राजनीति

ये इतिहास भी लिखा जाएगा कि जब देश में चिताएं जल रही थीं तब मोदी रैली कर रहे थे

Janjwar Desk
19 April 2021 6:26 AM GMT
ये इतिहास भी लिखा जाएगा कि जब देश में चिताएं जल रही थीं तब मोदी रैली कर रहे थे
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आज जब हर घर, हर चौराहे, हर मोहल्ले से लाशों का ढेर निकल रहा हो तो देश के मुखिया का खुश होना समझ भी आता है। शमशान में वेटिंग लिस्ट तो कमाल का मास्टरस्ट्रोक है। याद है उत्तर प्रदेश को किया गया उनका वादा, हर गांव में शमशान का। आज हर गांव में तीन चार शमशान हैं....

जनज्वार ब्यूरो, नई दिल्ली। देश के प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी के चुनाव जीतने की महत्वकांक्षा देश में जल रही चिताओं से भी बड़ी है। कोरोना महामारी की वजह से पूरे देश में हाहाकार मचा हुआ है। अस्पताल में सुविधाएं नहीं हैं तो श्मशान घाटों पर आम आदमी को अपने लोगों को जलाने के लिए घण्टों इंतजार करना पड़ रहा है, लकड़ियां तक नसीब नहीं हो रही हैं, ऐसे में पीएम रोज चुनावी रैलियां कर रहे हैं।

जब शहर-शहर, गाँव-गाँव क़तार लगाकर चिताएँ फूँकी जा रही हैं, जब इलाज और दवा की गुहार लगाते बीमारों की चीत्कार हाहाकार कर रही है, तब देश के दयालु नेता बंगाल में 'डेमोक्रेसी उत्सव' मनाने का आह्वान कर रहा है। महामारी के उपलक्ष्य में पूरे देश में 'टीका उत्सव' भी मनाया जा चुका है। वह बीमारी फैलने का जश्न ताली-थाली बजाकर और मोबाइल की रोशनी से पूरा करवा चुका है। वह युगावतार है। वह सचमुच महामानव है।

पूरे दिन शोसल मीडिया को स्क्रॉल करते वक्त हर चौथा-पांचवा पोस्ट किसी ना किसी के घर की बर्बादी को ही बयां करता ही दिख रहा है। किसी का भाई, किसी का बाप, किसी की माँ वक्त-बेवक्त जा रहे हैं। सबकी कहानी सिस्टम और सरकार के फेलियर पर आकर रुक जाती है। सबके संघर्ष अस्पतालों में डॉक्टर्स से विनती करने, ऑक्सीजन और बेड तलाशने के इर्द गिर्द ही घूम सिमट रही हैं। श्मशान घाटों पर शोर है। तब एक महामानव चुनाव जीतने का शंखनाद कर रहा है।

आज जब हर घर, हर चौराहे, हर मोहल्ले से लाशों का ढेर निकल रहा हो तो देश के मुखिया का खुश होना समझ भी आता है। शमशान में वेटिंग लिस्ट तो कमाल का मास्टरस्ट्रोक है। याद है उत्तर प्रदेश को किया गया उनका वादा, हर गांव में शमशान का। आज हर गांव में तीन चार शमशान हैं। अब कांग्रेसी इसको जुमला नहीं बोल पाएंगे। मोदी की सबसे अच्छी बात यह की लाशें बिछाते समय धर्म, जाति, बिरादरी कुछ नहीं देखते। कल ही तो फौजी सिंह अपने भाई के लिए गुहार लगाता दिखा था। और तो और भक्तों के घर भी नहीं बख्शे उनने।

प्रधानमंत्री मोदी और लाशों का तो पुराना याराना है। बल्कि ऐसे कहें कि जितनी ज्यादा लाशें उतनी ज्यादा उनकी ताकत। और यह सिलसिला 2002 गुजरात से चालू है। वैसे सूर्य को दीया दिखाने वाली बात होगी, लेकिन एक सलाह है कि झारखंड, राजस्थान, पंजाब, दिल्ली और महाराष्ट्र की सरकारें गिराकर वहां भी लगे हाथ चुनाव करवा देना चाहिए, जमकर प्रचार होना चाहिए और ठीकरा फोड़ने के लिए पूरा का पूरा गांधी परिवार है ही। अबकी बार मौतों में अमरीका का नंबर एक होने का रिकॉर्ड भी टूटना ही चाहिए। आखिर हम विश्वगुरु बन रहे हैं। कोई मजाक है क्या?

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