राजनीति

केरल के चुनावी दंगल में कॉरपोरेट भी पार्टी बना ठोक रहा है ताल, किसके सिर पर सजेगा जीत का ताज

Janjwar Desk
27 March 2021 4:52 AM GMT
केरल के चुनावी दंगल में कॉरपोरेट भी पार्टी बना ठोक रहा है ताल, किसके सिर पर सजेगा जीत का ताज
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केरल राज्य के एर्नाकुलम ज़िले में एक नहीं, बल्कि दो-दो कॉरपोरेट समूह 6 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव में कूद पड़े हैं, इन्हें कॉरपोरेट पार्टी कहा जा रहा है....

पीयूष पंत की रिपोर्ट

जनज्वार। एक ज़माना था जब बाहुबली चुनाव जिताने में राजनेताओं की मदद किया करते थे, लेकिन बाद में वे खुद ही चुनाव लड़ने लगे और उनमें से कुछ तो अब बाकायदा संसद और विधानसभाओं की शोभा बढ़ा रहे हैं। कुछ इसी तरह का हाल कॉरपोरेट्स का भी हो गया है। जो कॉरपोरेट्स पहले विभिन्न राजनीतिक दलों की तिजोरियां भरा करते थे, वो आज खुद की पार्टी बना सीधे चुनाव मैदान में कूद पड़े हैं।

और इसकी शुरुआत हुई है केरल राज्य से। जी हाँ, वही केरल राज्य जहां बारी-बारी से एलडीएफ और यूडीएफ की सरकारें बनती है और जो तमाम कोशिशों के बावजूद भाजपा को घास तक नहीं डालता है। इसी केरल राज्य के एर्नाकुलम ज़िले में एक नहीं बल्कि दो-दो कॉरपोरेट समूह 6 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव में कूद पड़े हैं। इन्हें कॉरपोरेट पार्टी कहा जा रहा है। इनके नाम है Twenty20 पार्टी और V4Kochi (आजकल V4 People के नाम से मशहूर) पार्टी।

जबकि Twenty20 पार्टी का प्रभाव ग्रामीण एर्नाकुलम में ज़्यादा है, वहीं V4Kochi पार्टी ने कोच्चि जैसे शहरी इलाक़े में अपने पैर पसार रखे हैं। इसने ज़िले के अनेक चुनाव क्षेत्रों में अपने उम्मीदवार उतारे हैं। वहीं Twenty-20 पार्टी अपने गठन के 9 वर्षों बाद विधानसभा के लिए चुनावी मैदान में उतरी है। इसने 6 अप्रैल के चुनाव के लिए 8 उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं और इसका दावा है कि इसमें से कम से कम 2 उम्मीदवार तो विधान सभा में पहुंचेंगे ही। पार्टी का मुख्यालय एर्नाकुलम से 16 किलोमीटर दूर कीज़हैक्काम्बलम स्थान पर है। पार्टी ने जिन 8 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं उनके नाम हैं : विपीन, थ्रिकाककरा, पेरुम्बवूर, मुवत्तुपुज़ा कुण्नथुनाड, एर्नाकुलम, कोठमंगलम और कोच्चि।

Twenty20 पार्टी के इस कदम से एलडीएफ और यूडीएफ दोनों गठबंधनों में सुगबुगाहट है। उन्हें डर है कि एर्नाकुलम में कहीं उनका परंपरागत आधार न खिसक जाये। उनकी आशंका जायज भी लगती है क्योंकि पिछले साल दिसंबर में हुए पंचायत चुनाव में यह पार्टी एर्नाकुलम ज़िले की 4 ग्राम पंचायतों,द9 ब्लॉक स्तर की पंचायतों और 2 ज़िला स्तर की पंचायतों में जीत दर्ज़ कर चुकी है।

इसके पहले 2015 में Twenty-20 पार्टी ने कीज़हैककंबलम पंचायत के चुनाव लड़े थे और पंचायत की 19 सीटों में से 17 सीटें जीत कर इतिहास रच डाला था। फिर 2020 के स्थानीय निकाय चुनावों में इस पार्टी ने ना केवल कीज़हैककंबलम पंचायत पर अपना कब्ज़ा बनाये रखा बल्कि ऐक्करानाद,कुण्नथुनाडु और मज़्हुवान्नूर नामक पड़ोसी पंचायतों में भी जीत हासिल कर ली। यही नहीं,वेंगोला ग्राम पंचायत के अनेक वार्डों में भी जीत दर्ज़ कर पार्टी ने राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया।

वैसे एर्नाकुलम में दबदबा कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ का है। 2016 के विधानसभा चुनाव के बाद यहां की 14 में से 11 सीटें यूडीएफ के खाते में गई थीं, जबकि विपीन,कोच्ची और त्रिपुर्निथुरा सीटों पर एलडीएफ ने जीत दर्ज़ करी थी। यही कारण है कि कांग्रेस और लेफ्ट फ्रंट दोनों ही Twenty20 पार्टी के चुनाव लड़ने से परेशान हैं। इसी के चलते अभी हाल में सीपीएम और कांग्रेस दोनों ने ही पार्टी के संचालक साबू एम जैकब को ऐरक्कारंदु पंचायत की एक बैठक में शामिल होने से रोक दिया था। जैकब को वहां ग्राम पंचायत अधिकारियों ने एक विशेषज्ञ के रूप में बुलाया था।

दरअसल Twenty-20 पार्टी केरल के एल्युमिनियम और टेक्सटाइल उद्योग की 12 अरब की हैसियत रखने वाली एक अग्रणी कंपनी अन्ना काइटेक्स ग्रुप द्वारा कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी विभाग के रूप में स्थापित की गई थी। साबू जैकब इस कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। पार्टी के संचालक भी साबू ही हैं।

साबू जैकब और उनकी पार्टी कीज़हैककंबलम के बाशिंदों को सहारा देने का एक बहुत बड़ा जरिया रहे हैं। कंपनी की पार्टीनुमा इकाई ने कीज़हैककंबलम में खाद्य सामग्रियों का एक सुपर बाजार स्टोर खुलवा दिया जिसमें लोगों को रोज़मर्रा की ज़रुरत की चीज़ें बाज़ार भाव से 50 फीसदी कम दाम में मिलने लगीं। इसने ग्राम पंचायत के खस्ता मकानों को दुबारा बनवाया और गरीबों तथा वंचितों के लिए नई कॉलोनी का निर्माण करवाया।

यही शायद Twenty20 पार्टी की लगातार बढ़ रही लोकप्रियता और विस्तार का राज़ भी है। साबू जैकब खुद कहते हैं,"राजनीति में लोग अक्सर पैसे,ताक़त और पद के पीछे भागते हैं लेकिन जहां तक हमारा सवाल है तो लोग जानते हैं कि हमें इन सब से कोई लगाव नहीं है। जन-कल्याण के इतर हमारा कोई और मक़सद है भी नहीं और इसने हमारे संगठन के विस्तार में मदद की है।" उनका दावा है कि पिछले दिनों पार्टी के सदस्यता अभियान के दौरान 1 लाख 25 हज़ार लोगों ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की है।

जहां कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी के तहत राशन आधे दाम पर उपलब्ध कराने, गरीबों के लिए सस्ते मकान बनाने जैसे कदमों के माध्यम से Twenty20 पार्टी कुन्नाथुनाद चुनाव क्षेत्र की पंचायतों में लोकप्रिय हो गई, वहीं V4 Kochi नामक समूह ने कोच्चि शहर में नागरिक सेवाओं से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए राजनीति में प्रवेश किया। इस पार्टी का नेतृत्व कोच्चि के बाशिंदों का एक समूह करता है जिसमें कॉरपोरेट में काम करने वाले और सामाजिक कार्यकर्त्ता भी शामिल हैं और जो नागरिक समाज के मुद्दों के साथ-साथ भ्रष्टाचार का मुद्दा भी उठाता है।

V4 Kochi कोच्चि के अलग अलग इलाकों में पेट्रोल-डीज़ल के दाम में बढ़ोत्तरी,गहरे समुद्र में मछली मारने से जुड़े विवाद और चोर दरवाजे से सरकारी पदों में नियुक्तियों जैसे मुद्दों पर धरना-प्रदर्शन करती रही है। एनजिओ सेक्टर से पैदा हुई दिल्ली की आम आदमी पार्टी की तरह यह भी कोच्चि की दीर्घ समय से लंबित पर्यावरण,जल भराव और ट्रैफिक से जुडी परेशानियों जैसी समस्याओं का समाधान ढूंढने की बात करती है।

विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए V4 Kochi का नाम V4 People हो गया है। इसने जब सन 2000 में कोच्चि नगर निगम की 74 सीटों में से 50 सीटों पर चुनाव लड़ा था तो इसे 20 हज़ार से भी ज़्यादा वोट हासिल हुए थे। हालाँकि यह पार्टी किसी भी वार्ड में जीत हासिल नहीं कर पाई लेकिन इसने कई वार्डों में एलडीएफ और यूडीएफ का खेल बिगाड़ दिया था। यह 3 वार्डों में दूसरे स्थान पर रही और 10 वार्डों में तीसरे स्थान पर।

विधानसभा चुनाव में V 4 People ने 3 चुनाव क्षेत्रों से अपने उम्मीदवार खड़े किये हैं। ये चुनाव क्षेत्र हैं कोच्चि,एर्नाकुलम और थ्रिक्काकरा। ये तीनों चुनाव क्षेत्र कोच्चि शहर और उसके आसपास के हैं। अब देखना ये होगा कि क्या वाकई ये दोनों कॉर्पोरेट पार्टियां जीत दर्ज़ करा पाएंगी या फिर महज वोट कटुआ बन बस एलडीएफ या यूडीएफ का गणित बिगाड़ने का काम करेंगी?

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