों को निष्कासित कर दिया क्या हम सब सदमे में हैं, हमने रात को खाना तक नहीं खाया। आज मेरी प्रायोगिक परीक्षा है। यूनिवर्सिटी का यह हिटलरशाही फारमान है। आज 3:00 बजे हम मुख्यमंत्री से मिलने जाएंगे।

विश्वविद्यालय के कुलसचिव का कहना है कमेटी की अनुशंसा के आधार पर ही कार्यवाही की गई है। इसका मतलब यह नहीं है कि वह विश्वविद्यालय के किसी भी गतिविधि में शामिल नहीं हो सकते हैं। हम छात्रों का पक्ष सुनने के लिए तैयार हैं, छात्र हित के लिए आगे आ सकते हैं।

10 छात्रों पर हो चुकी है FIR

छात्र अर्पित शर्मा, अभिलाष ठाकुर, प्रखरादित्य द्विवेदी, सौरभ कुमार, रवि रंजन, अंकित शर्मा, सुरेंद्र चौधरी, अर्पित दुबे, सौरभ कुमार राघवेंद्र सिंह और आशीष भार्गव पर आईपीसी की धारा 353, 341, 147, 427 के तहत मुकदमा दर्ज हैं।

हीं इस पूरे मसले मसले पर प्रोफेसर दिलीप सी मंडल का कहना है माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय से 23 विद्यार्थियों के निष्कासन का फैसला वहां की हिंसा के कारण किया गया। मेरे लिए सुखद है कि मेरे विभाग का कोई विद्यार्थी इस लिस्ट में नहीं है। मैं निवेदन करता हूं कि ये फैसला सहानुभूति के आधार पर रद्द हो। ये बच्चे आरएसएस की साजिश के शिकार हो गए हैं।

दिलीप मंडल ने आगे कहा कि उन मासूम विद्यार्थियों का कोई दोष नहीं है। उन्हें एक साजिश के तहत उकसाया गया है। हिंसा उन्होंने उकसावे में आकर की है। आखिर वे मेरे ही विद्यार्थी हैं। मैं नहीं चाहता कि संघी साजिश की वजह से उनका करियर खराब हो।

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट में लिखा, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के छात्रों को जायज मांग उठाने पर निष्काषित कर दिया गया है। यह बच्चों की आवाज को दबाने और लोकतंत्र को कुचलने का प्रयास है, छात्रों को निष्कासित कर उनके भविष्य को तबाह करने के इस षड्यंत्र हम कामयाब नहीं होने देंगे। मेरी मांग है कि माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के सभी विद्यार्थियों की जायज मांग मानी जाए और उनका निष्कासन तुरंत वापस लिया जाए।

नेता प्रतिपक्ष भोग गोपाल भार्गव ने कहा, 'माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय द्वारा छात्रों पर कार्यवाही निंदनीय और दमनकारी है। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की पढ़ाई करने वाले इन बच्चों पर की गई कार्रवाई तानाशाही पूर्ण है। क्या कमलनाथ की सरकार के 1 साल पूरा होने का यही तोहफा है? एमसीयू प्रशासन तुरंत इन छात्रों का निष्कासन समाप्त करें।'

रिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल ने सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर सिलसिलेवार कई पोस्ट की हैं। एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, ' विद्यार्थियों के साथ मेरा रिश्ता ज्ञान का है। मैं माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल के निमंत्रण पर वहां पढ़ाता हूं। जिन 500 से ज्यादा विद्यार्थियों को हमने PTC, MOJO, ब्लॉगिंग सिखायी है और जिन्हें आगे एंकरिंग और टीवी रिपोर्टिंग सिखानी है, देश-दुनिया की जानकारियां देनी हैं, अगर वे लिखकर दे दें कि वे मुझसे नहीं पढ़ना चाहते तो मैं वहां नहीं पढ़ाऊंगा।

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न्होंने आगे लिखा, 'यूनिवर्सिटी उनके बीच रेफरेंडम करा कर देख ले कि वे पढ़ना चाहते हैं या नहीं लेकिन चंद संघी उत्पाती तत्वों की हिंसा वजह से विश्वविद्यालय का शैक्षणिक माहौल खराब नहीं होना चाहिए। कुठियाला और उपासने के समय विश्वविद्यालय का पूरी तरह पतन हो चुका था। पढ़ाई के अलावा वहां सबकुछ हो रहा था। छात्रों के प्लेसमेंट का स्तर गिर चुका था। उन्हें बेहतरीन तरीके से क्राफ्ट सिखाकर ही प्लेसमेंट बेहतर किया जा सकता है। तभी उन्हें अच्छे संस्थानों में नौकरियां मिलेंगी।'

दिलीप मंडल आगे लिखते हैं, 'अब वहां कुछ रचनात्मक काम हो रहा है। पहली बार अंतरराष्ट्रीय फेकल्टी वहां आई है। पढ़ने-लिखने का माहौल बना है। पूरी यूनिवर्सिटी स्क्रीन पर बेहतर दिखने की कोशिश कर रही है। PTC की प्रैक्टिस कर रही है। संघी तत्व उसे अपनी जागीर मानते रहे हैं। उन्हें तकलीफ हो रही है कि ये सब क्यों हो रहा है। मैं उनकी तकलीफ घटाने के पक्ष में नहीं हूं।'

छात्रों के नाम लिखा पत्र

ससे पहले उन्होंने अपने छात्रों के लिए फेसबुक पर एक पत्र लिखा। पत्र में उन्होंने लिखा, 'भोपाल के अपने विद्यार्थियों के प्रति, आपका दोष नहीं है। मुझे आपसे कोई शिकायत नहीं है। आप एक बड़े षड्यंत्र के शिकार बन गए हैं। तोड़फोड़ गलत है। इसकी जगह विमर्श और बहस होनी चाहिए। आप मुझे बेहद प्रिय हैं। विश्वविद्यालयों को दुनिया भर में विमर्श का केंद्र माना गया है। विश्वविद्यालय रट्टा सेंटर नहीं हैं। सहमत और असहमत विचारों के बीच विमर्श न हो तो विश्वविद्यालयों का होना ही निरर्थक है।'

'वाल्टेयर की वह बात तो आपने सुनी ही होगी कि - ''हो सकता है मैं आपके विचारों से सहमत न हो पाऊं, फिर भी विचार प्रकट करने के आपके अधिकारों की रक्षा करूँगा।" मेरी बुद्ध-फुले-आंबेडकर विचारधारा से आपकी असहमति हो सकती है। लेकिन इसके लिए आपको अपनी विचारधारा के पक्ष में तर्क जुटाने चाहिए।

खैर, मैं जिस षड्यंत्र की ओर आपका इशारा कर रहा था, उसकी जड़ें भोपाल में नहीं, छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में हैं। रायपुर के कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय में कुलपति यानी वाइस चांसलर का पद इन दिनों खाली है। उसके लिए आवेदन मंगाए गए हैं। आवेदनों के आधार पर सर्च कमेटी ने कुछ नाम चुने हैं।

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मेरे खिलाफ खुलकर अभियान चला रहे जगदीश उपासने, जो आपके विश्वविद्यालय के कुलपति रह चुके हैं, का नाम उस चुने हुए लोगों की लिस्ट में है। अखबारों में छपा है कि मेरा नाम भी सलेक्टेड लोगों की लिस्ट में है। कई लोग कह रहे हैं कि मेरा नाम लिस्ट में सबसे ऊपर है।

नमें से ही कोई वहां कुलपति बनेगा। यही है भोपाल में चल रहे विवाद का मूल कारण, जिसमें आप बिना किसी गलती के फंस गए हैं। आपको इस आग में तब झोंका गया है, जब आपकी परीक्षाएं करीब हैं। षड्यंत्रकारियों ने ये भी नहीं सोचा कि आपका करियर इस तरह दांव पर लग जाएगा।

गदीश उपासने एक औसत प्रतिभा के व्यक्ति हैं। उनकी ताकत उनकी संघी पृष्ठभूमि है। न उन्होंने कोई किताब लिखी है, न उन्हें कभी कोई राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है, न कोई शोध पत्र लिखा है, न किसी अंतरराष्ट्रीय पब्लिकेशन में उनका कोई चैप्टर छपा है। किसी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय ने उन्हें कभी बोलने के लिए नहीं बुलाया। उनका टीवी पत्रकारिता का अनूभव शून्य है और डिजिटल पत्रकारिता में वे अभी पैदा नहीं हुए हैं। जबकि पत्रकारिता का भविष्य टीवी और वेब में ही है। वे सिर्फ हिंदी में लेखन करते हैं। जबकि मैंने आपको बताया है कि बहुभाषी होना कितना जरूरी है।

नके मुकाबले मेरे पास न सिर्फ डिग्रियां ज्यादा हैं, बल्कि मैंने चार महत्वपूर्ण किताबें लिखीं हैं जो देश के कई विश्वविद्यालयों की लाइब्रेरी में हैं। कई रिसर्च पेपर और पीएचडी में मेरी किताबों को साइट किया गया है। मुझे भारतेंदु हरिश्चंद्र राष्ट्रीय सम्मान मिल चुका है और राममोहन राय श्रेष्ठ पत्रकारिता सम्मान में मेरा विशेष उल्लेख है। मेरा एक चैप्टर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की मीडिया एथिक्स की किताब में शामिल है, जिसे पूरी दुनिया पढ़ती है।

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने मुझे बोलने के लिए बुलाया है। भारत में संपादकों की एकमात्र संस्था एडीटर्स गिल्ड ने मुझे अपनी संस्था का एक्जिक्यूटिव कमेटी मेंबर बनाकर सम्मानित किया है। जगदीश उपासने इस संस्था के सदस्य भी नहीं बनाए गए।

मैंने प्रिंट के अलावा टीवी पत्रकारिता और वेब पत्रकारिता की है। टीवी पत्रकारिता मैंने स्टार नेटवर्क के अलावा CNBCऔर आज तक के साथ की है। टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप में मैंने वेब पत्रकारिता में संपादक की जिम्मेदारी निभाई है। आज तक डॉट कॉम का मैं प्रभारी रह चुका हूं।

IIMC के मेरे पढ़ाए छात्र और छात्राएं सिविल सर्विस, स्टेट सिविल सर्विस के अलावा देश-विदेश में पत्रकारिता कर रहे हैं। वे सब मुझे बहुत प्रिय हैं। मैरे सैकड़ों लेख इंग्लिश में और हजारों लेख हिंदी में छपे हैं। कथादेश की मीडिया वार्षिकी का मैंने संपादन किया है।

मैंने कई वेब पोर्टल लॉंच किए हैं और कई लोगों को यूट्यूब चैनल खोलने में सलाह दी है। मैंने CNN से जुड़ेअंतरराष्ट्रीय एक्सपर्ट के साथ टीवी चैनल लॉन्च करने की ट्रेनिंग दी है। और ये सब मैने जाति की ताकत और जाति के नेटवर्क के बिना किया है। मैंने अपनी विचारधारा छिपाई नहीं है और इसका खामियाजा भी भुगता है लेकिन मेरा प्रोफेशनल जीवन उससे अलग है।

गदीश उपासने का जब इंडिया टुडे में कार्यकाल न बढ़ाकर मुझे संपादक बनाया गया तब पत्रिका तेजी से ढलान के रास्ते पर चल रही थी। मेरे समय् में पत्रिका फिर से खड़ी हो गई। वहां विविधता का मैंने ध्यान रखा और जगदीश उपासने तक को वहां लिखने का मौका दिया, क्योंकि वे RSS की विचारधारा का प्रतिनिधित्व करते हैं।

हरहाल जगदीश उपासने वाइस चांसलर बन जाएं, मुझे शिकायत नहीं है। लेकिन वे जिस तरह मेरे खिलाफ लिखकर छात्रों को भड़का रहे हैं, वह शर्मनाक है। मेरे खिलाफ लड़ाई है, मुझसे लड़िए। छात्रों को उकसाइए मत। उनका करियर महत्वपूर्ण हैं। अगर मेरी राय ली गई तो मैं कहूंगा कि मेरे विद्यार्थियों से FIR हटा ली जाए। सिर्फ जिन लोगों ने तोड़फोड़ की, उनके खिलाफ कानून अपना काम करे।

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संघ विश्वविद्यालय से दूर रहे। संघी अनपढ़ और कुपढ़ लोग हैं। न पढ़ेंगे, न पढ़ने देंगे। उनसे बचिए। मैं आपके सफल करियर की कामना करता हूं और चाहता हूं कि MOJO, PTC और ब्लाॉग की ट्रेनिंग के बाद मैं आपको एंकरिंग और टीवी रिपोर्टिंग सिखा पाऊं। यूट्यूब चैनल खोलकर पैसा कैसे कमाया जा सकता है, ये भी मुझे आपको सिखाना है।

स बीच PTC का अभ्यास करते रहिए। मैं चेक करूंगा। स्वस्थ रहिए, प्रसन्न रहिए, मजे कीजिए। नियमित सिनेमा देखिए और रिव्यू लिखिए। एक ही जिंदगी है, एक भी दिन बेकार नहीं होना चाहिए। कोई पुनर्जन्म नहीं होने वाला है। पुनर्जन्म की बात फ्रॉड है। सद्गुरू कबीर ने लिखा है- बहुरि नहीं आवना।'

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