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Rape Case : भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन को हाईकोर्ट के आदेश बावजूद सुप्रीम कोर्ट से कैसे मिली राहत, जानिए क्या है सर्वोच्च अदालत का लॉजिक

Janjwar Desk
23 Aug 2022 11:57 AM IST
Rape Case : भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन को हाईकोर्ट के आदेश बावजूद सुप्रीम कोर्ट से कैसे मिली राहत, जानिए क्या है सर्वोच्च अदालत का लॉजिक
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Rape Case : मुकुल रोहतगी ने शीर्ष अदालत से कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट यह मानकर चल रही है कि प्राथमिकी दर्ज होने के बाद ही जांच हो सकती है। यह तो कानून की गलत व्याख्या है।

Rape Case : दिल्ली के छत्तरपुर फार्म हाउस पर रेप करने के आरोपी व पूर्व केंद्रीय मंत्री शाहनवाज हुसैन (Shahnawaz Hussain ) को एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ( Supreme Court ) ने बड़ी राहत दी है, लेकिन उन पर लगे आरोप अभी पहले की तरह बरकरार हैं। अब इस मसले पर सितंबर के तीसरे सप्ताह में सुनवाई होगी। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्म ( Rape Case) का आरोप लगाने वाली एक महिला की शिकायत पर शाहनवाज हुसैन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने से जुड़े दिल्ली हाईकोर्ट ( Delhi High Court ) के आदेश के अमल पर रोक लगा दी है। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने 17 अगस्त को हुसैन की वह याचिका खारिज कर दी थी जिसमें दिल्ली पुलिस ( Delhi Police ) को उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने वाले निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी गई थी। अब चर्चा इस बात की हो रही है कि आखिर शीर्ष अदालत ने किस आधार पर भाजपा नेता को राहत दी, और ये सब कैसे हुआ।

ये हैं FIR से राहत के आधार

शाहनवाज हुसैन (Shahnawaz Hussain ) के खिलाफ महिला की ओर से लगाए गए रेप के आरोप को लेकर न्यायमूर्ति यूयू ललित, न्यायमूर्ति एसआर भट और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने बताया कि हुसैन की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी की दलीलें सुनने के बाद पहली नजर में ऐसा लगता है कि इस मामले पर विचार करने की जरुरत है। पीठ ने कहा कि मामले पर आगे विचार किए जाने तक हाईकोर्ट के आदेश के अमल पर रोक रहेगी। यानि सुप्रीम कोर्ट को हुसैन का पक्ष सुनने के बाद डाउट है कि रेप हुआ भी है कि नहीं। साथ ही अदालत ये भी माना है कि जांच एफआईआर के बाद ही हो ये कोई जरूरी नहीं है।

मुकुल रोहतगी ने अदालत के सामने रखी थी ये दलील

22 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ( Supreme Court ) में सुनवाई के दौरान मुकुल रोहतगी ने कहा कि इस मामले में भाजपा नेता के खिलाफ बिल्कुल फर्जी आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट इस धारणा पर आगे बढ़ा है कि प्राथमिकी दर्ज होने के बाद ही जांच हो सकती है। यह कानून की गलत व्याख्या है। रोहतगी ने कहा कि याचिकाकर्ता एक सार्वजनिक हस्ती हैं और उनके खिलाफ फर्जी आरोप लगाए गए हैं। दूसरी तरफ महिला की ओर से पेश वकील ने कहा कि पुलिस आरोपियों के साथ मिलीभगत कर रही है। शाहनवाज हुसैन को हस्ती होने का गैर वाजिब लाभ दिया जा रहा है।

हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ SC ने रोहतगी के तर्क को माना सही

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा था कि निचली अदालत के 2018 के आदेश में कोई गड़बड़ी नहीं है और उसके आदेश पर अमल पर रोक को लेकर अपने पूर्व के अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया था। यहां पर अदालत से चूक ये हुई कि उसने ये मान लिया कि जांच एफआईआर के बाद ही संभव है, पर कानूनन ये सच नहीं है। जांच एफआईआर दर्ज किए बिना भी संभव है। इस आधार पर शीर्ष अदालत ने भाजपा नेता हुसैन की याचिका पर नोटिस जारी किया और दिल्ली सरकार समेत विभिन्न पक्षों से जवाब मांगा है। अब इसकी सुनवाई सितंबर के तीसरे सप्ताह के लिए स्थगित कर दी गई है।

बता दें कि इस मामले में दिल्ली की एक महिला ने 2018 में निचली अदालत का रुख करते हुए दुष्कर्म के आरोप में हुसैन (Shahnawaz Hussain ) के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया था। एक मजिस्ट्रेट अदालत ने 07 जुलाई 2018 को हुसैन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश देते हुए कहा था कि महिला की शिकायत से एक संज्ञेय अपराध का मामला बनता है। कायत से एक संज्ञेय अपराध का मामला बनता है।

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