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भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर भारी खतरा, ट्रंप के भारत दौरे से पहले अमेरिकी सीनेटरों ने जताई आशंका

Nirmal kant
14 Feb 2020 4:30 AM GMT
भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर भारी खतरा, ट्रंप के भारत दौरे से पहले अमेरिकी सीनेटरों ने जताई आशंका
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अमेरिकी कांग्रेस के सीनेटरों ने विदेश मंत्री माइक पॉम्पिओ को लिखा पत्र, पत्र में कहा भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों और राज्य के धर्मनिरपेक्ष चरित्र को खतरा, आंकलन करे स्टेट डिपार्टमेंट...

जनज्वार। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की भारत की बहुप्रचारित यात्रा जिसमें 24 फरवरी को अहमदाबाद की यात्रा भी शामिल है। अमेरिकी सीनेटरों के एक समूह ने अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ को पत्र लिखकर चिंता व्यक्त की है और कश्मीर में भारत की 'कार्रवाई' और विवादास्पद नागरिकता कानून के लिए राज्य विभाग (यूएस स्टेट डिपार्टमेंट) से आंकलन की मांग की है।

न्यूयॉर्क स्थित डिजिटल न्यूज साइट एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक सीनेटरों (जिनमें रिपब्लिकन लिंडसे ग्राहम और टॉड यंग, ​​और डेमोक्रेट्स के क्रिस वान होलेन और डिक डर्बिन शामिल हैं) ने लिखा है कि मोदी के दो कदमों से 'धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों और राज्य के धर्मनिरपेक्ष चरित्र को खतरा है।' उन्होंने भारत का एक मात्र मुस्लिम बहुल राज्य जम्मू-कश्मीर की घटनाओं को 'चिंतित' करने वाली के रूप में वर्णन किया।

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द्विदलीय (डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन के सीनेटर) पत्र में कहा गया है, 'भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर की स्वायत्तता को रद्द करने के छह महीने से अधिक समय बाद भी सरकार ने इस क्षेत्र में अधिकांश इंटरनेट पर पाबंदी जारी रखी है।' इसमें कहा गया है, 'भारत अब एकमात्र ऐसा लोकतंत्र है जिसने सबसे लंबे समय तक किसी इलाके में इंटरनेट पर पाबंदी लगाई है जिससे चिकित्सा देखभाल, व्यवसाय और शिक्षा तक पहुंच बाधित हो गई है।'

में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) का भी उल्लेख किया गया है, जो 'भारत के पड़ोसियों से धार्मिक अल्पसंख्यकों को नागरिकता के लिए एक फास्ट ट्रैक देगा लेकिन मुस्लिमों को नहीं। पत्र में कहा गया है कि इस कानून के परिणामस्वरूप लोग धर्म विशेष या जातीय अल्पसंख्यक राज्यविहीन, निर्वासित या बंद किए जा सकते हैं।

नागरिकता कानून का विरोध करने वाले लोगों के खिलाफ 'भारतीय अधिकारियों द्वारा बल के अत्यधिक उपयोग' के बारे में बात करते हुए 'एक्सिओस' की रिपोर्ट कहती है, 'मोदी और उनकी भारतीय जनता पार्टी भारतीय राजनीति पर हावी हैं। पिछला आम चुनाव जीतने के बाद से अपने हिंदू राष्ट्रवादी एजेंडे में तेजी से कार्रवाई की गई है। इससे सड़कों पर और भारत के संभ्रांत विश्वविद्यालयों में भीषण संघर्ष हुआ है। धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र के रूप में भारत की स्थिति खतरे में है।

ने पोम्पिओ से कश्मीर में राजनीतिक बंदियों की संख्या के आकलन के लिए भी कहा कि क्या उन्हें यातनाएं दी जा रही हैं। सीनेटरों ने कश्मीर में राजनीतिक बंदियों की संख्या, उन पर अत्याचार या अन्य प्रकार का दुर्व्यवहार, इंटरनेट पर पाबंदी, कश्मीर में विदेशी राजनयिकों, पत्रकारों और पर्यवेक्षकों के प्रवेश प्रतिबंध आदि का आंकलन करने को कहा है।

रिपोर्ट कहती है कि इस महीने के अंत में ट्रंप का यह भारत दौरा मायने रखता है। कश्मीर शटडाउन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दबाव बनाने के बजाय डोनाल्ड ट्रंप ह्यूस्टन में उनके साथ नजर आए थे और उनकी (मोदी) प्रशंसा भी की थी।

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ता दें कि बिना तथ्यों को जाने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस दौरे को लेकर हाल ही में कहा था कि 'अहमदाबाद में हवाई अड्डे से नए स्टेडियम तक 5 से 7 सात मिलियन लोगों द्वारा स्वागत की उम्मीद है।' डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी का हवाला देते हुए यह बात कही थी जबकि अहमदाबाद की आबादी 5.6 मिलियन है। हालांकि सरकारी सूत्रों का सुझाव है कि अमेरिकी राष्ट्रपति के स्वागत के लिए एक लाख से थोड़ा अधिक लोगों के द्वारा स्वागत की संभावना है।

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