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राजनीति

जो बिक और झुक नहीं सकते, उन्हें झूठे मामले में फंसाकर सदन की सदस्यता से वंचित कर कैद कर रही मोदी सरकार : माले

Janjwar Desk
5 April 2024 12:55 PM GMT
जो बिक और झुक नहीं सकते, उन्हें झूठे मामले में फंसाकर सदन की सदस्यता से वंचित कर कैद कर रही मोदी सरकार : माले
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file photo

लखनऊ। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी लोकसभा चुनाव में विपक्ष की आवाज को चुप कराने की साजिश कर रही है। इस साजिश के तहत ईडी, इन्कम टैक्स, सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर विपक्ष के मुख्यमंत्रियों को जेल भेजा जा रहा है। विपक्षी पार्टी के खाते सीज किये जा रहे हैं। विपक्ष के नेताओं पर मुकदमे लगाए जा रहे हैं। उन्हें प्रलोभन और धमकी दी जा रही है। जो बिक नहीं सकते या झुक नहीं सकते, उन्हें झूठे मामले में फंसाकर सदन की सदस्यता से वंचित किया जा रहा है और कैद किया जा रहा है।

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित आप पार्टी के अन्य नेताओं को जेल, बिहार में आरा जिले के अगिआंव विधानसभा सीट से भाकपा (माले) के विधायक युवा नेता मनोज मंजिल की विधानसभा सदस्यता छीना जाना आदि मामले इसके उदाहरण हैं। यह बात भाकपा (माले) के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने 4 अप्रैल को नरही, हजरतगंज स्थित लोहिया भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कही।

राज्य सचिव ने कहा कि चुनावी बांड घोटाले ने साबित किया है कि भाजपा और उसकी सरकार महाभ्रष्ट है। यह घोटाला मोदी सरकार का सबसे निर्लज्ज और मेगा भ्रष्टाचार है। इसने भाजपा के शुचिता के नारे को पूरी तरह छलावा साबित किया है। छह साल तक पर्दे के पीछे बांड के नाम पर चंदा दो, धंधा लो का खेल चलता रहा। वसूली के लिए केंद्रीय एजेंसियों के छापे डलवाये गए। भाजपा की रिश्वतखोरी चलती रही। बांड के पैसों के एवज में कारपोरेट को बड़े-बड़े ठेके पट्टे और कानूनी सुरक्षा दिलवाई गई।

असंवैधानिक, भ्रष्ट व अनैतिक तरीकों से एकत्र की गई विपुल राशि का इस्तेमाल विपक्ष की राज्य सरकारों को गिराने, पार्टियों को तोड़ने और सांसदों-विधायकों को खरीदने में किया गया। इस घोटाले ने चुनाव में सभी दलों के लिए समतल मैदान उपलब्ध कराने के चुनाव आयोग के संकल्प को बेमानी साबित किया है। चुनावी बांड योजना को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया है, मगर इस महाभ्रष्टाचार की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में एसआईटी इसकी जांच करे।

कामरेड सुधाकर ने कहा कि लोकसभा चुनाव में भाकपा (माले), इंडिया गठबंधन के घटक दल के रूप में बिहार की तीन और झारखंड की एक सीट पर चुनाव लड़ रही है। विधायक सुदामा प्रसाद आरा से, पोलित ब्यूरो सदस्य व संयुक्त किसान मोर्चा के नेता राजाराम सिंह काराकाट से, विधायक संदीप सौरभ नालंदा से और विधायक विनोद सिंह कोडरमा (झारखंड) से भाकपा (माले) के लोकसभा प्रत्याशी हैं। बिहार के अगिआंव (सु.) विधानसभा उपचुनाव में युवा नेता शिवप्रकाश रंजन माले उम्मीदवार हैं। पश्चिम बंगाल, उड़ीसा व आंध्र प्रदेश में भी, जहां गठबंधन नहीं है, पार्टी सीमित सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

माले राज्य सचिव ने कहा कि उत्तर प्रदेश सबसे बड़ा राज्य होने के कारण यहां भाजपा की फासीवादी चुनौती भी बड़ी है। लिहाजा यहां भाकपा (माले) ने खुद चुनाव न लड़कर तानाशाह मोदी सरकार को शिकस्त देने व विपक्षी वोटों का बंटवारा न्यूनतम करने के उद्देश्य से इंडिया गठबंधन के सहयोगियों को समर्थन देने और उनके पक्ष में प्रचार अभियान चलाने का फैसला किया है। प्रचार अभियान स्वतंत्र रुप से और इंडिया गठबंधन के प्रत्याशियों के साथ संयुक्त रुप से भी चलाया जाएगा। संयुक्त सभाएं की जाएंगी।

माले नेता ने कहा कि हाल में सम्पन्न जेएनयू छात्रसंघ चुनाव में भाजपा समर्थित एबीवीपी के ऊपर वामपंथी पैनल की जीत से लोकसभा चुनाव के मौके पर सकारात्मक संदेश गया है। उन्होंने संविधान, लोकतंत्र व देश की रक्षा के लिए मतदाताओं से एकजुट होकर भाजपा व उसके सहयोगियों को हराने और इंडिया गठबंधन के प्रत्याशियों को जिताने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह चुनाव एक जंग है और इस जंग को इंडिया गठबंधन को जीतना है।

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