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कोरोना के बीच बारिश से उजड़ी 4 बच्चों की गरीब विधवा मां की झोपड़ी, अभी तक नहीं मिली कोई मदद

Janjwar Desk
8 Jun 2020 2:32 PM GMT
कोरोना के बीच बारिश से उजड़ी 4 बच्चों की गरीब विधवा मां की झोपड़ी, अभी तक नहीं मिली कोई मदद
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पहले से ही कोरोना से हुए लॉकडाउन में तंगी से गुजर रही 4 बच्चों की विधवा गरीब मां की टूटी झोपड़ी
विधवा महिला मनीता के पति के 3 साल पहले जमीन के सदमे में हो गयी थी मौत, तब से किसी तरह अपने 4 बच्चों को पाल रही है वह...

आजमगढ़, जनज्वार। सामाजिक-राजनीतिक संगठन रिहाई मंच ने निजामाबाद के गौसपुर घुरी गांव में बारिश से मकान ढहने की सूचना पर पीड़ितों से मुलाकात कर उनको राहत सामग्री और सहायता उपलब्ध कराई। प्रतिनिधिमंडल में रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव, बाकेलाल, अवधेश यादव, विनोद यादव और धीरेन्द्र यादव मौजूद थे।

रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव ने कहा कि कोरोना महामारी में हमारी प्रतिबद्धता है कि जहां भी किसी जरूरतमंद को जरूरत है, वहां हम उनके साथ खड़े हों। राजीव यादव ने जिलाधिकारी से मांग की कि मनीता यादव का घर जो बारिश में ढह गया है उसके पुनर्निर्माण के लिए राशि प्रदान करें।

रिहाई मंच कहते हैं, मनीता विधवा हैं और उन पर 4 बच्चों की जिम्मेदारी है, ऐसे में उनके रोजगार के साथ उनके जीवन यापन के लिए जमीन आवंटित की जाए। वर्तमान में उनके घर में समुचित राशन की भी व्यवस्था नहीं थी, ऐसे में उन्हें राशन भी उपलब्ध कराया जाए।


प्रतिनिधिमंडल के बांकेलाल, अवधेश यादव, विनोद यादव ने कहा कि 5 जून 2020 को बारिश में मकान ढहने की सूचना निजामाबाद के गौसपुर घुरी गांव की शबाना आजमी से मिली, जिसके बाद हमने मनीता यादव से मुलाकात की।

मनीता ने बताया कि सुबह आठ बजे के करीब जब वह 4 बच्चों के साथ घर में खाना बना रहीं थी तो उसी वक्त उनके मकान की खपडै़ल की छत गिर गई, जिसमें उनका परिवार बाल-बाल बचा।

मनीता ने बताया कि उनके पति सागर यादव की मृत्यु तीन साल पहले जमीन के सदमे में हो गई थी। उनके पास तीन बिस्वा के करीब जमीन हैं। उनके चार बच्चे अंकित (10 वर्ष), गुंजा (8 वर्ष), पूजा (5 वर्ष) और अविनेश (3 वर्ष) की जिम्मेदारी अकेले मनीता की है। वो पास के महाबुद्धा डिग्री कॉलेज में झाड़ू-पोछा करके तीन हजार रुपए पाती हैं, जिससे वो बच्चों का भरण-पोषण मुश्किल से कर पाती हैं।

कोराना महामारी के इस दौर में 3 महीने से वह भी नहीं मिल पा रहा है। 7 जून 2020 को जब प्रतिनिधि मंडल उनसे मिला, तब तक उन्हें किसी भी प्रकार की प्रशासनिक सहायता नहीं मिली थी।

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