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उत्तराखंड : आप के मुख्यमंत्री उम्मीदवार कोठियाल का सनसनीखेज दावा, 25 हजार घूस देकर बना चम्पावत का "चौकीदार"

Janjwar Desk
7 Sep 2021 3:25 PM GMT
उत्तराखंड : आप के मुख्यमंत्री उम्मीदवार कोठियाल का सनसनीखेज दावा, 25 हजार घूस देकर बना चम्पावत का चौकीदार
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प्रदेश में बेरोजगारों को लूटने के लिए लगभग सभी विभागों के अस्थाई पदों पर भी सीधे कोई नियुक्ति नहीं होती। यह नियुक्ति एक बिचौलिया जिसे पढ़े-लिखों की भाषा में "आउटसोर्सिंग कंपनी" जैसा नाम दिया जाता है, के माध्यम से मिलती है....

सलीम मलिक की रिपोर्ट

देहरादून। भारतीय जनता पार्टी शासित उत्तराखण्ड प्रदेश में मिल रहे अनुकूल खाद-पानी की बदौलत पहले भ्र्ष्टाचार का बीज पनपते-पनपते पहाड़ जितना बड़ा हो चला है। सरकार का कोई ऐसा विभाग या अंग नहीं है जो इससे बचा हो। एक मामूली से सरकारी काम के लिए केवल चप्पल का घिस जाना बड़े सौभाग्य की बात होती है यदि बिना घूस के आपका वह काम हो जाये। "घूस अनन्त:-घूसकथा अनंत:" के हज़ारों किस्सों में राज्य के एक दिलचस्प घूस किस्से के कारनामे का खुलासा हुआ है।

केदारनाथ का पुनर्निर्माण करके देश-विदेश में चर्चाओं में आये और वर्तमान में आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री चेहरे रिटायर्ड कर्नल अजय कोठियाल का दावा है कि पच्चीस हज़ार रुपये रिश्वत लेकर उन्हें चम्पावत जिले में चौकीदार के पद पर पोस्टिंग मिली है। बिना किसी जांच-पड़ताल के केवल पच्चीस हज़ार रुपये की बदौलत उन्हें यह नौकरी महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग द्वारा चयनित एक आउटसोर्सिंग कंपनी "ए स्क्वायर" के माध्यम से मिली है।


यहां आपको बताते चलें कि प्रदेश में बेरोजगारों को लूटने के लिए लगभग सभी विभागों के अस्थाई पदों पर भी सीधे कोई नियुक्ति नहीं होती। यह नियुक्ति एक बिचौलिया जिसे पढ़े-लिखों की भाषा में "आउटसोर्सिंग कंपनी" जैसा नाम दिया जाता है, के माध्यम से मिलती है। ऐसी किसी भी कम्पनी का इतिहास टटोलेंगे तो वह भारतीय जनता पार्टी से जुड़े किसी नेता अथवा कार्यकर्ता की या उनके किसी नाते-रिश्तेदार की ही निकलेगी। किसी कारणवश यदि सीधे तौर पर ऐसा न भी दिख सका तो ऐसी आउटसोर्सिंग कम्पनी का कोई न कोई तार येन-केन-प्रकारेण भाजपा से जुड़े व्यक्ति से हर हाल में जुड़ा मिलेगा।

ए स्क्वायर नाम की इस आउटसोर्सिंग ने भी कर्नल अजय कोठियाल को भूतपूर्व सैनिक कोटे से जो नौकरी दी उसके लिए उसने पच्चीस हज़ार रुपये (सीधे तो ले भी नहीं सकते) एक स्व. निर्मला सिंह सेवा समिति नाम के एनजीओ के बैंक खाते में जमा करवाकर दी। नौकरी के लिए पैसे लेने वाले इस "स्व. निर्मला सिंह सेवा समिति" एनजीओ और नौकरी देने वाली कम्पनी "ए स्क्वायर" के मालिक एक ही है। उनका नाम अजयप्रताप सिंह है।

इस मामले में कर्नल कोठियाल का कहना है कि उनसे बाल विकास कल्याण विभाग में भूतपूर्व सैनिक कोटे से चौकीदार की नौकरी के लिए 25000 हजार रुपये की मांग की गई, जो कि उनके द्वारा दिए गए अकाउंट में जमा कराई गई। उसके बाद उनकी बिना जांच पड़ताल किए ही आउटसोर्स कंपनी ने उन्हें सेक्यूरिटी गार्ड की नौकरी देते हुए चंपावत में उन्हें पोस्टिंग भी दे दी।

मिठाई खिलाने विभाग पहुंचे कोठियाल

अपनी नौकरी का नियुक्ति पत्र मिलने के बाद कर्नल कोठियाल महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के अपर सचिव वीके मिश्रा से मिलने भी पहुंच गये। नौकरी मिलने पर उन्होंने अपर सचिव को मिठाई खिलाते हुए बताया कि आपके विभाग की चयनित आउटसोर्स कंपनी ने मेरी बिना जांच पडताल किए पच्चीस हज़ार लेकर मुझे सुरक्षा गार्ड की नौकरी दी है। जिस पर सकपकाये अपर सचिव पहले तो कुछ भी बोलने से बचते रहे। लेकिन फिर उन्हें दस्तूर के मुताबिक "वह नए आए हैं। उन्हें इस मामले की कोई जानकारी नहीं है, लेकिन मामले की जांच पड़ताल करवाई जाएगी।" कहना ही पड़ा। अपर सचिव का दिया गया यह बयान राज्य में रंगे हाथों पकड़े जाने पर आम चलन की बात है। इसे कहने और सुनने वाला, दोनो ही जानते हैं। इससे यह महसूस करने-कराने में बड़ी आसानी होती है कि साहब बहुत अच्छे इनोसेंट हैं, सारी बदमाशी इनकी जानकारी के बगैर होती है।

राष्ट्रवादी विचार ताक पर

उत्तराखण्ड सैनिक बाहुल्य प्रदेश है। भारतीय जनता पार्टी का प्रिय विषय भी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसी भावना के वशीभूत यहां के चार धाम के बाद पांचवा "सैन्य धाम" बनाने की घोषणा कर यहां के निवासियों को मानसिक-भावनात्मक संतुष्टि भी देते हैं। लेकिन इस प्रकरण से भाजपा के राष्ट्रवाद का खोखलापन भी उजागर हुआ है। यह नियुक्ति ही "भूतपूर्व सैनिक कोटे" से दिये जाने के बाद भी रिश्वत लेकर दी गयी थी। साफ है, पैसा लेने वाले भी इस खोखलेपन को जानते हैं।

हर विभाग बेरोजगारों को लूटने को तैयार

इस प्रकरण का इतने व्यापक रूप में खुलासा होने से यह केवल एक ही विभाग का कारनामा मानना बड़ी भूल होगी। ऐसे अन्य कई विभाग हैं जहां आउटसोर्सिंग के नाम पर बेरोजगारों से पैसा तो वसूला ही जाता है, लेकिन उन्हें पैसा लेने के बाद भी स्थाई नौकरी नहीं दी जाती। अकसर उन्हें वो वेतन भी नहीं मिलता, जो उनके कॉल लेटर में लिखा होता है। वेतन बैंक खाते में दिये जाने की बाध्यता होने के कारण कम वेतन दिये जाने का तोड़ यह है कि असली वेतन और मिलने वाले वेतन के बीच का अंतर "नगद नारायण" के रूप में वेतन जारी करने वाली कुर्सी अथवा उसके अधिकृत प्रतिनिधि तक पहुंचाना पड़ता है। ऐसा न करने पर इस कुर्सी का कभी तो कंप्यूटर हैंग हो जाता है तो कभी इन्टरनेट की स्पीड नहीं आती। यदा-कदा बिजली का बहाना भी होता है।

बेरोजगारों के साथ यह क्रूर मज़ाक उस प्रदेश में हो रहा है जो देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के भोर सुबह से देर रात तक "अट्ठारह-अट्ठारह घण्टे" किये जाने वाले कामों के अथक प्रयासों की बदौलत बेरोजगारी दर में प्रथम स्थान पर पहुंचा है।

इस मामले में कर्नल कोठियाल ने बता रहें कि अधिकारी उन्हें बरगलाने की कोशिश कर रहे हैं। अगर नए अधिकारी के संज्ञान में ये मामला नहीं है, तो किसी ना किसी अधिकारी को तो इस पूरे खेल की जानकारी होगी। जिसकी शह पर इतना आउटसोर्सिंग कंपनी का अवैध वसूली का इतने व्यापक स्तर पर खेल चल रहा है।

उन्होंने कहा कि जिस कंपनी ने उन्हें नौकरी दी है वो कंपनी लखनऊ की है। सेक्यूरिटी गार्ड बनने के लिए उनसे निर्मला सिंह सेवा समिति के अकांउट में 25 हजार डालने को कहा गया था, लेकिन ये एनजीओ और ए स्क्वायर कंपनी दोनों का मालिक एक ही व्यक्ति अजय प्रताप सिंह है। इतना बडा खेल प्रदेश में सरकार की नाक के नीचे हो रहा है।



सर्जिकल स्ट्राइक से प्रदेश का राजनैतिक पारा चढ़ा

भ्र्ष्टाचार पर कर्नल अजय कोठियाल की सर्जिकल स्ट्राइक से प्रदेश का राजनैतिक पारा चढ़ गया है। आम आदमी पार्टी ने इसे राज्यव्यापी मुददा बनाने का ऐलान कर दिया है।

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