CM धामी को धाकड़ मानने के लिए हरीश रावत ने रखी यह शर्त, दी एक महीने की मोहलत, सड़क की दुर्दशा देख पूर्व CM बैठे धरने पर

CM धामी को धाकड़ मानने के लिए हरीश रावत ने रखी यह शर्त, दी एक महीने की मोहलत, सड़क की दुर्दशा देख पूर्व CM बैठे धरने पर
Ramnagar news। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की "धाकड़ धामी" के नाम से की जा रही ब्रांडिंग के मामले में गुरुवार 3 नवंबर को राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी कूद पड़े। उन्होंने धामी को अभी धाकड़ तस्लीम न करते हुए चुनौती देकर उन्हें अपने आप को धाकड़ साबित करने के लिए एक महीने की मोहलत दी है।
दरअसल उत्तराखंड प्रदेश में बदहाल सड़कों का मुद्दा लंबे समय से बना हुआ है। कई दुर्घटनाओं की वजह बनती यह सड़कें अपने पुनरुद्धार के लिए किसी भगीरथ की बाट जोहने को मजबूर हैं। प्रदेश की बेलगाम नौकरशाही मंत्रियों तक के आदेशों को हवा में उड़ा देती है, ऐसे में आम आदमी की आवाज सुने जाने की उम्मीद तो क्या ही रहे। गुजरे एक सप्ताह से प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इन बदहाल सड़कों को गड्ढामुक्त किए जाने की कवायद शुरू की है।
रामनगर से रानीखेत को जाने वाली सड़क जहां पहाड़ और मैदान को जोड़ने में अपनी बड़ी भूमिका निभाती है तो यह इससे ज्यादा अपनी बदहाली के लिए जानी जाती है। जगह जगह गड्ढों और संकरेपन की वजह से भतरोजखान से लेकर रामनगर तक का 68 किमी. का सफर तीन घण्टे में सर्कस के कलाकार की तरह बचते बचाते तय करना होता है। रामनगर से रानीखेत को जाने वाली इसी सड़क की दुर्दशा को देखते हुए गुरुवार को पूर्व सीएम हरीश रावत अपने घर मोहनरी से वापस लौटने के दौरान मोहान में ही नेशनल हाइवे संख्या 309 पर चक्का जाम लगाकर धरने पर बैठ गए। इस दौरान उनके साथ रामनगर व सल्ट विधानसभा क्षेत्र के तमाम कांग्रेसी भी धरने पर बैठ गए।
प्रदेश में सड़कों की दुर्दशा के खिलाफ बीच सड़क पर धरना देने बैठे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आरोप लगाया कि एक साजिश के तहत इन सड़कों को बरबाद किया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि रामनगर रानीखेत मार्ग के साथ ही प्रदेश की हर सड़क को गड्ढा मुक्त किया जाए। इन सड़कों की वजह से जनता और पर्यटको को हुई फजीहत के लिए जिम्मेदार प्रदेश के लोक निर्माण विभाग के मंत्री को बर्खास्त किया जाना चाहिए। दिग्गज कांग्रेसी नेता ने कहा कि संघर्षों से बनी इन सड़को को साज़िश के तहत नही ठीक किया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगो के साथ ही पर्यटको को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने मुख्यमंत्री धामी की धाकड़ ब्रांडिंग पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री धामी को वह तब धाकड़ मानेगे जब 1 महीने में यह सड़के दुरुस्त हो जाएंगी। नही तो वह धाकड़ नही भाकड़ धामी समझे जायेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि अब प्रदेश में सड़कों को बचाने के लिए भी सड़कों पर आकर संघर्ष करना पड़ेगा। सड़कों के साथ साथ खेती के भी बुरे हाल है। ऐसे में इन विभागों के मंत्रियों को बर्खास्त कर देना चाहिए। रावत ने प्रदेश की खस्ताहाल सड़कों के लिए प्रदेश की अन्य अलग अलग जगहों पर धरना दिए जाने का भी ऐलान किया है।
रावत के साथ धरना देने वालों में मुख्य तौर पर सल्ट के नारायण सिंह रावत, धुमाकोट के मनीष सुंदरियाल, मोहन फर्त्याल, विकास डंगवाल, पुष्कर दुर्गापाल, खष्टीनन्दन जोशी, महेंद्र लटवाल, भूपाल लटवाल, गोविंद नेगी, प्रदीप मनराल, बल्लू लटवाल, मोहन रावत, कुलदीप शर्मा, रवि चानिया, मौलाना जलीस अहमद, प्रदीप रावत सहित रामनगर और सल्ट विधानसभा क्षेत्र के कई कांग्रेसी मौजूद थे। इस धरने के दौरान रामनगर से पहाड़ और पहाड़ से रामनगर आने वाले सैंकड़ों वाहन भी इस जाम में फंसे रहे।











