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भाजपा में शामिल कई तृणमूल नेता पुरानी पार्टी में करना चाहते हैं 'घर वापसी'

Janjwar Desk
7 Jun 2021 2:47 AM GMT
भाजपा में शामिल कई तृणमूल नेता पुरानी पार्टी में करना चाहते हैं घर वापसी
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कभी टीएमसी के कद्दावर नेता मुकुल राय के बेटे बार-बार दे रहे हैं पार्टी में वापसी के संकेत

चुनाव के पहले टीएमसी से भी 33 विधायक ऐसे थे, जो बीजेपी में शामिल हो गए थे, दावा किया जा रहा है कि 33 विधायक तो टीएमसी के संपर्क में हैं ही, इसके अलावा बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुकुल रॉय के बेटे सुभ्रांशु भी तृणमूल जॉइन करना चाहते हैं...

जनज्वार ब्यूरो, कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में अटकलों का दौर शुरू हो गया है। ऐसा लग रहा है कि इस साल विधानसभा चुनाव में हार के बाद बीजेपी के कई नेता नाराज़ हैं और वे ममता बनर्जी के साथ एक बार फिर से हाथ मिलाना चाहते हैं। ये वो नेता हैं जो पहले दीदी के साथ थे।

बीजेपी नेता मुकुल रॉय के बेटे शुभ्रांशु रॉय बार-बार ये संकेत दे रहे हैं कि वो ममता की पार्टी से दूर नहीं गए हैं। शनिवार 5 जून को उन्होंने बनर्जी का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी ने मुश्किल घड़ी में उनके परिवार का हालचाल जाना इसके लिए वो मुख्यमंत्री के आभारी है। इससे पहले उन्होंने फेसबुक पोस्ट के जरिए बीजेपी को इशारों ही इशारों में आत्ममंथन की नसीहत दे डाली थी।

बीजेपी के एक, दो नहीं बल्कि 33 विधायक ऐसे हैं, जो दोबारा सत्तासीन तृणमूल कांग्रेस में जाना चाहते हैं। चुनाव के पहले टीएमसी से भी 33 विधायक ऐसे थे, जो बीजेपी में शामिल हो गए थे। इनमें से 13 को पार्टी ने टिकट दिया था। दावा किया जा रहा है कि 33 विधायक तो टीएमसी के संपर्क में हैं ही, इसके अलावा बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुकुल रॉय के बेटे सुभ्रांशु भी तृणमूल जॉइन करना चाहते हैं।

तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, हम नेता के हर पहलू पर विचार करेंगे और उस व्यक्ति को फिर से पार्टी की छत्रछाया में लौटने की अनुमति देने से पहले स्थानीय नेताओं की राय भी लेंगे। तृणमूल के सूत्रों ने यह भी संकेत दिया है कि हाई वोल्टेज चुनावों ने इन दलबदलुओं और स्थानीय कार्यकतार्ओं के बीच विश्वास की कमी पैदा की है। मुकुल रॉय के अलावा, ऐसे कई भाजपा नेता हैं जिन्होंने पार्टी में वापस आने की इच्छा व्यक्त की है। विधानसभा चुनाव में पार्टी का टिकट ना मिलने पर पार्टी छोड़ने वाली सोनाली गुहा ने कहा कि उन्होंने अत्यधिक भावनाओं और गुस्से में पार्टी छोड़ दी थी। अब उन्हें एहसास हुआ है कि उन्होंने बहुत बड़ी गलती की है।

मुख्यमंत्री को एक इमोशनल ट्वीट कर टीएमसी के पूर्व विधायक ने लिखा, भाजपा में पानी से बाहर एक मछली की तरह वह महसूस करती है। वह भाजपा के साथ फिट नहीं हो सकती। वह बनर्जी के बिना नहीं रह सकती है और अगर मुख्यमंत्री उन्हें माफ नहीं करेंगी, तो वह खत्म हो जाएंगी। टीएमसी में फिर से शामिल होने की इच्छा व्यक्त करते हुए विधानसभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर ने लिखा, मुझे अपने खेमे में ले लीजिये और मुझे आपके मार्गदर्शन और आशीर्वाद के तहत अपना शेष जीवन जीने की अनुमति दें।

हबीबपुर विधानसभा क्षेत्र के लिए टिकट आवंटित की गई सरला मुर्मू ने मार्च में पार्टी छोड़ दी थी और यह आरोप लगाते हुए भाजपा में शामिल हो गईं थी कि जिला नेतृत्व उन्हें काम नहीं करने दे रहा है। हालांकि पार्टी के सूत्रों का कहना है कि उन्होंने पार्टी इसलिए छोड़ी क्योंकि वह मालदा साउथ से चुनाव लड़ना चाहती थीं। मुर्मू ने बनर्जी को एक पत्र लिखकर पार्टी में शामिल होने की इच्छा व्यक्त की। कई लोग हैं जो वापस आना चाहते हैं, जिनमें 6 विधायक और 3 सांसद शामिल हैं।

तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा, जब पार्टी मुश्किल में थी तब उन्होंने पार्टी छोड़ दी थी और अब वे वापस आना चाहते हैं। मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकता क्योंकि इस मुद्दे पर कोई नीतिगत फैसला नहीं हुआ है. तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष ने साथ ही यह भी कहा, पार्टी इन लोगों का भविष्य तय करेगी।

रवींद्र भारती यूनिवर्सिटी में डिपार्टमेंट ऑफ पॉलिटिकल साइंस के प्रोफेसर विश्वनाथ चक्रवर्ती कहते हैं कि बंगाल देश का इकलौता ऐसा राज्य है जहां लोगों का जीवन पूरी तरह से राजनीति से जुड़ा है। पॉवर पॉलिटिक्स से यहां जीवन-यापन होता है। सामाजिक सुरक्षा मिलती है। जन्म से मृत्यु तक पॉवर पॉलिटिक्स का असर होता है।

यही कारण है कि जो लोग चुनाव के पहले बीजेपी में शामिल हुए, अब वे कुछ भी करके टीएमसी की तरफ लौटना चाहते हैं। बंगाल में हर जगह सत्ता में रहने वाली पार्टी का इन्वॉल्वमेंट होता है। बिना पार्टी की सहमति के कोई कुछ नहीं कर सकता। अपोजिशन का कोई रोल यहां नहीं होता। यह कल्चर शुरू से है, जो आगे भी बनता दिख रहा है।

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